भारत की छवि खराब करेगी विदेशों को नकली दवा की आपूर्ति

अफ्रीकी राष्ट्र गाम्बिया में भारतीय कफ सीरप से हुई 66 बच्चों की मौत की घटना अभी शांत भी नहीं हुई थी कि दिल्ली एनसीआर के ट्रॉनिका सिटी में कैंसर की नकली दवा बनाने वाली फैक्टरी पकड़ी गई।

Created By : ashok on :18-11-2022 13:23:05 अशोक मधुप खबर सुनें

अशोक मधुप
अफ्रीकी राष्ट्र गाम्बिया में भारतीय कफ सीरप से हुई 66 बच्चों की मौत की घटना अभी शांत भी नहीं हुई थी कि दिल्ली एनसीआर के ट्रॉनिका सिटी में कैंसर की नकली दवा बनाने वाली फैक्टरी पकड़ी गई। इस फैक्ट्री की बनी नकली दवाएं चीन को भेजी जाती हैं। औषधि विभाग की टीम ने हाल ही में संभल में संयुक्त छापामारी कर बड़ी मात्रा में नकली दवाएं बरामद की थी। इससे करीब डेढ़ महीने पहले बागपत में भी नकली दवाएं पकड़ी गई थीं। भारत दवाइयों का बहुत बड़ा निर्यातक देश है। विदेशों को नकली दवाई भेजे जाने से भारत की दवाइयों की शुद्धता पर बड़ी आंच आ सकती है। इससे देश की साख गिरने के साथ ही विदेशी आय घट सकती है। जरूरत है कि विदेशों को भेजी जाने वाली दवाइयां देश की लैब की प्रामाणिकता के प्रमाणपत्र के साथ ही भेजी जाएं। नकली दवा का कारोबार करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई हो।

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पहले नकली दवा की सजा पांच साल थी। 2005 में इसे बढ़ाकर दस साल किया गया। किंतु ये भी पर्याप्त नहीं है। ऐसा करने वालों को आजीवन कारावास भी कम सजा नहीं होनी चाहिए। साथ ही इनकी संपत्ति भी जब्त होनी चाहिए। डब्ल्यूएचओ के प्रमुख डा. टेड्रोस ने पिछले ही महीने कहा था कि गाम्बिया में 66 बच्चों की मौत भारत में मेडेन फार्मास्यूटिकल द्वारा बनाई कफ सीरप के पीने के कारण मौत हुई है। डब्ल्यूएचओ ने पिछले महीने अलर्ट जारी कर सोनीपत की मेडेन फार्मास्यूटिकल के चार कफ सीरप को बेहद खराब मेडिकल प्रोडक्ट बताया था। उस समय डब्ल्यूएचओ के प्रमुख डा. टेड्रोस की इस घोषणा का यह कहकर विरोध किया था कि यह भारत को बदनाम करने का षडयंत्र है। किंतु दिल्ली-एनसीआर में कैंसर की नकली दवा बनाने वाली एक ऐसी फैक्ट्री पकड़ी गई, जो कैंसर की दवा चीन को भेजती थी। चीन को भेजने वाली नकली दवा की फैक्ट्री का पकड़ा जाना ये बताता है कि हमारे यहां ही बड़ा घपला है।


दिल्ली की क्राइम ब्रांच की टीम ने हाल में एमबीबीएस डॉ. पवित्र नारायण, बीटेक इंजीनियर शुभम मुन्ना के अलावा दो अन्य लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस और औषधि विभाग की टीम ने गिरफ्तार लोगों को साथ लेकर ट्रॉनिका सिटी के इन प्लॉट पर बने कमरों को खुलवाया तो वहां बड़ी मात्रा में अधबनी दवा की गोलियां, कैप्सूल, ब्लिस्टर पैक स्ट्रिंप, प्लास्टिक बोतलें, पैकिंग का सामान, कार्टन, और कई अन्य तरह की दवाइयां मिलीं। इनमें महंगे दामों पर बिकने वाली कैंसररोधी दवाइयां मिलीं। इन दवाओं पर विदेशी कंपनी का नाम पाया गया। ड्रग विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इन चारों लोगों के पास न तो दवाओं को बनाने का और न ही भंडारण का लाइसेंस है। इसके पास दवाओं के खरीद-फरोख्त के दस्तावेज भी नहीं मिले। औषधि विभाग के अधिकारियों ने यहां मिली दवाओं में से 14 नमूने लेकर सील किए हैं। यहां भारी मात्रा में मिली दवाओं और अन्य सामान को जब्त कर लिया गया है।

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औषधि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस कारोबार को करने वाले पवित्र प्रधान एमबीबीएस हैं और शुभम मुन्ना बी-टेक इंजीनियर हैं। बाकी दो पंकज सिंह और अंकित शर्मा भी इस नकली दवाओं के कारोबार में शामिल हैं। उनका कहना है कि एंटी कैंसर दवाओं की बाजार में भारी डिमांड रहती है और इसमें मोटा मुनाफा होता है। इसी मुनाफे के लिए यह नकली दवाओं के कारोबार को कर रहे थे। बरामद दवा की कीमत 14 करोड़ रुपये बताई गई है। यह भी पता चला है कि चार साल में इन्होंने 145 करोड़ की नकली दवाएं बेची हैं।


शासन द्वारा गठित औषधि विभाग के अफसरों की टीम ने ही सहायक आयुक्त औषधि के निर्देशन में इसी चार नंवबर को उत्तर प्रदेश के संभल में छापेमारी कर नकली अंग्रेजी दवा बनाने की फैक्ट्री पकड़ी है। छापे में करीब 60 लाख रुपये की तैयार नकली दवाएं बरामद की गई हैं। इनमें नामी कंपनियों की नकली एंटीबायोटिक दवाएं, इंजेक्शन के अलावा नशीली दवाएं भी शामिल हैं। आयुर्वेदिक दवा बनाने का लाइसेंस लेकर नकली अंग्रेजी दवा बनाने के आरोपी कारोबारी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। दवा बनाने के काम में आने वाली सामग्री और मशीनें भी मिलीं। टीम मुरादाबाद मार्ग पर स्थित राम विहार कालोनी में फैक्ट्री के गोदाम पर पहुंची तो बड़ी मात्रा में तैयार नकली दवाएं बरामद हुईं। मध्य प्रदेश की रीवा पुलिस ने इसी माह के प्रारंभ में कार्रवाई करते 129 पेटी नकली कफ सिरप बरामद किया है। जब्त सिरप की कीमत 18 लाख के करीब बताई जा रही है। पुलिस ने तीन आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है। आरोपी घर से नकली कफ सिरप के कारोबार को संचालित कर रहे थे।

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ये घटनाएं बताती हैं कि देश नकली दवा का बड़ा उत्पादक बन गया है। कोरोना काल में तो इस कारोबार में और बढ़ोतरी हुई। आॅनलाइन शॉपिंग बढ़ने से इस धंधे को बढ़ोतरी मिली है। एक रिपोर्ट के मुताबिक आॅनलाइन खरीदी जाने वाली दवाओं में 30 प्रतिशत नकली हैं। दरअसल ये फर्जी कंपनियां इतनी सफाई से अपने प्रॉडक्ट्स की आॅनलाइन मार्केटिंग करती हैं कि कोई भी आसानी से धोखा खा सकता है। साल 2020 की तुलना में 2021 में घटिया क्वालिटी वाले और नकली मेडिकल उत्पादों के मामले 47 फीसदी बढ़ गए। नकली प्रॉडक्ट्स के खिलाफ कई वर्षों से काम कर रही संस्था फेक फ्री इंडिया के अनुसार देश में नकली सामानों के उत्पादन का काम पिछले पांच दशकों से चल रहा है। उससे सरकार को हर साल कम से कम एक लाख करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है।
(यह लेखक के निजी विचार हैं।)

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