अहम त्यागते ही मन हो जाता है निर्मल

जब तक व्यक्ति पूर्वाग्रहों से मुक्त नहीं होता है, वह कुछ नया न तो कर पाता है और न ही सीख पाता है। यदि हमें कुछ नया सीखना या करना है, तो अपने दिलोदिमाग को किसी कुंठा या पूर्वाग्रह से मुक्त करना होगा।

Created By : ashok on :03-12-2022 15:54:57 अशोक मिश्र खबर सुनें

बोधिवृक्ष

-अशोक मिश्र
जब तक व्यक्ति पूर्वाग्रहों से मुक्त नहीं होता है, वह कुछ नया न तो कर पाता है और न ही सीख पाता है। यदि हमें कुछ नया सीखना या करना है, तो अपने दिलोदिमाग को किसी कुंठा या पूर्वाग्रह से मुक्त करना होगा। महात्मा बुद्ध ने एक पूर्वाग्रह से ग्रसित व्यक्ति शिक्षा दी थी। एक दिन एक व्यक्ति गौतम बुद्ध से मिलने पहुंचा। उसने दोनों हाथ में फूल रख रखा था। उसे देखते ही गौतम बुद्ध ने कहा कि गिरा दो। उसने जब यह सुना, तो उसने सोचा कि चूंकि बायें हाथ को अपवित्र माना जाता है, तो महात्मा बुद्ध ने उससे बायें हाथ के फूल को गिराने को कहा है।

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उसने बायें हाथ के फूल गिरा दिया और आगे बढ़ा। कुछ दूर आगे जाने पर महात्मा बुद्ध ने फिर कहा कि गिरा दो। उसने सोचा कि एक तो मैं इनके लिए फूल लाया हूं और यह कह रहे हैं कि गिरा दो। उसने फूल गिरा दिए। जब वह व्यक्ति उनके पास पहुंचा, तो महात्मा बुद्ध ने कहा कि मैंने जब तुमसे कहा कि गिरा दो, लेकिन यह कहां कहा था कि फूल गिरा दो। तुम्हारे मन में पहले से ही बायें हाथ को अशुभ मानने का पूर्वाग्रह था, इसीलिए तुमने पहले बायें हाथ का फूल गिराया। तुम अपने दिमाग का पूर्वाग्रह नहीं त्यागा। अपनी कुंठाओं को नहीं त्यागा। अपने मानसिक बोझ को नहीं त्यागा।

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महात्मा बुद्ध की बात सुनकर वह व्यक्ति जान गया कि यदि कुछ नया करना है, तो पुराने को त्यागना होगा। जब तक व्यक्ति के मन में अहम बैठा हुआ है, तब तक कुछ नया सीखने और पुराना त्यागने में कठिनाई होती है। यही कारण है कि व्यक्ति को सबसे पहले पूर्वाग्रह और अपने अहम को त्यागना चाहिए। अहम त्यागते ही व्यक्ति का मन निर्मल हो जाता है।

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