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काश कि बेटी की फीस के लिए किसी रमाबाई को न दौड़ना पड़े

काश  कि बेटी की फीस के लिए किसी रमाबाई को न दौड़ना पड़े
संजय मग्गू कोई भी स्त्री अगर सबसे ज्यादा किसी को प्यार करती है, तो वह है उसकी संतान। मां अपनी संतान के लिए कुछ भी कर सकती है। किसी भी तरह का कष्ट उठा सकती है। जरूरत पड़ने पर वह...
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जलवायु परिवर्तन की चेतावनी सुनो, अभी समय है चेत जाओ

संजय मग्गू यह प्रकृति की द्वंद्वात्मकता ही है कि पृथ्वी के एक हिस्से में इन दिनों आग बरस रही है, जंगल जल रहे हैं और वहीं दूसरी ओर भारी बारिश के चलते जल प्रलय हो रही है। यूरोप में आल्पस...
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भाजपा के गले की फांस बनता जा रहा आरक्षण मुद्दा

संजय मग्गू आरक्षण का मामला आजादी के बाद से ही चुनावी वैतरणी पार उतरने का एक बहुत बेहतरीन जरिया रहा है। आरक्षण के मुद्दे को ढाल बनाकर चुनाव जीते जाते रहे हैं। आज भी हालात बदले नहीं हैं, लेकिन इन...
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डिजिटल युग ने जितना दिया, उससे कहीं ज्यादा छीन लिया

संजय मग्गू हमारे समाज में बातचीत की परंपरा लगभग खत्म होती जा रही है। लोगों को अकसर यह भ्रम होता है कि वह परिवार के साथ हैं। लेकिन सच तो यह है कि वह परिवार के संपर्क में हैं, परिवार...
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प्राकृतिक आपदाओं के सामने विज्ञान की ताकत फेल: संजय मग्गू

संजय मग्गू विज्ञान ने बहुत प्रगति कर ली है। शरीर के भीतर छिपे वायरस को देखने और खोजने से लेकर अंतरिक्ष में ग्रहों और उपग्रहों की निगरानी करने तक में विज्ञान सक्षम है। अब तो हजारों किमी दूर बैठ डॉक्टर...
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हिमालय की चेतावनी को समझिए, नहीं तो तबाही निश्चित: संजय मग्गू

संजय मग्गू पहाड़ का अपना स्वभाव होता है। यदि उसके मामले में ज्यादा हस्तक्षेप किया जाए, तो वह उग्र रूप धारण कर लेता है। बुधवार को नेपाल की ओर बेहद ऊंचाई पर ल्हेंडे खोला नदी के उद्गम स्थल पर स्थित...
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जेन जेड को समझना होगा, रातोंरात नहीं बदलता सिस्टम: संजय मग्गू

  संजय मग्गू मुझे भारत की सबसे प्रसिद्ध फिल्म ‘शोले’ का एक डॉयलाग याद आ रहा है। फिल्म में गब्बर सिंह कहता है कि पचास-पचास कोस की दूर किसी गांव में जब कोई बच्चा रोता है, तो मां कहती है, बेटा...
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अपने सपनों को भविष्य पर नहीं टालना चाहता जेन जी: संजय मग्गू

संजय मग्गू वैसे तो सपने सभी देखते हैं। हमारी पीढ़ी के भी सपने थे। हमसे पूर्व की पीढ़ी के भी कुछ न कुछ सपने जरूर रहे होंगे। हमारी अगली पीढ़ी के भी कुछ सपने हैं। हर पीढ़ी अपनी पूर्ववर्ती पीढ़ी...
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बुजुर्गों से संस्कृति, इतिहास सीख सकते हैं युवा: संजय मग्गू

  संजय मग्गू एक पुरानी कहावत है कि बनिये को मूल से ज्यादा ब्याज प्यारा होता है। यह कहावत दादा-दादी और पौत्र-पौत्रियों पर भी लागू होती है। बुजुर्गों में अकसर यह प्रवृत्ति देखने को मिलती है। यह मानव स्वभाव है। इसमें...
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आनंद तो चहुंओर बिखरा पड़ा है, महसूस तो करो : संजय मग्गू

संजय मग्गू महात्मा बुद्ध ने विक्षिप्त पट्टाचारा से भी तो यही कहा-मरण एक अविचल सत्य है, उससे बचा नहीं जा सकता है। कोई कितना ही दुखी क्यों न हो, मरण नहीं रुकता है। सो, कौन किसके लिए शोक करे। पट्टाचारा...
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अपने ही बुने जाल-जंजाल में उलझता जा रहा है इंसान: संजय मग्गू

संजय मग्गू मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या उसके मन के भीतर छिपी बैठी अशांति है। इंसान कभी संतुष्ट नहीं होता है। उसके पास जितना है, उससे अधिक की लालसा में वह सदैव लगा रहता है। एक कमरे का मकान है,...
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कांग्रेस ने थोड़ी सी चूक किए कराए पर फेर सकती है पानी: संजय मग्गू

    संजय मग्गू कांग्रेस ने अब रणनीति बनाकर उस पर अमल करना सीख लिया है। वैसे तो जंतर-मंतर पर चल रहा धरना-प्रदर्शन खत्म हो गया है। सारे युवा अपने-अपने घर पहुंच चुके हैं, लेकिन कांग्रेस ने पेपरलीक और छात्रों के मुद्दे...
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