कांग्रेस नेता राहुल गांधी और भारत जोड़ो यात्रा से परेशानी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा कन्याकुमारी से शुरू हुई और इसकी पीड़ा भारतीय जनता पार्टी में लगातार जारी है। शुरू में ही एक्ट्रेस से नेत्री बनीं स्मृति ईरानी ने बिना कुछ सोचे समझे आरोप लगाया कि राहुल गांधी कन्याकुमारी में स्वामी विवेकानंद को मस्तक नवाना भूल गये।

Created By : ashok on :28-11-2022 15:45:38 कमलेश भारतीय खबर सुनें

कमलेश भारतीय
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा कन्याकुमारी से शुरू हुई और इसकी पीड़ा भारतीय जनता पार्टी में लगातार जारी है। शुरू में ही एक्ट्रेस से नेत्री बनीं स्मृति ईरानी ने बिना कुछ सोचे समझे आरोप लगाया कि राहुल गांधी कन्याकुमारी में स्वामी विवेकानंद को मस्तक नवाना भूल गये। उन्हें शर्म आनी चाहिए। वे इतने महान संत को प्रणाम करना भूल गए। इस पर कांग्रेस ने वीडियो जारी किया जिसमें राहुल गांधी विवेकानंद की प्रतिमा की परिक्रमा करते दिखाई दिये। इसको लेकर वे अपनी बात पर शर्मिंदा हुई या नहीं, यह तो पता नहीं, लेकिन इसके बाद स्मृति ईरानी की पीड़ा कुछ शांत हुई। इसके बावजूद भाजपा के आईटी प्रकोष्ठ ने यह जारी किया कि सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी की तरह दाढ़ी बढ़ा लेने से कोई मोदी नहीं बन जाता, लेकिन राहुल गांधी को मिल रहे समर्थन से यह दुष्प्रचार भी शांत हो गया। दूसरे मुद्दे तलाशे जाने लगे। फिर राहुल के साथ जब पंजाबी अभिनेत्री ने हाथ पकड़कर यात्रा की, तो भाजपा आईटी सेल को लगा कि अबकी बात बन जाएगी। उसको भी कहीं का कहीं जोड़ने की कोशिश की, लेकिन यह कोशिश भी बेकार गई। कभी राहुल की महंगी टी शर्ट का शॉट दिखाकर मजाक उड़ाया गया। जनता ने इसे भी बहुत सहजता से लिया।
अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात चुनाव में सुंदरनगर की एक जनसभा में भारत जोड़ो यात्रा की खिल्ली उड़ाते हुए कहा कि यह यात्रा सत्ता से बेदखल लोगों की सत्ता में वापसी के लिए यात्रा के सिवाय कुछ नहीं है। इससे कुछ भी फायदा होने वाला नहीं है। उन्होंने जनता को ऐसी पार्टी और लोगों को औकात दिखा देने का आह्वान भी किया।

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उन्होंने मेधा पाटकर का नाम लिए बिना कहा कि इस यात्रा में वह लोग भी चल रहे हैं जिन्होंने कानूनी याचिकाओं के माध्यम से नर्मदा बांध परियोजना को रोकने का काम किया। चालीस वर्ष तक गुजरात को प्यासा रखा। जनता उन्हें भी सबक सिखायेगी। उल्लेखनीय है कि मेधा पाटकर हाल ही में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हुई थीं। मोदी ने फिर तंज कसा कि राहुल को मूंगफली और बिनौले की फसलों का ज्ञान तक नहीं। गुजरात में बने नमक को खाकर भी गुजरात को गाली देते हैं। मेधा पाटकर ने सचमुच नर्मदा बांध परियोजना को लेकर एक लंबी लड़ाई लड़ी थी जिसकी वजह से ही परियोजना क्षेत्र में जिन लोगों की जमीन आई थी, उन्हें भरपूर मुआवजा मिलाा। उन्होंने बांध के चलते विस्थापित होने वाले लोगों के लिए संघर्ष किया था, यह भी गुजरात वालों को पता है। सुप्रीमकोर्ट ने भी उनके संघर्ष को जायज माना था।

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प्रधानमंत्री मोदी की इन बातों से लगता है कि विपक्ष को कोई लोकतांत्रिक अधिकार नहीं कि वह कोई कार्यक्रम चलाये। यदि ऐसा ही होता तो क्या भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी रथयात्रा निकाल पाते? क्या यह भी सत्ता पाने के लिए कई गई यात्रा नहीं थी? क्या उसी रथयात्रा के आधार पर भाजपा की बढ़ी लोकप्रियता के बल पर आज प्रधानमंत्री मोदी अपने राजनीतिक गुरु की मेहनत का फल नहीं खा रहे हैं? अब उन्हीं लालकृष्ण आडवाणी को मार्गदर्शक मंडल में एक तरीके से राजनीतिक संन्यास नहीं दे दिया गया? उन्हें आखिरकार राहुल की इस यात्रा से परेशानी क्यों है? पीड़ा कैसी? यह तो विपक्ष का अधिकार है और इसकी आलोचना क्यों? खुद प्रधानमंत्री सारे गुजरात में सत्ता के लिए रैलियां कर यात्रा ही तो कर रहे हैं। क्या ये सत्ता के लिए नहीं हैं या कोई तीर्थ यात्रा पर निकले हैं? आप करें तो सब सही और दूसरा करे तो सब गलत है?


राहुल गांधी के ज्ञान की कितनी विवेचना, कितने चुनावों तक भुनाते रहेंगे आप? शुक्र है कि राहुल इतना ज्ञानवान नहीं हुआ कि कैसे सरकारें गिराई जाती हैं और कैसे थोक में दलबदल करवाया जाता है नहीं तो बड़ी मुश्किल होगी। नमक के लिए सत्याग्रह महात्मा गांधी ने किया था और यात्रा भी, तो क्या वह भी गलत थी? हर चुनावी बहस को नया मोड़ देते हो। जैसे उत्तरप्रदेश की चुनाव में श्मशान और कब्रिस्तान की बात चलते चलते गुजरात के गधों तक पहुंच गयी थी। आप देश के प्रधानमंत्री हैं और मर्यादा की आपसे उम्मीद है। इस तरह के आरोप कोई और नेता लगाये तो कोई बात नहीं, लेकिन आप अपने पद के गौरव और मर्यादा में रहकर संयमित प्रचार कीजिए। यह आपका अधिकार है। यात्राओं की चिंता छोड़िए। यात्राओं से कैसी पीड़ा?
(यह लेखक के निजी विचार हैं।)

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