वसुधैव कुटुंबकम’ के शाश्वत भारतीय दर्शन को साकार करता सूरजकुंड शिल्प मेला : सीपी राधाकृष्णन

सूरजकुंड शिल्प मेला हमारी प्राचीनता और आधुनिकता का संगम : श्री नायब सिंह सैनी

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हरियाणा के सूरजकुंड में 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला-2026 का भव्य आगाज हुआ, जो 15 फरवरी तक चलेगा। भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने बतौर मुख्य अतिथि मेले का उद्घाटन किया।

फरीदाबाद: हरियाणा के सूरजकुंड में 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला-2026 का भव्य आगाज हुआ, जो 15 फरवरी तक चलेगा। भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने बतौर मुख्य अतिथि मेले का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर, मेले में सहयोगी देश मिस्र के एम्बेसडर कमल जायद ग़लाल, हरियाणा के राजस्व एवं शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल, हरियाणा के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री राजेश नागर, हरियाणा के खेल, युवा अधिकारिता एवं उद्यमिता मंत्री गौरव गौतम, भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीवत्स कृष्णा व पर्यटन विभाग हरियाणा के आयुक्त एवं सचिव डॉ अमित अग्रवाल की गरिमामयी उपस्थिति रही।
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मेले के शुभारंभ अवसर पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मेला परिसर में हरियाणा के अपना घर पवेलियन का दौरा किया, जहां हरियाणवी पगड़ी पहनाकर उनका पारंपरिक स्वागत-सत्कार किया गया। उपराष्ट्रपति ने मेले के थीम स्टेट मेघालय के स्टॉलों का अवलोकन करते हुए शिल्पकारों से संवाद किया तथा उनके हुनर की सराहना की। इसके साथ ही उन्होंने मेले में सहभागी विभिन्न देशों और राज्यों की सांस्कृतिक विधाओं का अवलोकन कर कलाकारों एवं शिल्पकारों का उत्साहवर्धन किया। मेला परिसर की मुख्य चौपाल के मंच से उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने मेले में आने वाले आगंतुकों की सुविधा हेतु मेला साथी ऐप का शुभारंभ भी किया। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी तथा विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा द्वारा उन्हें पांचजन्य शंख और महाभारत के दृश्य को दर्शाती एक आकर्षक पेंटिंग भेंट की गई।
उद्घाटन करने उपरांत उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने अपने संबोधन में कहा कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला दशकों से भारत की सांस्कृतिक आत्मा, कलात्मक उत्कृष्टता और सभ्यतागत निरंतरता का जीवंत प्रतीक रहा है। यह उत्सव ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के उस शाश्वत भारतीय दर्शन को साकार करता है, जिसमें पूरी दुनिया को एक परिवार माना गया है। यह  मेला निर्माण करने वाले हाथों, नवाचार से भरे मस्तिष्कों और हमारी पहचान गढ़ने वाली परंपराओं को एक साझा मंच पर एकत्र करता है। पिछले लगभग चार दशकों से यह आयोजन हमारे कारीगरों, बुनकरों, मूर्तिकारों, चित्रकारों और लोक कलाकारों को वैश्विक पहचान दिला रहा है, जिनमें से अनेक पीढ़ियों से चली आ रही कलाओं को जीवित रखे हुए हैं। इस वर्ष आत्मनिर्भर भारत पर केंद्रित दृष्टिकोण ने मेले के महत्व को और भी गहन बना दिया है, क्योंकि हमारे कारीगर सदियों पुराने ज्ञान के संरक्षक हैं और उन्हें सशक्त बनाना एक समावेशी, सशक्त और टिकाऊ अर्थव्यवस्था की नींव है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शिल्प मेले के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सूरजकुण्ड शिल्प मेला हमारी प्राचीन विरासत और आधुनिक सोच का सजीव संगम है। पिछले 38 वर्षों से यह मेला भारतीय लोक कला, संस्कृति और शिल्प परंपराओं को न केवल संरक्षित कर रहा है, बल्कि उन्हें नई पीढ़ी और वैश्विक मंच से भी जोड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष की थीम ‘लोकल टू ग्लोबल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत की पहचान’ माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के उस विज़न को साकार करती है, जिसके तहत देश के हर कोने में बसे हुनरमंद कारीगर के हाथों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक स्वावलंबन तक सीमित नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति पर गर्व, अपनी विरासत का संरक्षण और उसे विश्व के समक्ष आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करने का संकल्प है। सूरजकुण्ड शिल्प मेला इसी आत्मनिर्भरता का जीवंत और प्रेरक प्रतीक है। 
उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ अरविंद शर्मा ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सूरजकुंड शिल्प मेले के प्रति विश्वास लगातार बढ़ रहा है, जिसका प्रमाण मेले में बढ़ती वैश्विक भागीदारी है। उन्होंने कहा कि पिछली बार आयोजित 38वें सूरजकुंड क्राफ्ट मेले में जहां लगभग 44 देशों ने मेले में भाग लिया था, वहीं इस वर्ष 50 से अधिक देशों के लगभग 700 प्रतिनिधि और प्रतिभागी सूरजकुंड शिल्प मेले में शामिल हो रहे हैं, जो इस आयोजन के प्रति अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह मेला शिल्पकारों, कलाकारों और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों के लिए एक सशक्त मंच है, जहां उन्हें बेहतर राजस्व के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय पहचान भी मिलती है। मेले के सफल आयोजन के लिए सुरक्षा, परिवहन और अन्य सभी व्यवस्थाएं पुख्ता की गई हैं, साथ ही दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को आयोजन का को-पार्टनर बनाया गया है, ताकि आगंतुकों और पर्यटकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। डॉ. शर्मा ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘लोकल टू ग्लोबल’ की भावना के साथ सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव आने वाले वर्षों में और अधिक विस्तार पाएगा।
कार्यक्रम में बल्लभगढ़ से विधायक एवं पूर्व मंत्री मूलचंद शर्मा,  बड़खल से विधायक धनेश अदलखा, फरीदाबाद एनआईटी से विद्यालय सतीश फागना,  सोहना से विधायक तेजपाल तवर, राई से विधायक कृष्णा गहलावत, नलवा से विधायक रणधीर पनिहार, फरीदाबाद की मेयर प्रवीण जोशी, मोहन लाल बाड़ौली,   फरीदाबाद मंडलायुक्त संजय जून, मेला के मुख्य प्रशासक पार्थ गुप्ता, डीसी आयुष सिन्हा, नगर निगम के आयुक्त धीरेंद्र खटखटा, सीपी सतेंद्र कुमार गुप्ता, सूचना जनसंपर्क एवं भाषा विभाग की अतिरिक्त निदेशक खांगवाल उपस्थित रहे।
 
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नीलोफर हाशमी, देश रोजाना ऑनलाइन में सीनियर पत्रकार हैं। वे करंट अफेयर्स, ह्यूमन नेचर, सोशल और पॉलिटिक्‍स से जुड़ी खबरें बनाती हैं। मीडिया में नीलोफर को सालों का अनुभव है।

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