नौसेना का हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद सम्मेलन बुधवार से

तीन दिन तक चलने वाला यह सम्मेलन सामरिक स्तर पर नौसेना की सक्रियता प्रकट करने का प्रमुख माध्यम है। इस सम्मेलन का आयोजन पहली बार वर्ष 2018 में किया गया था और इसके बाद से यह हर वर्ष आयोजित किया जाता है

Created By : Anand on :03-02-2022 17:17:21 प्रतीकात्मक तस्वीर खबर सुनें

एजेंसी, नई दिल्ली

नौसेना का प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वार्षिक सम्मेलन ङ्क्षहद प्रशांत क्षेत्रीय संवाद (आईपीआरडी ) बुधवार से शुरू होगा। तीन दिन तक चलने वाला यह सम्मेलन सामरिक स्तर पर नौसेना की सक्रियता प्रकट करने का प्रमुख माध्यम है। इस सम्मेलन का आयोजन पहली बार वर्ष 2018 में किया गया था और इसके बाद से यह हर वर्ष आयोजित किया जाता है।

सम्मेलन का आयोजन नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन द्वारा किया जाता है जो नौसेना का ज्ञानाधारित साझीदार है। सम्मेलन का उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उभरने वाली चुनौतियों और अवसरों की समीक्षा करना है। रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री भी इस सम्मेलन को संबोधित करेंगे।

आईपीआरडी-2018 में चार उप-विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया था, जिनमें समुद्री व्यापार, क्षेत्रीय संपर्क, पूरे क्षेत्र की चुनौतियां, जिनमें लगातार समुद्री निगरानी, समुद्री गतिविधियों के डिजीटलीकरण को बढ़ाना, समुद्री क्षेत्र के भीतर साइबर खतरे और समुद्री सुरक्षा के संपूर्ण विकास में उद्योगों की भूमिका शामिल थी। आईपीआरडी-2019 का आयोजन पहले सम्मेलन की शानदार बुनियाद पर हुआ था। इस दौरान पांच विषयवस्तुओं पर चर्चा की गई थी जिनमें समुद्री संपर्क के जरिये क्षेत्र में आपसी जुड़ाव के लिये व्यावहारिक समाधान, हिंद-प्रशांत को मुक्त रखने के उपाय, समुद्री अर्थव्यवस्था के मद्देनजर क्षेत्रीय संभावनाओं की पड़ताल, समुद्री-उद्योग 4.0 से उत्पन्न अवसर और सागर तथा सागरमाला से उत्पन्न क्षेत्रीय संभावना शामिल थे।

आईपीआरडी-2021 का आयोजन ऑनलाइन किया जा रहा है। यह तीन दिन का कार्यक्रम है, जो 27 से 29 अक्टूबर तक होगा। इस साल के आईपीआरडी का फोकस आठ विशेष उप-विषयों पर है, जो एक विस्तृत विषयवस्तु ‘21वीं शताब्दी के दौरान सामुद्रिक रणनीति का क्रमिक विकास: अनिवार्यतायें, चुनौतियां और आगे की राह) के तहत रखे गये हैं। इन उप-विषयों पर आठ सत्रों में पैनल चर्चा होगी, जो तीन दिन चलेगी। इस तरह विभिन्न परिप्रेक्ष्यों में चर्चा करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा। ये आठ उप-विषय हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में सामुद्रिक रणनीति का विकास: समरूपतायें, भिन्नतायें, अपेक्षायें और आशंकायें, सामुद्रिक सुरक्षा पर जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव के समाधान के लिये अनुकूल रणनीतियां, बंदरगाह सम्बंधी क्षेत्रीय सामुद्रिक संपर्कता और विकास रणनीति, सहयोगात्मक सामुद्रिक कार्यक्षेत्र जागरूकता रणनीति, नियम-आधारित हिन्द-प्रशांत सामुद्रिक प्रणाली को मद्देनजर रखते हुये शत्रु भावना के तहत कानूनी प्रक्रियाओं और सिद्धांतों की अवहेलना के बढ़ते चलन का दुष्प्रभाव, क्षेत्रीय सार्वजनिक-निजी सामुद्रिक साझेदारी को प्रोत्साहन देने वाली रणनीति, ऊर्जा-असुरक्षा और उसे कम करने वाली रणनीति, मानव जनित समुद्री समस्याओं का समाधान करने वाली रणनीति है। इस वार्षिक संवाद के जरिये भारतीय नौसेना और नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन लगातार एक ऐसा मंच प्रदान कर रहे हैं, जहां हिन्द-प्रशांत के सामुद्रिक क्षेत्र को प्रभावित करने वाली भू-राजनीतिक गतिविधियों पर गहन चर्चा की जाती हैं।

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