नींव मजबूत तो फसल भरपूर, खेती में बीजों की भूमिका

प्रमाणित बीज अपनाएं, लागत घटाएं और आमदनी बढ़ाएं।

Desh Rojana
On

खेती का भविष्य बीज की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। अच्छा बीज अच्छी फसल और किसान के लिए अच्छे मुनाफे का कारण बनता है। अगर किसान को ज़्यादा आमदनी प्राप्त करनी है तो अच्छे बीज का ही चुनाव करें। 

नींव मजबूत तो फसल भरपूर, खेती में बीजों की भूमिका
प्रमाणित बीज अपनाएं, लागत घटाएं और आमदनी बढ़ाएं। 

खेती का भविष्य बीज की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। अच्छा बीज अच्छी फसल और किसान के लिए अच्छे मुनाफे का कारण बनता है। अगर किसान को ज़्यादा आमदनी प्राप्त करनी है तो अच्छे बीज का ही चुनाव करें। 

जैसा की सभी जानते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार है खेती और खेती के लिए आवश्यकता होती है अच्छे बीज की। अच्छे बीज  वो है जिसमें उत्पादन क्षमता ज़्यादा हो, अनुकूल परिस्थियो में भी फसल ख़राब न हो, रोग रोधी हो,और दाने एक समान हों। इसलिए वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को हमेशा सर्टिफाइड बीज लगाने की सलाह दी जाती है।सर्टिफाइड मतलब सरकार द्वारा तय मानकों पर, कृषि वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किये गए उत्तम बीज। 

 How are seeds prepared?

कैसे तैयार किये जाते हैं बीज ?
वैसे तो बीजों को पांच श्रेणियों में बांटा जा सकता है - आनुवंशिक बीज /Nucleus Seed, प्रजनक बीज /Breeder Seed, आधार बीज /Foundation Seed,  प्रमाणित बीज /Certified Seed, किसी किसान या कम्पनी द्वारा सत्यापित बीज/Truthfully Labelled Seeds .

आनुवंशिक बीज /Nucleus Seed
ये कृषि वैज्ञानिकों की कड़ी निगरानी में एकदम शुरुआती अवस्था में उगाए गए बीज होते हैं। अनुवांशिक रूप से ये 100 प्रतिशत शुद्ध होते हैं। ये बीज किसानों को उगाने के लिए नहीं दिए जाते।

प्रजनक बीज /Breeder Seed
प्रजनक बीज उत्पादन का कार्य भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के नियंत्रण में अनुसंधान केन्द्रों व राज्यों के कृषि विश्व विद्यालयों द्वारा किया जाता है। ये बीज कृषि वैज्ञानिकों की देख रेख में तैयार किये जाते हैं और सर्टिफाइड बीज बनाने में इनका अहम रोल होता है। इस बीज की पैकिंग पर गोल्डन येलो यानि सुनहरे पीले रंग का टैग लगा होता है। जिस पर बीज की विशेषताएं और जर्मिनेशन की परसेंटेज लिखी होती हैं साथ ही इसे तैयार करने वाले विशेषज्ञ के हस्ताक्षर होते हैं। इस बीज की अनुवांशिक शुद्धता 99.9 परसेंट होती है।  

आधार बीज /Foundation Seed
ब्रीडर सीड जब सभी मानकों पर खरे उतरते हैं तब इन्हे कृषि वैज्ञानिकों की कड़ी निगरानी में प्रोगात्मक रूप से  फिर से उगाया जाता है। जिसे कृषि विश्वविद्यालयों या प्रशिक्षित किसानों द्वारा ही उगाया जाता है। ये बीज नेशनल सीड कॉर्पोरेशन या स्टेट सीड कॉर्पोरेशन द्वारा प्रमाणित होता है। इस पर सफ़ेद रंग का टैग लगा होता है।  

प्रमाणित बीज /Certified Seed
फाउंडेशन बीज से तैयार किया जाता है सर्टिफाइड बीज, इसकी अनुवांशिक शुद्धता होती है 99 प्रतिशत और इसे नेशनल सीड कॉर्पोरेशन या स्टेट सीड कॉर्पोरेशन द्वारा सर्टिफ़िएड किया जाता है। इस पर नीले रंग का टैग लगा होता है। ये बीज सबसे अच्छा माना जाता है। जो किसानों को उगाने के लिए दिया जाता है। इस बीज को तैयार करते समय किन-किन बातों का ध्यान रखा जाता है आइए इसे विस्तार से समझते  हैं।

Screenshot 2026-04-13 120758

अनुवांशिक शुद्धता(Genetic Purity)
अनुवांशिक शुद्धता का अर्थ हैं, कि बीज को तैयार करते समय विशेषज्ञों द्वारा इसके गुणों को बढ़ाए जाने के दौरान मौलिक जीन में कोई बदलाव नहीं किया गया। इसके लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखा जाता है जैसे -
1. कृषक का चुनाव - बीज तैयार करने के लिए जिन किसानों की मदद ली जाती है। वे प्रशिक्षित होते हैं उन्हें बीज बनाने के सभी नियम कायदे पता होते हैं। बीज तैयार करते समय ये किसान विशेषज्ञों द्वारा बताई गई बातों का पूरी तरह से पालन करते हैं।
2. किस्म का चुनाव – प्रमाणित बीज तैयार करते समय ऐसी किस्म का चुनाव किया जाता है जिसमें अधिकतम उत्पादन देने की क्षमता, रोगरोधी क्षमता और अन्य विशेषताएं होती हैं।
3.  बीज का स्त्रोत – इसमें जिन फाउंडेशन बीजों का प्रयोग किया जाता है वो किसी विश्वविद्यालय या सर्टिफाइड ऑर्गनिज़शन द्वारा तैयार किया गया हो।
4.  छटाईं –बीज तैयार करने वाले विशेषज्ञों द्वारा ये ध्यान रखा जाता है कि खड़ी फसल में दूसरी प्रजाति के पौधे, खरपतवार और बीमार पौधों की छंटाई की जानी चाहिए साथ ही बीज प्रमाणीकरण अधिकारी का समय-समय पर खड़ी फसल का निरिक्षण करना भी ज़रूरी होता है।

 

Screenshot 2026-04-13 120641

बीज निकालना – बीज निकालने समय ध्यान रखा जाता है कि थ्रेसिंग मशीन साफ़ हो और साफ़ सुथरे बोरों में भरकर अन्य बीजों से अलग इसका भण्डारण किया जाता है।

ग्रो आउट टेस्ट – बीज तैयार होने बाद और किसानो तक पहुँचने से पहले इसे एक बार ऊगा कर देखा जाता है और चेक किया जाता है कि, उसमें किसी तरह का कोई बदलाव तो नहीं आया। तब कही जाकर ये किसानों को वितरित किया जाता है।

भौतिक शुद्धता /Physical Purity
 भौतिक रूप से बीज अच्छा दिखे इसके लिए भी अनेक उपाय किये जाते हैं जैसे -
1. बीज की चमक – ये ध्यान रखा जाता है कि बीज भीगा हुआ या ऊगा हुआ तो नहीं है। इसकी प्राकृतिक चमक बरक़रार रहनी चाहिए।
2.  छनाई – ग्रेडिंग – बीज प्रमाणिकरण संस्था द्वारा विशेष मशीनों की मदद से इसमें से सभी तरह की इम्पुरिटी को साफ़ किया जाता है।
3.  कपास की डीलिटिंग – कपास के बीज की डीलीटिंग कर रोएं रहित किया जाता है, यह काम डीलिंटर मशीन या गैस या तेजाब द्वारा किया जाता है।
4. बीज परीक्षण – सभी तरह की साफ़ सफाई के बाद बीजों को परीक्षण के लिए लेबोरेट्री में भेजा जाता है ताकि ये पता लगाया जा सके कि जिन विशेषताओं के लिए बीज तैयार किया गया था क्या वो उन सभी पैमानों पर खरे हैं और उसके बाद ही इनकी पैकिंग की जाती है।
5.  पैकिंग –बीज को किसी भी तरह का कोई नुक्सान न हो इसका ध्यान रखते हुए जूट, कपड़ा, टिन, पाउच आदि में इनकी पकिंग की जाती है  और इसकी सभी विशेषताओं को बताते हुए हरे और नीले रंग के टैग लगाये जाते है।
6.  नमी प्रतिशत – तय मानकों के अनुसार बीज में नमी रखी जाती है जैसे दालों के लिए अधिकतम नमी 9 प्रतिशत और खाद्यानों की 12 प्रतिशत होती हैं।

प्रमाणित बीज की विशेषता 
प्रमाणित बीज अनुवांशिक एवं भौतिक रूप से शुद्ध होते है और इन पौधों में एकरूपता, गुणों में समानता साथ ही पकने की अवधि भी एक समान होती है। इनमें 20 से 25 प्रतिशत ज़्यादा उपज देने की क्षमता होती है। ऐसे में किसान इन सर्टिफाइड यानि प्रमाणित बीजों को निश्चिन्त होकर खरीद सकते हैं।

किसी किसान या कम्पनी द्वारा सत्यापित बीज/Truthfully Labelled Seeds .
ये बीज किसी महारत हासिल किसानों या किसी प्राइवेट कम्पनी द्वारा तैयार किये जाते हैं। जो किसी ऑर्गेनाइज़ेशन द्वारा प्रमाणित नहीं होते बल्कि Field Demonstration यानि खेतों पर विजिट करके बीजों की गुणवत्ता को जांच परख के किसनों द्वारा खरीदे लिए जाते हैं या इन्हे बनाने वालों पर भरोसा करके
 भी किसान इन्हे खरीदते हैं।  

Barley-Seed-Production-1200x550

इतिहास से जुड़े तथ्य 
खेती कोई आज का प्रयोग तो है नहीं, ये तो हज़ारो वर्षो से की जा रही है। कृषि वैज्ञानिक आज है तो तब भी थे। कृषि पर आधारित सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण पुस्तक 'कृषि-पराशर' मानी जाती है। यह प्राचीन संस्कृत ग्रंथ महर्षि पराशर द्वारा लिखा गया है और इसका काल लगभग 400 ईसा पूर्व के आसपास माना जाता है। इसे खेती पर दुनिया की सबसे पहली व्यवस्थित "पाठ्यपुस्तक भी माना जाता है 

प्राचीन काल में बीज ऐसे बनाये जाते जिन्हे  सालों -साल उपयोग में लाया जा सकता है। 
इन्हे संजो कर रखने के कोई तरीके थे जैसे -
1. प्राकृतिक लेप और उपचार- बीजों को गाय के ताजे गोबर में लपेटकर धूप में सुखाया जाता था। 
2. अनाज और बीजों के बीच सूखी नीम की पत्तियां डाली जाती थीं, जो प्राकृतिक कीटनाशक का काम करती थीं।
3.बीजामृत- बीजों को गाय के मूत्र, गोबर, चूना और मिट्टी के मिश्रण यानी बीजामृत से उपचारित किया जाता था ताकि वे रोगों से मुक्त रहें।
4.कौटिल्य अर्थशास्त्र में बीजों को शहद, घी और गोबर के लेप से सुरक्षित करने का उल्लेख मिलता है। 
5.मिट्टी के बर्तन में बीजों को भरकर ऊपर से गोबर और मिट्टी के मिश्रणका लेप कर सील किआर दिया जाता था। 
6.अंडरग्राउंड कोठियां बना कर पुआल और मिट्टी से ढका जाता था।
7.सब्जियों के छोटे बीजों को अक्सर सूखी लौकी के खोल में भरकर रखा जाता था। 

 सामाजिक और सांस्कृतिक संरक्षण
बीज विनिमय- किसान त्यौहारों (जैसे नवरात्रि) के दौरान एक-दूसरे को बेहतरीन बीज भेंट करते थे और बीजों की अदला-बदली करते थे, जिससे विविधता बनी रहती थी।
बीज चयन-फसल कटाई से पहले सबसे स्वस्थ और रोगमुक्त पौधों को चिन्हित कर उनके बीजों को अलग से सहेज लिया जाता था। नवतरि में जौ बोना भी बीजों की टेस्टिंग का ही तरीका हुआ करता था। 

बीज सम्बंधित सभी जानकारियां एक्सपर्ट और किसानों द्वारा ली गई हैं। तो अपने लिए गुणवत्तापूर्ण और अच्छे बीजों का चुनाव करें। क्योंकि बीज भला तो सब भला।

 

Desh Rojana Hiring Ad

About The Author

संबंधित समाचार

Desh Rojana Hiring Ad