उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने हीट वेव (लू) से बचाव के लिए जारी किए आवश्यक दिशा-निर्देश किए
- हीट वेव संबंधी चेतावनियों पर दें नियमित रूप से ध्यान, शरीर में पानी की न होने दें कमी
उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने बताया कि हीट वेव (लू) की स्थिति शरीर की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है, जिससे हीट स्ट्रोक जैसी स्थितियां उत्पन्न होकर जान का खतरा भी हो सकता है। इस संबंध में उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने आमजन की सुरक्षा के दृष्टिगत जिला प्रशासन की ओर से विभिन्न दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
पलवल: उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने बताया कि हीट वेव (लू) की स्थिति शरीर की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है, जिससे हीट स्ट्रोक जैसी स्थितियां उत्पन्न होकर जान का खतरा भी हो सकता है। इस संबंध में उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने आमजन की सुरक्षा के दृष्टिगत जिला प्रशासन की ओर से विभिन्न दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों की बैठक लेकर नागरिकों को हीट वेव बारे जागरूक करने के निर्देश दिए।
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उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे हीट वेव संबंधी चेतावनियों पर नियमित रूप से ध्यान दें तथा शरीर में पानी की कमी न होने दें। गर्मी के मौसम में अधिक से अधिक पानी पिएं और अपने आप को हाईड्रेड रखें। ओआरएस, लस्सी, नींबू पानी, छाछ आदि का सेवन करें। हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें तथा धूप से बचाव के लिए टोपी, छाता और चश्मे का उपयोग करें। यथासंभव दिन के समय घर या ठंडे स्थानों पर रहें तथा बाहर निकलने पर पर्याप्त विश्राम लें। मौसमी फल एवं सब्जियों जैसे तरबूज, खरबूजा, खीरा आदि का सेवन करें। विशेष रूप से बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों का ध्यान रखें।
उपायुक्त ने नागरिकों से आह्वान किया कि वे दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच तेज धूप में बाहर निकलने से बचें। नंगे पैर बाहर न जाएं और भारी, तंग एवं गहरे रंग के कपड़े पहनने से परहेज करें। अत्यधिक गर्मी में श्रमसाध्य कार्य करने से बचें तथा बच्चों एवं पालतू जानवरों को बंद वाहनों में न छोड़ें। शराब, चाय, कॉफी और सॉफ्ट ड्रिंक्स के अधिक सेवन से बचें, क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी बढ़ाते हैं। बासी एवं अधिक प्रोटीन युक्त भोजन से भी परहेज करें।
उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यस्थलों पर शीतल पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा कर्मचारियों को नियमित अंतराल पर पानी पीने के लिए प्रेरित किया जाए। सीधी धूप से बचाव हेतु छायादार स्थान एवं अस्थायी शेल्टर बनाए जाएं तथा श्रमसाध्य कार्य सुबह या शाम के समय करवाए जाएं। कर्मचारियों को हीट स्ट्रेस के लक्षणों की पहचान के लिए प्रशिक्षित किया जाए। प्राथमिक उपचार (फस्र्ट एड) की सुविधा एवं इमरजेंसी रिस्पांस प्लान कार्यस्थल पर उपलब्ध होना चाहिए। उन्होंने गर्भवती महिला एवं बीमार कर्मचारियों के लिए विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने आमजन से अपील की है कि वे जिला प्रशासन द्वारा जारी की गई एडवाइजरी की पालन करें तथा हीट वेव के प्रभाव से स्वयं और अपने परिवार को सुरक्षित रखें। इस अवसर पर डीआरओ बलराज सिंह दांगी, डीडीपीओ उपमा अरोड़ा उप सिविल सर्जन डा. रामेश्वरी उपस्थित रहे।

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