Rewari News: ज्ञान भारतम मिशन : प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटलीकरण के संरक्षण का किया जा रहा कार्य : डीसी

बैठक कर दिए जरूरी दिशा-निर्देश

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डीसी अभिषेक मीणा ने बताया कि केंद्र सरकार की ज्ञान भारतम मिशन योजना के अंतर्गत देश की प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटलीकरण के संरक्षण का कार्य देशभर में किया जा रहा है।

रेवाड़ी।डीसी अभिषेक मीणा ने बताया कि केंद्र सरकार की ज्ञान भारतम मिशन योजना के अंतर्गत देश की प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटलीकरण के संरक्षण का कार्य देशभर में किया जा रहा है। जिला रेवाड़ी में भी यह कार्य तेजी से किया जा रहा है। जिला के ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के 372 वार्डों और गांवों में 325 सर्वेवर पांडुलिपियों की खोज करने के लिए लगाए हुए हैं। अब तक जिला रेवाड़ी में 126 पांडुलिपियों की पहचान की जा चुकी है।  
डीसी अभिषेक मीणा ने सोमवार को लघु सचिवालय में प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटलीकरण के संरक्षण कार्य के संबंध में बैठक की। इससे पहले मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी डीसी व अन्य अधिकारियों के साथ पांडुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटलीकरण को लेकर समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में जिले में उपलब्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में संरक्षित कर राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध कराने पर चर्चा की गई।
Gyan Bhartmam Mission___Meeting DC
लघु सचिवालय में प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटलीकरण के संरक्षण कार्य के संबंध में बैठक करते हुए डीसी अभिषेक मीणा।
 
डीसी ने बताया कि प्राचीन पांडुलिपियों, ताड़पत्रों एवं दुर्लभ अभिलेखों का सर्वेक्षण, प्रलेखन, संरक्षण एवं डिजिटलीकरण कर उन्हें शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों एवं आमजन के लिए सुलभ पहुंच बनाने के उद्देश्य से ज्ञान भारतम मिशन चलाया जा रहा है। अभियान के तहत 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी पांडुलिपियों को प्राथमिकता दी जा रही है। यह सर्वे कार्य 15 जून तक चलाया जाएगा। इस कार्य में गांवों में मुनादी आदि करवाने के साथ-साथ सर्वेवर द्वारा नागरिकों को जागरूक भी किया जाए जो गांव व शहर में मिलने वाली पांडुलिपि को ज्ञान भारतम पोर्टल पर अपलोड करवाएंगे। 
उन्होंने कहा कि पांडुलिपियों के भौतिक संरक्षण के साथ-साथ उनके विषय-वस्तु के प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया। इसके साथ-साथ उन्होंने स्थानीय विद्वानों, इतिहासकारों और सांस्कृतिक संस्थाओं से भी अपील की है कि वे अपने संग्रह की पांडुलिपियों को इस राष्ट्रीय मिशन में सहयोग हेतु उपलब्ध कराएं। डीसी अभिषेक मीणा ने कहा कि ज्ञान भारतम मिशन का उद्देश्य भारत की ज्ञान परंपरा को संरक्षित कर उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। सभी संबंधितों से सहयोग की अपेक्षा करते हुए समयबद्ध रूप से कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। पांडुलिपियों से संबंधित जानकारी वेबसाइट या मोबाइल एप से करें सांझा
डीसी अभिषेक मीणा ने बताया कि आम नागरिक 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी पांडुलिपि
से संबंधित दस्तावेज या जानकारी   https://gyanbharatam.com/ वेबसाइट या  
https://play.google.com/store/apps/details?id=com.gyanbharatam.app&pli=v  मोबाइल ऐप के माध्यम से साझा कर सकते हैं। इसके अलावा जिला सांख्यिकी अधिकारी के मोबाइल नंबर 9877793490 पर भी संपर्क कर सकते हैं। चिन्हित पांडुलिपियों को राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी में सुरक्षित रखा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अभियान में पांडुलिपि धारकों का स्वामित्व पूर्णतया सुरक्षित रहेगा।
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