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Category सम्पादकीय
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ऊसर में खिला फूल: दलित जीवन का संघर्ष
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By Desh Rojana Bureau
प्रतिकूल परिस्थितियों में, जीवन की सारी उर्वर शक्तियों को निचोड़कर स्वयं को पल्लवित रखने का संघर्ष, ऊसर में फूल खिलने जैसा है। 'ऊसर' का अर्थ ही ऐसी ज़मीन है जो जीवन के लिए योग्य नहीं है, फिर भी कुछ कैक्टस जैसे उद्भिज उस ज़मीन से अपने जीवन का रस निचोड़कर खुद को जीवित रखते हैं और जीवटता का परिचय देते हैं। जालिम प्रसाद की आत्मकथा 'ऊसर में फूल' भी ऐसे ही जीवन की कहानी है, जैसा मरुभूमि में कैक्टस का होता है।
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