हरियाणा में पराली प्रबंधन का खोजा नायाब तरीका

हरियाणा सरकार ने पराली प्रबंधन में जिस तरह का नया प्रयोग किया है और जिससे पराली को जलाने की घटनाएं प्रदेश में कम हुई हैं,

Created By : Manuj on :25-11-2022 16:32:14 संजय मग्गू खबर सुनें

हरियाणा में पराली प्रबंधन का खोजा नायाब तरीका
संजय मग्गू
दिल्ली और उसके आसपास जब भी वायु प्रदूषण बढ़ता है, तो दिल्ली सरकार हल्ला मचाने लगती है कि पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की वजह से दिल्लीवासियों का दम घुट रहा है। हालांकि दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण में पराली का सिर्फ आठ से दस प्रतिशत ही हिस्सा है

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लेकिन इसके बावजूद देश के किसानों को वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। हरियाणा सरकार ने पराली प्रबंधन में जिस तरह का नया प्रयोग किया है और जिससे पराली को जलाने की घटनाएं प्रदेश में कम हुई हैं, वह तारीफ के काबिल है। इसकी प्रशंसा देश के कई राज्यों में हो रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में इस साल किसानों ने 4119 स्थानों पर ही पराली जलाई है। यह पिछले साल की तुलना में 58 प्रतिशत की गिरावट है। पिछले साल पराली जलाने की प्रदेश में 76 हजार से अधिक घटनाएं प्रकाश में आई थीं।

इसका कारण यह था कि मनोहर लाल सरकार ने इस बार कुछ ऐसे ठोस कदम उठाए थे जिसकी वजह से किसानों को फायदा भी हुआ और पराली जलाने की जरूरत भी नहीं पड़ी। मनोहर सरकार ने पराली प्रबंधन के लिए प्रति एकड़ एक हजार रुपये और प्रति कुंटल गांठ बनाने के लिए पचास रुपये प्रदान किए थे।

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इससे किसानों को अतिरिक्त आय हुई। उनका आर्थिक बोझ कम हुआ। इतना ही नहीं, करनाल और पानीपत के इथेनाल प्लांट तक गांठ बनाकर पराली लाने वालों को दो हजार रुपये प्रति एकड़ दिए। यही गांठ किसी गौशाला में ले जाने पर उन्हें डेढ़ हजार रुपये प्राप्त हुए। प्रदेश सरकार ने रेड जोन में पराली न जलाने वाली पंचायतों को दस लाख रुपये का पुरस्कार प्रदान किया जिसकी वजह से पंचायतों ने भी पराली न जलाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया।

यह सब कुछ करने के बाद भी राज्य सरकार को कोई आर्थिक नुकसान इसलिए नहीं हुआ क्योंकि पराली को बहुउपयोग करने वाली कंपनियों तक पहुंचाकर सरकार ने अपना खर्चा निकाल लिया। अगर पराली प्रबंधन का यही तरीका दूसरे राज्य भी अपनाएं, तो उनके यहां भी पराली से होने वाले वायु प्रदूषण पर रोक लगाई जा सकती है। किसानों के लिए सबसे अच्छी बात यह रही कि वे अपनी पराली को पोर्टल पर जाकर सीधे ठेकेदारों और कंपनियों को बेच सकते हैं।

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