जब डाकू का हुआ हृदय परिवर्तन

हमारे देश में हृदय परिवर्तन की तमाम कथाएं मिल जाएंगी। महात्मा बुद्ध के समकालीन डाकू अंगुलिमाल के हृदय परिवर्तन की कथा सबको मालूम है। महात्मा बुद्ध के संपर्क में आने के बाद अंगुलिमाल बौद्ध हो गया और जब वह श्रावस्ती में भिक्षा मांगने गया, तो लोगों ने उस पर पत्थर बरसाए।

Created By : ashok on :18-11-2022 14:23:27 अशोक मिश्र खबर सुनें

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

हमारे देश में हृदय परिवर्तन की तमाम कथाएं मिल जाएंगी। महात्मा बुद्ध के समकालीन डाकू अंगुलिमाल के हृदय परिवर्तन की कथा सबको मालूम है। महात्मा बुद्ध के संपर्क में आने के बाद अंगुलिमाल बौद्ध हो गया और जब वह श्रावस्ती में भिक्षा मांगने गया, तो लोगों ने उस पर पत्थर बरसाए। ठीक इससे ही मिलती-जुलती कथा डाकू अबा की है। वह गुजरात के बडोदरा जिले में सक्रिय था। उसी इलाके के शेखड़ी गांव में संत रवि रहते थे। वह नियम से गांव के बच्चों को शिक्षा देते थे। जड़ी-बूटी से रोगियों का उपचार करते थे। जब समय बचता उसमें वह भगवान का भजन गाते और आराधना करते थे। इस मामले में उनकी ख्याति दूर-दूर तक थी।

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उसी इलाके में अबा डाकू का आतंक था। वह राह चलते लोगों को लूट लेता था। संत रवि की ख्याति डाकू अबा तक पहुंची, तो उसके मन में आया कि वह भी संत के दर्शन करे और उनके भजन सुने। एक दिन वह वेष बदलकर उनका प्रवचन सुनने पहुंचा, तो उसका हृदय आह्लादित हो उठा। उसने तय किया कि अब वह किसी को परेशान नहीं करेगा। एक दिन कुछ संत शेखड़ी गांव की ओर जा रहे थे, तो डाकू अबा के मन में आया कि इन संतों की सेवा की जाए। वह मिठाई और भोजन लेकर संतों के पास पहुंचा।

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उसने सभी संतों को धन देने की भी बात कही। इस पर उन संतों ने अबा से उसका परिचय पूछा। डाकू अबा ने सच बात बता दी। इस पर संतों ने कहा कि मैं तुम्हारे पाप की कमाई से लाया गया भोजन कैसे ग्रहण कर सकता हूं। हमारी बुद्धि भी भ्रष्ट हो जाएगी। इस पर अबा ने अपने तलवार को फेंकते हुए कहा कि अब से मैं लूटमार नहीं करूंगा। मैं मेहनत करके अपना और अपने परिवार का पेट भरूंगा। यह सुनकर संतों ने उसे अपने हृदय से लगा लिया।

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