गुरु साहिबानों के सिद्धांतों एवं शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रही हैं सरकार : नायब सिंह सैनी
देश व प्रदेश में गुरु परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन बढ़ाया जा रहा है आगे
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि देश व प्रदेश की सरकार गुरु साहिबानों के सिद्धांतों एवं शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रही हैं। ऐसा करके गुरु परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन आगे बढ़ाया जा रहा है।
कुरुक्षेत्र : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि देश व प्रदेश की सरकार गुरु साहिबानों के सिद्धांतों एवं शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रही हैं। ऐसा करके गुरु परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन आगे बढ़ाया जा रहा है। इनमें बैसाखी पर्व भी शामिल है। हरियाणा की धरती को भी यह सौभाग्य प्राप्त हुआ है कि इसका सिख इतिहास और गुरुओं की परंपरा से गहरा संबंध रहा है। लखनौर साहिब, जो श्री गुरु गोबिंद सिंह का ननिहाल था, आज भी उनकी स्मृतियों को संजोए हुए है। हरियाणा के लोगों ने हमेशा सिख गुरुओं के आदर्शों को अपनाया है और उनके संघर्षों में बढ़-चढक़र भाग लिया है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सोमवार को कुरुक्षेत्र के केडीबी मेला ग्राउंड में कला एवं सांस्कृतिक विभाग एवं जिला प्रशासन के तत्वाधान में आयोजित बैसाखी महोत्सव 2026 के राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यातिथि के रूप में बोल रहे थे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सिख इतिहास पर आधारित व प्रदेश सरकार की उपलब्धियों व योजनाओं की प्रदर्शनी का शुभारंभ किया।

इससे पहले मुख्यमंत्री ने महिला व पुरुषों की दंगल प्रतियोगिता को शुरू करवाया और पतंग उड़ाकर अंतरराष्ट्रीय पतंग प्रतियोगिता का भी शुभारंभ किया।
इसके साथ ही हरियाणवी संस्कृति पर आधारित हरियाणा विरासत पवेलियन का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सबसे पहले सब को बैसाखी के पावन पर्व की बधाई दी। इसके साथ ही खालसा पंथ के स्थापना दिवस पर महान गुरुओं के चरणों में नमन किया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज को सिख संगत की तरफ से कृपाण, सरोपा तथा खंडा साहिब का स्मृति चिन्ह भेंट किया।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आज भारत एक नए युग की ओर अग्रसर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमें गुरु साहिबान की शिक्षाओं, एकता, समर्पण, सेवा और परिश्रम को अपने जीवन में अपनाना होगा। हम सभी को मिलकर ऐसा समाज बनाना होगा, जहां सभी को समान अवसर मिले, जहां कोई भेदभाव न हो और जहां हर व्यक्ति को सम्मान पूर्वक जीवन जीने का अधिकार हो। उन्होंने कहा कि इन सभी प्रयासों का उद्देश्य केवल विकास करना नहीं है, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़े रहना, अपनी संस्कृति को संजोना और आने वाली पीढिय़ों को अपने गौरवशाली इतिहास से परिचित कराना है। जब हम अपने अतीत से प्रेरणा लेते हैं, तभी हम एक उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आज धर्मक्षेत्र-कुरुक्षेत्र की इस कर्मभूमि पर बैसाखी के पावन पर्व पर आप सबके बीच आकर बड़ी खुशी हो रही है। यह वह धरा है, जो धर्म और कर्म की धरती के रूप में जानी जाती है। उन्होंने कहा कि बैसाखी का यह उत्सव नई फसलों और नई उम्मीदों का त्योहार है। कुरुक्षेत्र की यह धरा बैसाखी के इस पावन अवसर पर आध्यात्मिक ऊर्जा व सांस्कृतिक उल्लास से सराबोर है। यह त्योहार हमारी आस्था, परंपरा और इतिहास का जीवंत प्रतीक है। बैसाखी का पर्व हमें प्रकृति के साथ जुड़ने, श्रम के सम्मान को समझने और समृद्धि का उत्सव मनाने की प्रेरणा देता है। यह दिन किसानों के परिश्रम का उत्सव है, उनकी मेहनत का सम्मान है और उनकी खुशहाली का प्रतीक है। जब खेतों में लहराती फसलें पककर तैयार होती हैं, तो किसान का हृदय गर्व और आनंद से भर उठता है और उसी खुशी को हम सब मिलकर बैसाखी के रूप में मनाते हैं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि बैसाखी का यह पावन दिन हमारे इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय भी समेटे हुए है। वर्ष 1699 में इसी दिन आनंदपुर साहिब की पवित्र धरती पर दशम पातशाह सरबंसदानी श्री गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। उस समय देश में अन्याय, अत्याचार और अधर्म अपने चरम पर था। ऐसे कठिन समय में गुरु साहिब ने खालसा पंथ की स्थापना करके समाज को एक नई दिशा दी। एक ऐसी दिशा, जिसमें साहस, समानता, आत्मसम्मान और राष्ट्रभक्ति की भावना थी।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि खालसा पंथ की स्थापना के समय गुरु साहिब ने पांच प्यारों को चुना, जो विभिन्न जातियों और क्षेत्रों से थे। यह अपने आप में सामाजिक समानता और भाईचारे का एक अद्भुत संदेश था। एक ही बर्तन से अमृत पिलाकर उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि मानव-मानव में कोई भेद नहीं है। उन्होंने कहा कि बैसाखी का यह पावन पर्व हमें यह भी सिखाता है कि हम अपने जीवन में सकारात्मकता लाएं, अपने कर्तव्यों का पालन करें और समाज के उत्थान में अपना योगदान दें। यह पर्व हमें जोड़ने का संदेश देता है, न कि तोड़ने का। यह हमें सिखाता है कि विविधता में एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।

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