अतिक्रमण के आगे बेबस दिख रहा कैथल प्रशासन, बाजारों में दुकानदारों के हौसले बुलंद

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शहर में बढ़ते अतिक्रमण ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्य बाजारों और व्यस्त सड़कों पर दुकानदारों द्वारा खुलेआम 8 से 10 फीट तक सड़क पर कब्जा कर लिया गया है

कैथल: शहर में बढ़ते अतिक्रमण ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्य बाजारों और व्यस्त सड़कों पर दुकानदारों द्वारा खुलेआम 8 से 10 फीट तक सड़क पर कब्जा कर लिया गया है, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि जहां सड़कें पहले ही संकरी हैं, वहां अब पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है।
शहर के प्रमुख बाजारों जैसे मुख्य बाजार, रेलवे रोड, शहीद भगत सिंह चौक, कबूतर चौक, करनाल रोड़, कुरुक्षेत्र रोड़, अंबाला रोड, पिहोवा चौक, पुराना बस स्टैंड क्षेत्र और अन्य व्यावसायिक इलाकों में दुकानदारों ने अपनी दुकानों के बाहर सामान सजा कर सड़क का बड़ा हिस्सा घेर लिया है। कई स्थानों पर तो ठेले और रेहड़ी वाले भी सड़क के बीचों-बीच खड़े दिखाई देते हैं, जिससे जाम की स्थिति बनी रहती है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि अतिक्रमण के कारण ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। सुबह और शाम के समय बाजारों में इतनी भीड़ हो जाती है कि वाहन चालकों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है।
 
प्रशासन की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
 
कैथल नगर परिषद और पुलिस प्रशासन समय-समय पर अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाने का दावा जरूर करता है, लेकिन इन अभियानों का असर कुछ ही दिनों तक सीमित रहता है। जैसे ही कार्रवाई ढीली पड़ती है, दुकानदार फिर से सड़क पर कब्जा जमा लेते हैं।
शहरवासियों का आरोप है कि प्रशासन की ढिलाई के कारण ही दुकानदारों के हौसले इतने बुलंद हैं। कई दुकानदार खुलेआम कहते सुने जा सकते हैं कि दो दिन में सब पहले जैसा हो जाएगा, जो प्रशासन की साख पर सवाल खड़ा करता है।
 
ट्रैफिक पुलिस भी बेबस
 
ट्रैफिक पुलिस की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। बाजारों में तैनात पुलिसकर्मी और होम गार्ड के जवान कई बार अतिक्रमण हटाने की कोशिश करते हैं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिलती। सीमित संसाधनों और स्टाफ की कमी के चलते पुलिस हर जगह निगरानी नहीं कर पाती, जिसका फायदा दुकानदार उठा रहे हैं।
अतिक्रमण के चलते एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन सेवाओं को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है, जो किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है।
 
व्यापारियों की भी अपनी दलील
 
दूसरी ओर, कुछ दुकानदारों का कहना है कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए उन्हें मजबूरन दुकान के बाहर सामान लगाना पड़ता है। उनका तर्क है कि यदि वे ऐसा नहीं करेंगे तो उनकी बिक्री पर असर पड़ेगा और वाहन चालक उनकी दुकानों के आगे अपना वाहन खड़ा करेंगे।
हालांकि, यह दलील आम जनता की परेशानियों के सामने कमजोर पड़ती नजर आती है। नियमों का पालन करना सभी के लिए अनिवार्य है और सार्वजनिक स्थानों पर कब्जा किसी भी सूरत में उचित नहीं ठहराया जा सकता।
 
शहर की सुंदरता और छवि पर असर
 
अतिक्रमण ने न केवल ट्रैफिक व्यवस्था को बिगाड़ा है, बल्कि शहर की सुंदरता और छवि को भी नुकसान पहुंचाया है। बाहरी शहरों से आने वाले लोगों पर इसका गलत प्रभाव पड़ता है, जिससे शहर की छवि धूमिल होती है।
 
समाधान की जरूरत
 
शहर के समाजसेवियों का मानना है कि इस समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है जब प्रशासन सख्ती के साथ नियमित अभियान चलाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना व अन्य कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करे। साथ ही, दुकानदारों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और सार्वजनिक स्थानों का अतिक्रमण करने से बचना होगा।
 
शहरवासियों की मांग है कि प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए ठोस कदम उठाए, ताकि कैथल की सड़कों को अतिक्रमण मुक्त बनाया जा सके और आम जनता को राहत मिल सके।
अगर समय रहते इस समस्या पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
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