नाको की राष्ट्रीय रणनीति को गति प्रदान करते हुए पंजाब राज्य ने जिला-आधारित एचआईवी प्रतिक्रिया को बल दिया
प्राथमिकता वाले 21 जिलों ने लक्षित एवं डेटा-आधारित कार्रवाई के माध्यम से 95-95-99 लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु रणनीतियों को क्रियान्वित किया
एचआईवी नियंत्रण में अधिक प्रभाव वाले जिलों पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत National AIDS Control Organisation (नाको) ने आज चंडीगढ़ में एक उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया।
ज़ीरकपुर: एचआईवी नियंत्रण में अधिक प्रभाव वाले जिलों पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत National AIDS Control Organisation (नाको) ने आज चंडीगढ़ में एक उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में पंजाब के प्राथमिक जिलों को एक मंच पर लाकर 95-95-99 लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु लक्षित एवं डेटा-आधारित कार्रवाई को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

बैठक की अध्यक्षता डॉ. राकेश गुप्ता, अतिरिक्त सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार एवं महानिदेशक, नाको ने की। इस अवसर पर पंजाब सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख शासन सचिव श्री कुमार राहुल सहित राज्य एवं जिला स्तर के वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी भी उपस्थित रहे।
डॉ. राकेश गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा, "पंजाब जैसे राज्यों में, जहाँ इंजेक्शन से नशे का उपयोग एचआईवी संक्रमण को बढ़ावा देता है, इस स्तिथि में हमारी प्रतिक्रिया तुरंत एवं तीव्र होनी चाहिए। डेटा पर आधारित जिला-स्तरीय रणनीतियाँ तथा अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जुड़ाव इस इस स्तिथि को बदलने के लिए बहुत जरूरी है" । उन्होंने आगे कहा कि जिलों को अधिक सशक्त बनाना एवं जवाबदेही प्रदान करना राष्ट्रीय लक्ष्यों को स्थानीय स्तर पर ठोस परिणामों में बदलने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
यह कार्यशाला राज्यों में National AIDS Control Organisation (NACO) द्वारा संचालित संरचित पहलों की एक श्रृंखला का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य विकेन्द्रीकृत और डेटा आधारित दृष्टिकोण के माध्यम से उच्च भार वाले जिलों में एचआईवी कार्यक्रम के कार्यान्वयन को सुदृढ़ करना है। पंजाब, जहाँ एचआईवी प्रसार दर 0.42% हे और अनुमानित 1,10,715 लोग एचआईवी के साथ जीवनयापन कर रहे हैं (PLHIV), इस लक्षित रणनीति के अंतर्गत एक प्राथमिकता वाला राज्य बना हुआ है।
कार्यक्रम के सुदृढ़ कार्यक्रम कार्यवाही हेतु कुल 21 प्राथमिक जिलों-तरण तारण, अमृतसर, मोगा, पठानकोट, मानसा, फतेहगढ़ साहिब, लुधियाना, होशियारपुर, एस.ए.एस. नगर, जालंधर, कपूरथला, गुरदासपुर, बरनाला, फरीदकोट, संगरूर, पटियाला, शहीद भगत सिंह नगर, फिरोजपुर, बठिंडा, रूपनगर एवं श्री मुक्तसर साहिब-की पहचान की गई है। कार्यशाला में जिला टीमों ने अपनी प्रगति प्रस्तुत की, कार्यक्रम संचालन से जुड़ी चुनौतियों को प्रस्तुत किया तथा एचआईवी की रोकथाम, जाँच एवं उपचार सेवाओं को सुदृढ़ करने हेतु रणनीतियाँ विकसित कीं।
राज्य की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए, श्री कुमार राहुल ने कहा, "पंजाब लक्षित और साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेपों के माध्यम से अपने एचआईवी प्रत्युत्तर को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस कार्यशाला ने जिलों को अपनी रणनीतियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ढालने और बेहतर सेवा वितरण तथा स्वास्थ्य परिणामों के लिए जवाबदेही को सुदृढ़ करने में सक्षम बनाया है।"
कार्यशाला में वरिष्ठ जिला अधिकारियों, जिनमें उप आयुक्त, अतिरिक्त उप आयुक्त, सिविल सर्जन और जिला एचआईवी/एड्स नियंत्रण अधिकारी शामिल थे, की सक्रिय भागीदारी रही, जिसने एचआईवी कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए समन्वित एवं परिणाम केंद्रित नजरिए को बल मिला। इस एक दिवसीय कार्यशाला ने पारस्परिक सीख को प्रोत्साहित किया तथा जिलों ने लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु ठोस कार्ययोजनाएँ बनाई ।

नाको वर्ष 2030 तक एड्स उन्मूलन की दिशा में एक समन्वित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया को आगे बढ़ाने हेतु, राष्ट्रीय, राज्य एवं जिला स्तर पर सहयोग को बढ़ावा दे रहा है।
चंडीगढ़ कार्यशाला का सफल आयोजन भारत के जिला-आधारित प्रयासों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे प्राथमिकता वाले भौगोलिक क्षेत्रों में 95-95-99 लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में प्रगति को गति मिलेगी।

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