हेलमेट से आहत होती सिखों की आस्था

रक्षा मंत्रालय के फैसले के मुताबिक युद्ध या आपातकालीन परिस्थितियों में सिख सैनिकों को यह हेलमेट पहनना अनिवार्य होगा। बस, इसी फैसले को लेकर सिख संगठनों और सिख धार्मिक संस्थाओं में नाराजगी है। उनका मानना है

Created By : ashok on :17-01-2023 17:25:47 संजय मग्गू खबर सुनें

हेलमेट से आहत होती सिखों की आस्था
संजय मग्गू
केंद्र सरकार के एक फैसले से सिख संगठनों और सिखों में रोष है। नौ जनवरी को सिख सैनिकों के लिए रक्षा मंत्रालय ने आपात परिस्थितियों के लिए 12370 बैलिस्टिक हेलमेट खरीदने का टेंडर जारी किया है।

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रक्षा मंत्रालय के फैसले के मुताबिक युद्ध या आपातकालीन परिस्थितियों में सिख सैनिकों को यह हेलमेट पहनना अनिवार्य होगा। बस, इसी फैसले को लेकर सिख संगठनों और सिख धार्मिक संस्थाओं में नाराजगी है। उनका मानना है कि सिखों द्वारा सिर पर पहनी जाने वाली पगड़ी सिर्फ एक कपड़ा भर नहीं है। यह सिख धर्म की एक अनिवार्य पहचान और गुरु गोविंद सिंह के उस आदेश से जुड़ा है जिसमें उन्होंने सिख धर्म अनुयाइयों को पांचों ककार का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया था। पांच ककार केश, कड़ा, कंघा, कृपाण और कशहरा या कचेरा (छोटा जांघिया) सिखों की पहचान है।

सिख धर्म के सभी महान गुरुओं ने समय-समय पर जो भी दिशा निर्देश जारी किए हैं, सिख उनका बड़ी श्रद्धा और आदर के साथ पालन करते हैं। इसमें वे किसी भी तरह दखलंदाजी स्वीकार नहीं करते हैं। पहले विश्व युद्ध के समय अक्टूबर 1014 में जब 15 लुधियाना सिख प्लाटून अंग्रेजों की ओर से लड़ने के लिए जर्मनी गई थी, तो ब्रिटिश अफसरों ने सिख सैनिकों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य कर दिया था।

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सिख सैनिकों ने हेलमेट पहनने से पूरी तरह इनकार कर दिया। हालांकि ब्रिटिश अफसरों ने बहुत कोशिश की, दबाव डाला, लेकिन सिख रणबांकुरों ने एक बार इनकार कर दिया तो वे किसी भी कीमत पर नहीं माने। उस दौरान अंग्रेजों ने कुछ सिख संगठनों को इसके लिए राजी भी कर लिया था, लेकिन उनका यह प्रयास भी विफल रहा। अब सरकार ने जो फैसला लिया है, उसको सिख संगठनों ने उनकी धार्मिक पहचान मिटाने की साजिश करार दिया है। उन्होंने सरकार से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने और इसे रद्द करने की मांग की है। इस बात से किसी को कतई इनकार नहीं है कि भारत में ही नहीं, दुनिया भर के लगभग सभी प्रमुख देशों में सिख सैनिक हैं

और उन्हें एक विशेष सम्मान प्राप्त है। अमेरिका की एक कोर्ट ने तो पिछले साल दिसंबर में फैसला देते हुए कहा कि पगड़ी और दाढ़ी रखने की वजह से किसी भी सिख अमेरिकी नागरिक को मैरीन कार्प्स में भर्ती होने से नहीं रोका जा सकता है। अमेरिका, कनाडा, आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन आदि देशों में सिखों को पगड़ी पहनने और दाढ़ी रखने के साथ हेलमेट पहनने की छूट है। वैसे रक्षा मंत्रालय की यह चिंता भी जायज है कि युद्ध के समय यदि सिख सैनिकों को सिर्फ पगड़ी में ही युद्ध क्षेत्र में भेजा जाता है,

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तो उनका जीवन खतरे में पड़ सकता है और पड़ता भी है। बैलिस्टिक हेलमेट पहनने से चार सौ मीटर के दायरे से दागी गई गोलियां उस पर असर नहीं करेगी, इससे उनका जीवन बचा रहेगा। अपने हर सैनिक की सुरक्षा के बारे में सोचना रक्षा विभाग और केंद्र सरकार का दायित्व है। सीमा पर युद्ध या अचानक होने वाली गोलीबारी में सिर्फ एक जवान ही शहीद नहीं होता है, एक परिवार का जिम्मेदार सदस्य और सेना का एक जांबाज सिपाही शहीद होता है। ऐसे में सिख संगठनों और रक्षा मंत्रालय को ऐसी कोई तरकीब निकालनी चाहिए जिससे सिख सैनिकों की सुरक्षा भी हो जाए और उनकी धार्मिक भावनाएं भी आहत न हों।

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