त्वरित टिप्पणी: कर्ज मांग कर देश का खर्चा चलाने को मजबूर इमरान मियां

पाकिस्तान पूर्ण रूप से कंगाल हो चुका है, देश चलाने को धन नहीं है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को कर्ज लेकर देश चलाना पड़ रहा है। उसे अमेरिका और चीन जैसे देशों से उम्मीद है।

Created By : Shiv Kumar on :25-11-2021 14:51:11 इमरान खान खबर सुनें

पाकिस्तान पूरी तरह कंगाल हो चुका है। उसके पास देश चलाने के लिए पैसे नहीं हैं। पाकिस्तान के वजीरे आजम जनाब इमरान खान को कर्ज लेकर देश चलाना पड़ रहा है। वह अमेरिका और चीन जैसे सहयोगी देशों की ओर टकटकी लगाए देख रहे हैं कि ये देश अनुदान के रूप में भीख दें, तो उनका काम चले।
अपने पाठकों को बता दें कि अभी बहुत ज्यादा दिन नहीं हुए हैं। इमरान मियां कोरोना काल में भारत को इमदाद देने का दावा कर रहे थे। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जाहिद हफीज चौधरी ने तो यहां तक कहा था कि कोरोना काल में भारत की स्थिति बहुत दयनीय है। उनके यहां आक्सीजन की कमी है। यदि भारत चाहे तो पाकिस्तान राहत सामग्री भेज सकता है। पाकिस्तानी नागरिकों, नेताओं और एनजीओज ने बाकायदा 'इंडिया नीड्स आक्सीजनÓ आदि हैशटैग से मुहिम भी चलाई थी। तब पाकिस्तान के टीवी चैनलों, वहां के यूट्यूबर बड़े चटखारे लेकर भारत के बारे में अफवाहें फैला रहे थे। कोरोना संकट काल में भारत की ओर से तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी गई। यह हमारी सनातन परंपरा थी कि हम अपने पड़ोसी की खिल्ली नहीं उड़ाते हैं।
पाकिस्तान अपने उदय काल से ही भारत का किसी मायने में मुकाबला करने की स्थिति में कभी नहीं रहा। आज तो उसके हालत शायद अब तक के इतिहास में सबसे बदतर हैं। यह बात खुद प्रधानमंत्री इमरान खान ने स्वीकार की है। इस्लामाबाद में चीनी उद्योग के लिए फेडरल ब्यूरो ऑफ रेवेन्यू के ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम (टीटीएस) के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए खान ने कहा, हमारी सबसे बड़ी समस्या यह है कि हमारे पास अपना देश चलाने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है, जिसके कारण हमें कर्ज लेना पड़ता है। आपको बता दें कि इस समय पाकिस्तान पर 30 हजार खरब रुपये (पाकिस्तानी मुद्रा) का कर्ज है। दस साल पहले यह कर्ज 6 हजार खरब था। जो बढ़ते-बढ़ते 30 हजार खरब में तब्दील हो गया है। पाकिस्तान की टैक्स व्यवस्था इतनी बदहाल है कि इतने बड़े देश में सिर्फ 20 लाख लोग ही टैक्स अदा करते हैं।
इस टैक्स से मिले पैसे में से ज्यादातर का उपयोग पाकिस्तान को आतंकी संगठनों को फंडिंग करने में ही चला जाता है। बाकी बचा पैसा इतना होता नहीं है कि वह अपने देश की जरूरतों को पूरा कर सके। इसके लिए उसे चीन, रूस और अमेरिका सहित कुछ अमीर मुस्लिम देशों से कर्ज लेना पड़ता है। अपनी गरीबी और बदहाली का हवाला देकर वह एक बड़ी रकम विभिन्न विकास और कल्याणकारी परियोजनाओं के नाम पर झटक लेता है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री इमरान खान देश के खर्चे पूरे नहीं कर पा रहे हैं। दरअसल, भारत और पाकिस्तान एक साथ ही आजाद हुए हैं। आजादी के समय दोनों की हालत कमोबेश एक जैसी थी। अंग्रेजों द्वारा लूटे-खसोटे गए दोनों देशों में काफी दिक्कतें थीं। लेकिन भारत ने पंचवर्षीय योजनाएं चलाकर अपने को धीरे-धीरे मजबूत किया।
देश के विकास पर ध्यान दिया, वहीं पाकिस्तान के हुक्मरां भारत विरोध में इतने अंधे हो गए कि उन्होंने अपने देश की तरक्की की ओर ध्यान देने की जगह आतंकियों को पनाह देकर भारत को बरबाद करने का वाब देखने लगे। उन्हें भारत की तरक्की फूटी आंखों नहीं सुहाती है। पाकिस्तान में जो भी सरकार या फौजी तानाशाह सत्ता पर काबिज होता है, उसकी पहली प्राथमिकता भारत विरोध होती है।
पिछले सत्तर-पचहत्तर सालों से यही हो रहा है। लेकिन पाकिस्तान के हुक्मरां एक बात भूल जाते हैं कि जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, एक न एक दिन वह खुद उस गड्ढे में गिरता जरूर है। भारत को तबाह और कंगाल करने का दिवा स्वप्न देखने वाला पाकिस्तान आज कटोरा लेकर भीख मांगने को मजबूर है। ऐसे में पाकिस्तान की हालात पर मुझे फिल्म 'मासूम' में गुलजार के लिखे गीत का एक मुखड़ा याद आ रहा है-हुज़ूर इस कदर भी न इतरा के चलिये/खुले आम आँचल न लहरा के चलिये।

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