Faridabad News : परमानेंट लोक अदालत ने आरटीई दाखिले की हकदार छात्रा कुलसुम को दाखिला देने के दिये आदेश
स्कूूल पर 50000 का जुर्माना भी लगाया, छात्रा के अभिभावक ने मंच का जताया आभार
स्थानीय अदालत ने आरटीई दाखिले की हकदार एक छात्रा के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। परमानेंट लोक अदालत की बेंच ने डीपीएस 19 मैनेजमेंट को छात्रा कुलसुम को आरटीई कोटे से एक हफ्ते के अंदर दाखिला देने के आदेश दिये हैं।
स्थानीय अदालत ने आरटीई दाखिले की हकदार एक छात्रा के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। परमानेंट लोक अदालत की बेंच ने डीपीएस 19 मैनेजमेंट को छात्रा कुलसुम को आरटीई कोटे से एक हफ्ते के अंदर दाखिला देने के आदेश दिये हैं।
इसके अलावा शिक्षा विभाग के आदेश के बावजूद दाखिला न देने पर स्कूल पर 50000 का जुर्माना भी लगाया है। जिसमें से ₹40000 जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) को व ₹10000 छात्रा को देने के आदेश दिये हैं। हरियाणा अभिभावक एकता मंच के प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा ने कहा है कि दिल्ली पब्लिक स्कूल 19 ने शिक्षा विभाग द्वारा अलॉट की गई सीट पर इस छात्रा को दाखिला नहीं दिया था। पीड़ित छात्रा के अभिभावक ने इसकी शिकायत जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी से की। वहां मदद ना मिलने पर उसने मंच के प्रदेश लीगल एडवाइजर एडवोकेट बीएस विरदी के माध्यम से स्थानीय परमानेंट लोक अदालत में स्कूल के खिलाफ मुकदमा दायर किया जिस पर स्कूल व डीईईओ को नोटिस जारी किया गया। कई बार की सुनवाई के बाद 8 जून को अदालत ने छात्रा के हित में उक्त फैसला सुनाया है। एडवोकेट विरदी ने बताया है कि 9 स्कूलों के खिलाफ भी पीड़ित छात्रों ने मुकदमा दायर किया है उनके बारे में फैसला आना बाकी है। छात्र के अभिभावक गुल्फ़ान ने मंच खासकर एडवोकेट विरदी का आभार प्रकट किया है।
मंच के प्रदेश अध्यक्ष वरिष्ठ एडवोकेट ओपी शर्मा ने कहा है कि RTE के पात्र छात्रों को दाखिला न देना सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। RTE के बारे में जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि स्कूल पात्रता पर संदेह के आधार पर भी दाखिला नहीं रोक सकते। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि राज्य सरकार द्वारा आवंटित छात्रों को निजी स्कूलों को प्रवेश देना ही होगा, और स्कूल अपनी मर्जी से इसे रोक नहीं सकते।

About The Author
संबंधित समाचार



