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Category सम्पादकीय
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Read More... परंपरा और आधुनिक शिक्षा का संगम: भारत में मदरसा शिक्षा को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने की सरकारी पहल
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By NELOFER HASHMI
भारत का एजुकेशन सिस्टम इतिहास, संस्कृति और आस्था से बना एक अलग-अलग तरह का माहौल है। इसकी कई स्ट्रीम में, मदरसा एजुकेशन सिस्टम की एक खास जगह है, खासकर मुस्लिम समुदाय के कुछ हिस्सों के लिए।
Read More... स्वतंत्र पत्रकारिता लोकतंत्र की नींव : डॉ. मोहन तिवारी
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By Vinod Sharma
विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सेक्टर-12 फरीदाबाद निवासी समाजसेवी एवं वरिष्ठ पत्रकार डॉ. मोहन तिवारी ने कहा कि लोकतंत्र की असली मजबूती सिर्फ संस्थाओं से नहीं, बल्कि स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता से तय होती है।
Read More... कहीं हंसना, रोना और मुस्कुराना भूल तो नहीं रहे हैं: संजय मग्गू
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By NELOFER HASHMI
कहीं हंसना, रोना और मुस्कुराना भूल तो नहीं रहे हैंसंजय मग्गूबताइए, क्या जमाना आ गया है। रोने, अपनी पीड़ा किसी अनजान व्यक्ति के सामने सुनाने के लिए भी क्राइंग क्लब खुलने लगे हैं। इसके लिए बाकायदा घंटे के...
Read More... नारी शक्ति वंदन अधिनियमः सशक्त भारत की ओर एक ऐतिहासिक कदम
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By Desh Rojana Bureau
भारत में महिलाओं की भूमिका सदियों से महत्वपूर्ण रही है, लेकिन सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में उन्हें बराबरी का स्थान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाते रहे हैं।
Read More... नए साल 2026 में करें नशे पर प्रहार, युवा पीढ़ी को इससे बचाना समय की मांग
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By NELOFER HASHMI
समाज के बदलते परिवेश में कुछ अलग करने की चाह, मानसिक तनाव, कम समय में अधिक कमाने, बेरोजगारी और बहुत से गैर जरूरी शौक ऐसे कारण है जो
Read More... ऊसर में खिला फूल: दलित जीवन का संघर्ष
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By Desh Rojana Bureau
प्रतिकूल परिस्थितियों में, जीवन की सारी उर्वर शक्तियों को निचोड़कर स्वयं को पल्लवित रखने का संघर्ष, ऊसर में फूल खिलने जैसा है। 'ऊसर' का अर्थ ही ऐसी ज़मीन है जो जीवन के लिए योग्य नहीं है, फिर भी कुछ कैक्टस जैसे उद्भिज उस ज़मीन से अपने जीवन का रस निचोड़कर खुद को जीवित रखते हैं और जीवटता का परिचय देते हैं। जालिम प्रसाद की आत्मकथा 'ऊसर में फूल' भी ऐसे ही जीवन की कहानी है, जैसा मरुभूमि में कैक्टस का होता है।
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