Ramadan 2026: रमजान को पवित्र महीना क्यों माना जाता है?
जानेंगे इस महीने रोजा क्यों रखा जाता है?
जानेंगे इस महीने रोजा क्यों रखा जाता है?
रमजान इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। दुनियाभर के मुसलमान इस महीने में रोजा रखते हैं तथा अल्लाह की इबादत में ज्यादा से ज्यादा समय बिताते है I यह महीना आत्म-संयम, धैर्य, त्याग और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक है।
रमजान का महीना इस्लामी कैलेंडर के नौवें महीने में आता है। इस्लामी कैलेंडर चंद्रमा पर आधारित होता है, इसलिए हर साल रमजान की तारीख लगभग 10-11 दिन पहले आ जाती है। रमजान की शुरुआत चांद दिखने पर निर्भर करती है I
रमजान इसलिए पवित्र है क्योंकि इसी महीने में पैगंबर हजरत मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर पहली बार कुरान की आयतें नाज़िल हुई थीं। यानी इसी महीने में पहली बार पैगंबर मोहम्मद को कुरान का ज्ञान प्राप्त हुआ था।
1. आत्म-संयम और अनुशासन सीखना 2. भूख और प्यास का अनुभव कर गरीबों के प्रति संवेदना बढ़ाना 3. गुनाहों से तौबा करना 4. अल्लाह से नज़दीकी बढ़ाना
रमज़ान के रोज़े इस्लाम के पांच अनिवार्य स्तंभों में से एक है। रमजान के महीने में मुसलमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजा रखते हैं। रोजा का मतलब है उपवास करना। इस दौरान सहरी और इफ्तार किया जाता है। 1. सहरी: सुबह फज्र की नमाज से पहले भोजन 2. इफ्तार: सूर्यास्त के बाद रोज़ा खोलना (खजूर और पानी से)
रमजान में पांच वक्त की नमाज़ के अलावा रात में विशेष नमाज “तरावीह” अदा की जाती है।
इस महीने में दान-पुण्य का विशेष महत्व है। जरूरतमंदों को ज़कात (अनिवार्य दान) दी जाती है।
रमजान की आखिरी दस रातों में एक खास रात आती है जिसे “लैलतुल कद्र” कहा जाता है। मान्यता है कि इसी रात कुरान की नाज़िल होना शुरू हुआ था।
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