गोरस मोबाइल ऐप से पशुपालक घर बैठे लें वैज्ञानिकों से सलाह। बढ़ेगा दुग्ध उत्पादन, किसानों की दोगुनी होगी आमदनी।
राज्य में वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम ।
पशुपालकों के लिए एक ऐसी मोबाइल ऐप आ आई है, जिसमें किसान पशुओं के रख-रखाव और पोषण से सम्बंधित जानकारी देख सकते हैं। इससे ना सिर्फ पशुओं के स्वास्थ्य पर नज़र रखी जा सकेगी बल्कि दूध का उत्पादन भी बढ़ेगा। और किसानो की आमदनी भी दोगुनी होगी।
मध्य प्रदेश सरकार खेती किसानी और पशु पालन को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में पशुपालकों की आय बढ़ाने और दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने ‘गोरस मोबाइल ऐप’ तैयार किया है। यह ऐप पशुपालकों को वैज्ञानिक तरीके से देखभाल की जानकारी देगा। जैसे- पशुओं की देखभाल कैसे करें, दूध बढ़ाने के लिए क्या करें, क्या ना करें, कब कितना आहार दें साथ ही उनके स्वास्थ्य और गर्भाधान सम्बन्धी जानकारी भी देगा। इस ऐप का उद्देश्य पारंपरिक तरीकों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उत्पादन क्षमता को बढ़ाना है।

क्या हैं ऐप की विशेषताएं
ये ऐप ग्रामीण उपयोग कर्ताओं को ध्यान में रख कर तैयार किया गया है। जिससे आप पूरी तरह से हिंदी भाषा में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसमें गाय और भैंस के लिए संतुलित आहार की सलाह दी जाती है, ताकि कम लागत में अधिक दूध उत्पादन किया जा सके। ऐप में 28 से अधिक स्थानीय चारे की जानकारी दी गई है और यह मौसम तथा गर्भावस्था के अनुसार आहार को कैसे देना है ये भी बताता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता ये है कि एक बार डाउनलोड करने के बाद इसे चलाने के लिए इंटरनेट की आवश्यता भी नहीं पड़ेगी।
क्यों पड़ी ऐप बनाए की आवश्यता ?
प्रदेश में 2 करोड़ से अधिक गाय और भैंसों का पालन किया जाता है, लेकिन ज्यादातर पशुपालक अभी भी पारंपरिक तरीके से पशुओं को चारा देते हैं। इसके कारण पशुओं को सही पोषण नहीं मिल पाता, जिससे दूध उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक कमी आ जाती है। इसके अलावा गर्भधारण में कठिनाई और बार-बार हीट में आने जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं। पशुओं के स्वास्थ्य पर निगरानी रखना आदि चुनौतियों को देखते हुए यह ऐप विकसित किया गया है।

कैसे काम करता है गोरस ऐप?
‘गोरस मोबाइल ऐप’ पशुपालकों से उनके पशु से जुड़ी जानकारी जैसे नस्ल, वजन, दूध उत्पादन, गर्भावस्था की स्थिति और आहार से संबंधित विवरण लेता है। इसके आधार पर यह ऐप संतुलित आहार की सही मात्रा और प्रकार की जानकारी देता है। साथ ही यह भी बताता है कि आहार में सुधार करने पर पशुपालक को कितना आर्थिक लाभ हो सकता है। अगर पशु दूध नहीं दे रहा या कम दूध का उत्पादन हो रहा है तो ऐसी स्थिति में किसान क्या करे ये भी बताता है।
पशुओं में नस्ल सुधार की सलाह
ऐप से गिर, साहीवाल, थारपारकर, मुर्रा, भदावरी जैसी नस्लों के लिए अलग-अलग सुझाव दिए गए हैं। क्योंकि ये गाय या भैंस की विभिन्न नस्लें अलग-अलग क्षेत्रों से आती हैं। तो इन पर मौसम का प्रभाव, दूध की मात्रा और स्वस्थ्य सम्बंधित ज़रूरते भी एक दूसरे से अलग ही हैं। ये ऐप पशुपालकों को संभावित आर्थिक लाभ के बारे में भी जानकारी देता है। इसके अलावा अवर्णित पशुओं के लिए नस्ल सुधार की सलाह भी इसमें शामिल है।

किसान कैसे उठाएं लाभ
यह ऐप पशुपालकों के लिए एक डिजिटल गाइड की तरह काम करेगा, जिससे वे अपने पशुओं को सही पोषण दे सकेंगे। इससे पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर होगा, दूध उत्पादन बढ़ेगा और अंततः पशुपालकों की आय में वृद्धि होगी। यह पहल राज्य में वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
ऐसे करें डाउनलोड
पशुपालक इस ऐप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें प्ले स्टोर पर जाकर “गोरस ऐप” सर्च करना होगा। डाउनलोड करने के बाद इंस्टॉल की अनुमति देकर ऐप को आसानी से उपयोग किया जा सकेगा। यह ऐप पूरी तरह नि:शुल्क है। तो आप भी इसे डाउनलोड कर इसका लाभ ले सकते हैं।

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