एनर्जी के लिए सूर्य ही होगा अंतिम विकल्प

आज दुनिया में सबसे ज्यादा जिस मुद्दे पर चर्चा होती है वह है एनर्जी यानी ऊर्जा। चाहे शरीर हो या देश, सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करने के लिए हर हालत में एनर्जी चाहिए।

Created By : ashok on :28-11-2022 16:28:23 संजय मग्गू खबर सुनें

त्वरित टिप्पणी

संजय मग्गू
आज दुनिया में सबसे ज्यादा जिस मुद्दे पर चर्चा होती है वह है एनर्जी यानी ऊर्जा। चाहे शरीर हो या देश, सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करने के लिए हर हालत में एनर्जी चाहिए। जिस तरह ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज ने हमारे सामने चुनौतियां खड़ी की हैं, उसका मुकाबला ग्रीन एनर्जी और रिन्यूएबल एनर्जी से ही किया जा सकता है। रिन्यूएबल एनर्जी वह अक्षय स्रोत है जो कभी समाप्त नहीं होता है। जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा आदि। दुनिया भर के लोग इस संकट को लेकर चिंतित जरूर हैं, लेकिन सुरक्षात्मक कदम उठाने को कोई तैयार नहीं है। पूरी दुनिया में सौर और पवन ऊर्जा से उत्पादित होने वाली बिजली कुल बिजली उत्पादन का दसवां हिस्सा ही है। इसमें भी सबसे ज्यादा बिजली उत्पादन हाईड्रो पावर से होता है यानी पानी से बिजली पैदा की जाती है। इस संबंध में थोड़ा बहुत कदम भारत ने उठाया है।

ये भी पढ़ें

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और भारत जोड़ो यात्रा से परेशानी

भारत ने बिजली उत्पादन के लिए कई बड़े-बड़े बांध बनाए हैं। लेकिन यह भी कुल खपत के मुकाबले बहुत ही मामूली माना जा सकता है। हालांकि, यह भी सही है कि भारत में दिनोंदिन सौर ऊर्जा के प्रति रुझान बढ़ रहा है। शहरों और गांवों में सोलर पैनल आपको इक्का दुक्का दिखाई दे जाएंगे। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में छोटी-छोटी पहाड़ियों पर भी टरबाइन लगाकर हवा से बिजली पैदा करने के प्रयोग किए जा रहे हैं। इनसे पैदा होने वाली बिजली का उपयोग खेतों की सिंचाई के लिए ट्यूबवेल आदि चलाने के साथ-साथ घरों को भी रोशन करने में किया जा रहा है। लेकिन इतने भर से तो काम चलने वाला है नहीं। इसके लिए बड़े पैमाने पर प्रयास करना होगा। वैसे अगर सोलर एनर्जी की बात की जाए, तो इसकी व्यवस्था अगर एक बार कर ली जाए, तो काफी दिनों तक इसका लाभ उठाया जा सकता है।

लेकिन सवाल यह है कि पूंजी निवेश करे भी तो कौन? सरकार या फिर उपभोक्ता? भारत में भी वही तरीका अपनाया जाए जो तरीका आइसलैंड की सरकार ने अपनाया है, तो शायद बात बन सकती है। आइसलैंड की कुल आबादी तीन लाख से कुछ अधिक है। यह देश दो टेक्टोनिक प्लेटों पर बसा है। इसका दसवां हिस्सा बर्फ से ढका है, लेकिन यहां ज्वालामुखी और सैकड़ों गर्म पानी की झीलें हैं। इन गर्म पानी की झीलों और ज्वालामुखी की गर्मी का उपयोग घरों को गर्म रखने में किया जाता है। दस में से नौ घरों में जियोथर्मल का उपयोग ऊर्जा के लिए किया जाता है। फिनलैंड में सोलर इकोनॉमी के प्रोफेसर क्रिस्तियान ब्रायर का कहना है कि भारत जैसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश में अक्षय ऊर्जा काफी कारगर हो सकती है। सिर्फ बरसात के दिनों में थोड़ी परेशानी हो सकती है। बरसात के दिनों में भी आधे भारत में सूरज की रोशनी मिलती ही रहती है। ऐसे में इस हिस्से से ग्रिड बनाकर बिजली को अंधेरे वाले हिस्से में भेजा जा सकता है। बस, भारत को इस दिशा में पहल करने की जरूरत है। अगले बीस साल में पूरी दुनिया रिन्यूएबल एनर्जी हासिल करने की दिशा में कदम उठाने को विवश होगी। तो भी अभी से शुरुआत करने में क्या बुराई है।

Share On