अब एलपीजी की जगह लेगी कैक्टस से बनी गैस !

कैक्टस से बनी गैस पर पकेगा खाना और इससे बनी जैविक खाद से लहलाएंगी फसलें !

Desh Rojana
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कैक्टस (नागफनी) से बनी गैस पर पकेगा खाना, एलपीजी पर निर्भरता होगी कम। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के अमलाहा क्षेत्र में स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर एग्रीकल्चर रिसर्च इन द ड्राई एरियाज (ICARDA) की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ नेहा तिवारी ने अनूठा शोध किया है  प्रयोग ऐसा कि खाना तो पकेगा ही साथ ही किसानों को मिलेगी बेहतरीन खाद भी। 

कहते हैं ना कि, आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है। मतलब इंसान अगर किसी मुसीबत में पड़ जाये तो उससे निकलने के रास्ते भी खोज ही लेता है। अमेरिका-ईरान घमासान के बाद देश में एलपीजी की किल्लत से देश में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। ऐसे में अगर खाना बनाना है तो कुछ ईंधन लगेगा ही। कुछ लोग मारा-मारी कर गैस सिलेंडर प्राप्त कर रहे है, कुछ अपने पुराने तरीकों की और लौट गए हैं। जैसे-पारम्परिक चूल्हे और अंगीठी पर खाना पका रहे हैं। जबकि कई व्यक्ति और संस्थाए नए-नए तरीके खोजने में जुट गए है। ऐसे समय में मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के अमलाहा क्षेत्र में स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर एग्रीकल्चर रिसर्च इन द ड्राई एरियाज (ICARDA) की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ नेहा तिवारी ने एक चौंकाने वाला शोध किया है। 

फ्लेक्सिबल बैलून की टंकी में बनाया बायोगैस प्लांट
डॉ नेहा तिवारी ने 90 फीसदी कैक्टस स्लरी और 10 फीसदी गोबर की खाद को मिलाकर उसमें पांच लीटर पानी डाल कर 25 दिन के फरमेंट होने दिया। जिससे मीथेन गैस का उत्पादन हो रहा है। इससे  करीब 62 प्रतिशत मीथेन गैस पैदा होती है। इस गैस को बनाए में खर्च भी बहुत कम लगता है। फ्लेक्सिबल बैलून की टंकी में बायोगैस प्लांट बनाया जाता है। पहली बार इसे तैयार होने में 25 दिन का समय लगता है। उसके बाद रोजाना मीथेन गैस बनने लगता हैं। इस प्लांट की खास बात यह है कि गैस बनने के बाद जो अवशेष बचता है, वह जैविक खाद बन जाता है, जिसे खेतों में इस्तेमाल किया जाता है। 

गैस प्लांट लगाने की तरफ बढ़ रहा किसानों का रुझान 
कुछ किसान भी हैं जिन्होंने कैक्टस से बनने वाली इस गैस का प्लांट अपने यहां लगाया है। उनका कहना है कि एक हज़ार लीटर जितनी टंकी में उन्होंने ये गैस प्लांट लगाया है और इससे उन्हें बहुत फायदा भी मिल रहा है। साथ ही वो अपने बेकार पड़ी बंजर भूमि पर कैकट्स ऊगा कर इससे दोहरा लाभ ले रहे हैं। 

बंजर जमीन पर लहलायेगी फसल 
अक्सर देखा जाता है कि बंजर जमीन किसी काम की नहीं होती ना तो उस पर कोई पेड़ पौधे उगाये जा सकते हैं और ना ही कोई फसल ही लगाई जा सकती है। वही दूसरी और कैक्टस की खासियत ये है कि, ये बंजर भूमि पर भी पैदा हो सकता है। ऐसे में किसान बंजर भूमि पर कैक्टस ऊगा कर कुकिंग गैस तो बना ही सकते हैं साथ ही इस कैक्टस में कांटे नहीं होते इसलिए वे इसका उपयोग पशु चारे के रूप में भी कर सकते हैं। तो हुई ना 'आम के आम और गुठलियों के दाम' वाली बात। बंजर जमीन पर कैक्टस ऊगा कर चारा भी ले सकते हैं, बायोगैस का उत्पादन कर सकते हैं और साथ ही खेतों के लिए प्राकृतिक खाद भी ले सकते हैं। संसथान इसकी खेती को बढ़ावा भी दे रहा है। जिन क्षेत्रों में वर्षा कम होती है ऐसे क्षेत्रों में भी इसका उत्पादन किया जा सकता है।  

किसानों को मिलेगा विशेष लाभ 
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ नेहा तिवारी का कहना है कि यदि अन्य किसान भी इस मॉडल को अपनाते हैं, तो एलपीजी पर निर्भरता कम होगी। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण और कृषि में भी सुधार होगा। यह पहल आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। उन्होंने बताया कि बहुत जल्द भारत सरकार के द्वारा किसानों के लिए प्रमोट किया जाएगा। हालांकि इस प्रयास में कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। 

गौशालाओं को भी मिलेगा विशेष लाभ 
अक्सर देखा जाता है कि जो गे बूढी और बीमार होती है उन्हें किसानो द्वः छोड़ दिया जाता है ऐसे गौ शालाओं में उन्हें रखा जाता। जहां उनके रख-रखाव पर बड़ा खर्च है। एक गाय से प्रतिदिन 10 किलोग्राम गोबर देती है। जिससे मीथेन युक्त बायोगैस का उत्पादन कर उसे बेचा जा सकता है।विशेषज्ञ बताते हैं कि एक  आंकलन के अनुसार यूपी में एक लाख गायों के गोबर से मीथेन का दोहन कर पेट्रोलियम उत्पादों में लगभग 500 करोड़ रुपये तक की बचत की संभावना बन सकती है। इससे अन्य देशों से आयात होने वाले एलपीजी पर निर्भरता भी घटेगी। 

कैक्टस की खेती से किसान को बड़ा मुनाफा 
कैक्टस यानि नागफनी, वैसे तो ये कांटेदार पौधा है, लेकिन इसकी कुछ वैरायटी कांटारहित भी होती है। इसका इस्तेमाल पशुओं को खिलाने के लिए किया जा सकता है। इस संबंध में रिसर्च भी की जा चुकी है। रिसर्च में ये देखा गया है कि पशु इसे आसानी से खा लेते हैं और पाचन में भी कोई समस्या नहीं होती है। इतना ही नहीं, गर्मियों के दिनों में इसे पशुओं को खिलाने से उन्हें गर्मी और डीहाइड्रेशन से बचाया जा सकता है। इसके साथ बायोगैस के बायोगैस के आलावा इसका इस्तेमाल कई अन्य उत्पाद बनाने में भी किया जाता है। यदि किसान बायोगैस प्लांट नहीं भी लगाना चाहते तब भी कैक्टस की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है। 

 

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