प्रदूषण से हर हालत में बचाएं अस्थमा रोगियों को

आज दिवाली है। वो दिन जब भगवान श्रीराम 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे। इसी खुशी में अयोध्यावासियों ने घी के दीप जलाए, इसीलिए इस पर्व को दीवाली या दीपों का त्यौहार कहा जाता है। लेकिन फिर वक्त के साथ साथ इसे मनाने के तरीके बदले। त्यौहार का उल्लास जाहिर करने के लिए रंब-बिरंगी लाइटें और पटाखे चलन में आए।

Created By : ashok on :25-10-2022 14:47:11 डॉक्टर लवलीन मंगला खबर सुनें

स्मिथा सिंह, देश रोजाना
फरीदाबाद। आज दिवाली है। वो दिन जब भगवान श्रीराम 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे। इसी खुशी में अयोध्यावासियों ने घी के दीप जलाए, इसीलिए इस पर्व को दीवाली या दीपों का त्यौहार कहा जाता है। लेकिन फिर वक्त के साथ साथ इसे मनाने के तरीके बदले। त्यौहार का उल्लास जाहिर करने के लिए रंब-बिरंगी लाइटें और पटाखे चलन में आए। आज पटाखों का इतना बड़ा बाजार है कि हजारों को रोजगार है। लेकिन क्या कभी सोचा है कि इन पटाखों का चलना सांसों को कितना बोझिल करता है। खासतौर पर उन्हें जो दमा यानि अस्थमा नाम की समस्या से जूझ रहे हैं। सोचिए, जब एक सामान्य इंसान पटाखों के धूंए के गुबार में बोझिल सांसे महसूस करता है, तो फिर वो जिनकी सांसें पहले से संकुचित हैं। उन्हें पटाखों की धूम कितनी अखरती होगी। उनकी सांसें कितनी अटकती होंगी, खासकर इस दिवाली वाले माहौल में, जब हर किसी को पटाखे जलाना ही दीवाली लगता है।

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दुनियाभर में अस्थमा के 300 मिलियन से ज्यादा मरीज हैं। वक्त के साथ-साथ इस समस्या के शिकार लोगों की संख्या बढ़ रही है। बच्चे हों, किशोर हों, युवा हों या फिर बुजुर्ग, हर उम्र के लोग इस समस्या से घिर रहे हैं। बड़ी वजह है खानपान का बेपरवाह तरीका और प्रदूषण के चलते बदलता-बोझिल होता पर्यावरण।देश रोजाना की टीम ने इस विषय पर बात की फरीदाबाद के मैट्रो अस्पताल के अस्थमा स्पेशलिस्ट डॉक्टर लवलीन मंगला से।


डॉक्टर लवलीन मंगला कहते हैं, अगर सांस लेते हुए सीटी जैसी आवाज आए, बार बार निमोनिया हो, खांसी अक्सर रहे, सांस लेने में समस्या हो तो, इसे नजरंदाज न करें। ये समस्या किन कारणों से वो जानने के लिए जांच करानी चाहिए। अगर जांच में ये सामने आए तो इलाज शुरू कराएं, क्योंकि इसका एक धीरे धीरे बढ़ना गंभीर हो सकता है। अस्थमा के कई प्रकार होते हैं, जैसे अर्ली आॅनसेट अस्थमा, अडल्ट आॅनसेट अस्थमा, ईज्नोफिलिक अस्थमा, न्यूट्रोफिलिक अस्थमा। लेकिन सबसे ज्यादा खतरनाक साबित होता है वो अस्थमा जिसका इलाज समय पर और ठीक से न कराया जाए।

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डॉक्टर लवलीन मंगला कहते हैं कि पर्यावण में आ रहे बदलाव, प्रदूषित हवाएं बेशक इस समस्या में इजाफा कर रही हैं, लेकिन परिवार में यदि किसी को ये समस्या चली आ रही है, तो आने वाली पीढ़ी में इस समस्या के प्रभाव की संभावना ज्यादा रहती है। ऐसे में इस तरह के लोगों को भी खास अहतियात बरतनी चाहिए। अस्थमा के मरीजों का चाहिए कि सही समय पर इलाज शुरू कराएं, दवाइयां गंभीरता से, नियमित लेने के साथ साथ योग-प्राणायाम भी जरूर करें। फल-सब्जियां जरूर खाएं, धूम्रपान के आदि है तो छोड़ दें। अस्थमा के कुछ वैक्सीनेशन भी होते हैं, अहतियातन उन्हें पहले लगवाएं और सबसे खास बात, बाहर जाते हुए मास्क जरूर पहनें।


डॉक्टर मंगला कहते हैं कि अस्थमा की समस्या दवाएं रेगुलर रखने से नियंत्रित रहती है। हालांकि ये जड़ से खत्म हो, ये संभव नहीं लेकिन अगर आप समय पर इलाज शुरू करा देते हैं तो अस्थमा गंभीर रूप नहीं लेता और अस्थमा का मरीज दवाओं के सेवन के साथ अच्छा जीवन जी पाता है। इस समस्या को जहां है वहीं रोकने के लिए जरूरी है कि लक्षणों को अनदेखा बिल्कुल न करें और किसी अच्छे चिकित्सक से संपर्क कर जांच और इलाज शुरू कराएं।

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