ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) ने मनाया 25वां स्थापना दिवस
भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) ने 25वां स्थापना दिवस आज नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों, नीति निर्माताओं, सहयोगी संगठनों और देश भर के हितधारकों की उपस्थिति में मनाया गया।
नई दिल्ली: भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) ने 25वां स्थापना दिवस आज नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों, नीति निर्माताओं, सहयोगी संगठनों और देश भर के हितधारकों की उपस्थिति में मनाया गया।
मनोहर लाल, विद्युत एवं आवासन और शहरी कार्य मंत्री ने मुख्य अतिथि के रूप में इस कार्यक्रम में भाग लिया। पंकज अग्रवाल, विद्युत सचिव ने मुख्य भाषण दिया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, राज्य नामित एजेंसियों (एसडीए) और सहयोगी संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

मनोहर लाल ने प्रसिद्ध कहावत, “उपचार से बेहतर रोकथाम है,” का स्मरण करते हुए कहा कि ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) विद्युत क्षेत्र के लिए एक निवारक संस्था के रूप में कार्य करता है। आज बचाई गई बिजली की प्रत्येक इकाई अतिरिक्त उत्पादन क्षमता की आवश्यकता को कम करने और उत्सर्जन को घटाने में सीधे तौर पर योगदान देती है। ऊर्जा-दक्ष प्रणालियों को अपनाकर हम न केवल पर्यावरण की रक्षा करते हैं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और अधिक टिकाऊ भविष्य भी सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने देश में ऊर्जा दक्षता पहलों को आगे बढ़ाने में बीईई के महत्वपूर्ण योगदान की भी सराहना की।
मनोहर लाल ने जलवायु संबंधी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने और ऊर्जा दक्षता को राष्ट्रीय विकास के मूल स्तंभ के रूप में मजबूत करने में भारत की महत्वपूर्ण प्रगति के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने 2005 के स्तर से अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की उत्सर्जन तीव्रता में 36 प्रतिशत की कमी की है और 2030 के लक्ष्य से पहले ही 52 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित क्षमता हासिल कर ली है।
उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा खपत दायित्व (आरसीओ), प्रदर्शन, उपलब्धि और व्यापार (पीएटी) योजना, कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना (सीसीटीएस) के प्रसार, कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता (सीएएफई), एमएसएमई के लिए एडीईईटीआईई योजना, मानक और लेबलिंग (एस एंड एल) कार्यक्रम, ऊर्जा संरक्षण और सतत भवन संहिता (ईसीएसबीसी), और परिवहन क्षेत्र दक्षता उपायों सहित प्रमुख बीईई पहलों के तहत प्राप्त प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख किया।
उन्होंने आगे की राह पर जोर देते हुए विकसित भारत @2047 के विजन को प्राप्त करने में ऊर्जा दक्षता की भूमिका का उल्लेख किया साथ ही डेटा सेंटर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे उभरते क्षेत्रों की ओर ध्यान आकर्षित किया। इसके लिए कुशल और टिकाऊ ऊर्जा प्रबंधन समाधानों की आवश्यकता है।
विद्युत सचिव पंकज अग्रवाल ने बढ़ती मांग, गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता के विस्तार और बढ़ते डिजिटलीकरण से भारत के ऊर्जा परिदृश्य के बदलते स्वरूपों का उल्लेख किया। उन्होंने ऊर्जा दक्षता को भारत का ‘‘प्रथम ईंधन’’ और ऊर्जा सुरक्षा, किफायत और स्थिरता के बीच संतुलन स्थापित करने का एक प्रमुख साधन बताया।
उन्होंने एस एंड एल और ईसीएसबीसी के माध्यम से शीतलन दक्षता में बीईई की पहलों, कार्बन मार्केट और एडीईईटीआईई योजना के माध्यम से औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन, ऊर्जा दक्षता केंद्रों की स्थापना और परिवहन क्षेत्र में ईंधन दक्षता सुधारों के बारे में बताया।

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नीलोफर हाशमी, देश रोजाना ऑनलाइन में सीनियर पत्रकार हैं। वे करंट अफेयर्स, ह्यूमन नेचर, सोशल और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरें बनाती हैं। मीडिया में नीलोफर को सालों का अनुभव है।



