पलवल अनाज मंडी में हुआ करोडों का धान घोटाला, हो विजिसेंलस की जांच: रघुबीर तेवतिया

विधायक की खुली चेतावनी, धान घोटाले में नहीं हुई कार्यवाही तो किसानों के साथ करेंगे धरना-प्रदर्शन

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पृथला विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक रघुबीर तेवतिया ने पलवल अनाज मंडी में करोडों रूपये के घान घोटाले का बडा आरोप लगाया है।

पलवल: पृथला विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक रघुबीर तेवतिया ने पलवल अनाज मंडी में करोडों रूपये के घान घोटाले का बडा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि धान खरीद में किसान से 289 रूपये प्रति क्विंटल के हिसाब से कमिशन के तौर पर लिया गया। किसानों से हुई इस लूट की उगाही में मंडी समिति का एक इंस्पेक्टर ने बडी भूमिका अदा की।

उन्होंने कहा कि यह मुद्दा विधानसभा-सत्र के दौरान भी उठाया गया लेकिन सदन में उनकी आवाज को दबाने का कार्य किया गया। इसलिए अब वह मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री से मांग करते हैं कि भ्रष्टाचार के इस बडे मामले की विजिलेंस से निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिससे यह पता लग सके कि कमिशन खोरी की यह बंदर-बांट किस-किस के बीच हुई।

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बृहस्पतिवार को पलवल अनाज मंडी में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते पृथला के कांग्रेस विधायक रघुबीर तेवतिया।

उन्होंने खुलकर कहा कि क्योंकि यह भ्रष्टाचार का बडा मामला है इसलिए इसमें संलिप्त व्यक्तियों का नार्को टैस्ट हो जिससे सच्चाई प्रदेश के लोगों के समक्ष आ सके। विधायक ने यह मांग भी की कि धान घोटाले के दौरान किसानों से जबरन ली गई राशि की रिकवरी कर प्रभावित किसानों को वापिस लौटाई  जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने कोई कार्यवाही नहीं की तो किसान आंदोलन करने पर मजबूर होंगे और वह स्वयं किसानों के साथ धरना-प्रदर्शन पर बैठेंगे। विधायक रघुबीर तेवतिया बृहस्पतिवार को पलवल अनाज मंडी में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान दर्जनों ऐसे पीडित किसान भी मौजूद रहे जिनसे 289 रूपये प्रति क्विंटल के हिसाब से लाखों रूपये की मोटी रकम धान खरीद के दौरान रिश्वत में ली गई।
विधायक रघुबीर तेवतिया ने कहा कि वह स्वयं एक किसान हैं और किसान की पीडा अच्छी तरह से समझते हैं। मैने हमेशा 36 बिरादरी और हर वर्ग की समानता से आवाज उठाई है और भविष्य में भी उठाते रहेंगे, चाहे इसके लिए कितना ही बडा आंदोलन क्यों न करना पडे। उन्होंने कहा कि भाजपा जातिवाद व धर्म की बात कहकर लोगों को बांटकर अपनी अपनी राजनैतिक रोटियां सेकती रही है, जिससे कि लोगों को असली मुद्दों से भटकाया जा सके। पलवल में भी जातिवाद का जहर भाजपा ही घोल रही है, जबकि कांग्रेस भाईचारे व समानता की की राह पर चलती है। उन्होंने कहा कि एक ओर तो भाजपा बिना पर्ची-खर्ची की बात करती है वहीं दूसरी तरफ पलवल अनाज मंडी में रिश्वत की पर्ची के बगैर खरीद नहीं होती। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार धान खरीद में हुई गड़बडिय़ों और घोटालों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों और व्यापारियों पर कार्रवाई करने के बजाय उल्टे किसानों को ही परेशान कर रही है। अब गेंहू के सीजन में सरकार गेहूं की खरीद के लिए नए-नए नियम बनाकर किसानों के हक पर कुठाराघात कर रही है। गेट-पास व बायोमेट्रिक प्रणाली किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन चुकी है। मंडियों में पोर्टल के बार-बार क्रैश होने से किसानों को अपनी उपज लेकर घंटों, यहां तक कि कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। गेट पास प्राप्त करने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली के पंजीकरण नंबर सहित फोटो अपलोड करना तथा बायोमेट्रिक/ अंगूठा सत्यापन की अनिवार्यता छोटे और सीमांत किसानों के लिए अतिरिक्त बोझ बन रही है। उन्होंने खुलकर कहा कि जब मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल के अंतर्गत किसानों की फसल की पूरी जानकारी सरकार के पास है तो फिर किसानों को क्यों परेशान किया जा रहा है। किसान अपनी मेहनत की फसल को बेचने मंडी में आ रहा है वह कोई चोर नहीं कर रहा। जब एमएसपी का कानून पूरे देश में एक है तो किसानों को मंडियों में फसल बेचने के लिए इतने कानून क्यों बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 24 घंटे में उठान और 72 घंटे में किसान को पेमेंट का नारा भी सरकार का झूठा साबित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंडियों में गेंहू के ढ़ेर लगे हुए हैं और एक अप्रैल से आज 9 अप्रैल तक किसान की पेमेंट नहीं हुई है, बेचारे किसान चक्कर काट रहे हैं।  उन्होंने मांग की कि सरकार को तुरन्त प्रभाव से पोर्टल सिस्टम व बायोमेट्रिक प्रणाली को बंद करना चाहिए। वहीं उन्होंने कहा कि बेमौसम बारिश के चलते किसानों की गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है। बारिश के कारण फसल में नमी की मात्रा बढ़ गई है। सरकार को गेहूं की फसल खरीद के दौरान नमी की मात्रा में छूट देनी चाहिए और बर्बाद हुई फसल का उचित मुआवजा भी किसानों को देना चाहिए।
विधायक रघुवीर सिंह तेवतिया ने भाजपा पर किसान विरोधी सरकार होने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार में किसानों के हितों पर कुठाराघात किया गया है। किसान अपनी मांगों को लेकर लगातार 13 महिने सडकों पर बैठे रहे फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वादा किया था कि कृषि कानूनों को रद्द किया जाएगा, लेकिन भाजपा सरकार ने किसानों से वादाखिलाफी की है। अभी तक कृषि कानूनों को पूरी तरह से रद्द नहीं किया गया है। किसानों को फसलों का उचित मूल्य नहीं दिया जा रहा है।

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