मनोविकार को हलके में लेने की भूल पड़ सकती है भारी

शिक्षक के हाथों में देश का भविष्य होता है, लेकिन आज उसी भविष्य की सांसें विराम पा रही हैं शिक्षकों की प्रताड़ना के कारण। हर दिन अखबारों और न्यूज चैनल्स पर हम रोज कोई न कोई ऐसी खबर पढ़-सुन रहे हैं जिनमें विद्यार्थी के साथ अध्यापक द्वारा की गई क्रूरता होती है। शिक्षक के पीटने से छात्र-छात्रा की मौत या गंभीर रूस से  चोटिल होने की खबरें होती हैं।

Created By : ashok on :03-10-2022 14:22:36 आंचल ठाकुर खबर सुनें

-आंचल ठाकुर
शिक्षक के हाथों में देश का भविष्य होता है, लेकिन आज उसी भविष्य की सांसें विराम पा रही हैं शिक्षकों की प्रताड़ना के कारण। हर दिन अखबारों और न्यूज चैनल्स पर हम रोज कोई न कोई ऐसी खबर पढ़-सुन रहे हैं जिनमें विद्यार्थी के साथ अध्यापक द्वारा की गई क्रूरता होती है। शिक्षक के पीटने से छात्र-छात्रा की मौत या गंभीर रूस से चोटिल होने की खबरें होती हैं। वास्तव में ऐसी घटनाओं का मुख्य कारण क्या है? इस संबंध में फरीदाबाद (हरियाणा) स्थित केसरी क्लीनिक की डॉक्टर गीतांजलि केसरी मानती हैं कि कई बार शिक्षक की मानसिक अवस्था ऐसी नहीं होती है कि वह अध्यापन कार्य कर सके। कई बार निजी समस्याएं, चिंताएं, तनाव, पति-पत्नी में अलगाव, किसी चीज का डर, अपेक्षा पर खरा न उतर पाने की वजह से शिक्षक चिढ़चिढ़ा हो जाता है। ये कुछ ऐसे कारण हैं जो शिक्षक में खीझ की वजह बनते हैं और क्रोध में शिक्षक वह कर बैठता जो उसे नहीं करना चाहिए।
डॉक्टर गीतांजलि के अनुसार, गुस्सा एक सामान्य भावना है लेकिन इसका एक हद से बढ़ जाना या गुस्सैल रवैये के चलते किसी से भी कोई गुनाह करा सकता है। गुस्से में शुरू किया गया कोई भी काम कहाँ रोकना है, यह समझ में नहीं आता है। गुस्से के चलते ही अनजाने में एक अपराध हो जाता है। डॉ. गीतांजलि बताती हैं कि हमें यह समझना होगा कि मानसिक विकार कैसे उत्पन्न होते हैं। उसके क्या-क्या लक्षण होते हैं और उससे कैसे बचा जाए। चिकित्सा क्षेत्र का एक अहम हिस्सा है मनोरोग, जिसमें मानसिक समस्याओं से जुड़ी अवस्थााओं की पहचान, इलाज और बचाव किया जाता है। जब एक व्यक्ति ठीक से सोच नहीं पाता, उसका अपनी भावनाओं और व्यवहार पर काबू नहीं रहता, तो ऐसी हालत को मानसिक रोग कहते हैं। मानसिक रोगी आसानी से दूसरों को समझ नहीं पाता और उसे रोजमर्रा के काम ठीक से करने में मुश्किल होती है।
यह जरूरी नहीं है कि हर मानसिक रोगी यह समझ सके कि वो किस समस्या का शिकार है। लेकिन साथ रहने वाले, परिजन, दोस्त, सहकर्मी स्वभाव में आने वाले बदलाव को समझ जाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि किसी मनोरोग चिकित्सक से संपर्क करके समय पर इलाज शुरू किया जाए। आब्सेसिव कंपल्सिव डिसआर्डर (ओसीडी) में व्यक्ति को अनुचित विचार आने लगते हैं। मन में डर की आशंका पैदा होने लगती है। इसके साथ ही वह एक ही काम को बार बार करने या जांचने पर विवश होता है। हालांकि, यह कोई नई बीमारी नहीं है, लेकिन इसका समय रहते इलाज जरूरी है। आॅब्सेशन एक प्रकार से जुनून होता है। इसमें व्यक्ति एक ही काम को कई बार करता है। कई लोग सालों से ऐसा कर रहे होते हैं, लेकिन उन्हें पता ही नहीं होता कि वह इस प्रकार की मानसिक बीमारी से पीड़ित हैं।
डॉ. गीतांजलि केसरी बताती हैं कि इस समय जो मरीज उनके पास आ रहे हैं, उनमें से अधिकतर को एक काम को बार-बार करने की आदत हो गई है। मसलन कई लोग सैनिटाइजर से दिन में 30 से 40 बार हाथ साफ करते हैं। कई मरीज बाहर जाते समय कई बार घर के ताले को हाथ लगाकर जांचते हैं कि वह लगा है या नहीं। यह एक तरीके की मानसिक समस्या है। दिमागी बीमारियों के प्रति हमारे देश के लोगों में जागरूकता की काफी कमी है। अगर एक ही बात को बार-बार सोचने की आदत है तो यह ओवरथिंकिंग की बीमारी है जिसका असर मानसिक और शारीरिक हेल्थ पर बहुत अधिक होता है। उसे ही सोचकर हम खुद को परेशान करते रहते हैं। अक्सर इस केस में किसी छोटी सी बात को हम मन ही मन काफी ज्यादा बढ़ा लेते हैं। आस पास अगर कुछ होता है तो उससे भी आपको ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है। बार-बार सोचना और चिंता करना एक बीमारी हो सकती है। इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसा करने से मानसिक सेहत काफी प्रभावित हो सकती है और साथ में शारीरिक समस्यायों से जुड़े लक्षण भी देखने को मिल सकते हैं। अगर यह ख्याल आना अभी शुरू हो रहे हैं, तो इनको नजरअंदाज बिलकुल न करें। नहीं तो यह दिमाग पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं। इससे पहले यह आपकी जिंदगी में दखलंदाजी करना शुरू करे, जल्द से जल्द इसका समाधान खोजना जरूरी होता है। इस समस्या से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि व्यक्ति अपने आप को व्यस्त रखे। हमेशा सकारात्मक सोचे। इसके अलावा पर्याप्त नींद, सही भोजन, व्यायाम और ध्यान से ही इस समस्या से बचाव किया जा सकता है।
(ये लेखिका के निजी विचार हैं)

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