Palwal News: घर पर है पांडुलियों का 75 वर्ष से अधिक पुराना संग्रह तो कर सकते हैं साझा : सीईओ

सीईओ जितेंद्र कुमार की अध्यक्षता में पांडुलिपि सर्वेक्षण की समीक्षा बैठक हुई आयोजित

Desh Rojana
On

‘ज्ञान भारतम्’ मिशन के तहत भारत की समृद्ध परम्परा, सांस्कृतिक धरोहर एवं बौद्धिक विकास के महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में प्राचीन पाण्डुलिपियां, ताड़पत्र एवं दुर्लभ अभिलेखों के संरक्षण एवं भावी पीढिय़ों तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण प्रारंभ किया गया है।

पलवल: ‘ज्ञान भारतम्’ मिशन के तहत भारत की समृद्ध परम्परा, सांस्कृतिक धरोहर एवं बौद्धिक विकास के महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में प्राचीन पाण्डुलिपियां, ताड़पत्र एवं दुर्लभ अभिलेखों के संरक्षण एवं भावी पीढिय़ों तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण प्रारंभ किया गया है। इस मिशन के संबंध में हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक लेकर जिला उपायुक्तों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। सीईओ जिला परिषद जितेंद्र कुमार वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से बैठक से जुड़े।
01सीईओ जिला परिषद जितेंद्र कुमार ने वीसी उपरांत जिला सचिवालय स्थित सभागार में ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के अंतर्गत राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत एक प्रमुख पहल के रूप में ‘ज्ञान भारतम्’ मिशन शुरू किया है, जिसके तहत देश में मौजूद दुर्लभ पांडुलिपियों का डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। इस मिशन का उद्देश्य भारत भर में शैक्षणिक संस्थानों, संग्रहालयों, पुस्तकालयों तथा निजी संग्रहों में उपलब्ध पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, प्रलेखन, संरक्षण, डिजिटलीकरण कर उन्हें सुलभ बनाना है। उन्होंने कहा कि इन पांडुलिपियों को समय के प्रभाव से बचाने के लिए उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि किसी के पास घर में 75 वर्ष या इससे अधिक पुरानी पांडुलिपियों का संग्रह है तो वो भी उन्हें साझा कर सकते हैं।

सीईओ जितेंद्र कुमार ने वीसी उपरांत संबंधित विभागों की बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और जिले में प्राचीन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत जिला में संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों के वैज्ञानिक संरक्षण और डिजिटलीकरण को लेकर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने निर्देश दिए कि जिले में जहां भी वर्षों पुरानी पांडुलिपियां सुरक्षित हैं, जिनमें धार्मिक ग्रंथ, ऐतिहासिक दस्तावेज और पारंपरिक ज्ञान का अनमोल भंडार मौजूद है, कि पहचान की जाए ताकि उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा सके। उन्होंने ‘ज्ञान भारतम मिशन’ का व्यापर स्तर पर प्रचार-प्रसार करने के भी निर्देश दिए ताकि इस मिशन में सभी की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।

15 जून तक जारी है सर्वेक्षण का कार्य :
सीईओ जितेंद्र कुमार ने कहा कि ज्ञान भारतम् अभियान के तहत लगभग 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी पांडुलिपियों को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार की ओर से सर्वे कार्य को तीन माह के भीतर पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जो गत 16 मार्च से शुरू हो चुका है और 15 जून तक जारी रहेगा। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से डिजिटलीकरण और संरक्षण कार्य आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस पहल से जिले की ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

बैठक में डीआरओ बलराज सिंह दांगी, डीडीपीओ एवं नोडल अधिकारी उपमा अरोड़ा, जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी एवं सदस्य सचिव बिजेंद्र कुमार सहित अन्य संबंधित अधिकारीगण व शिक्षण संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

Desh Rojana Hiring Ad

About The Author

संबंधित समाचार

Desh Rojana Hiring Ad