बिजनौर मंदिर में 36 घंटे तक हनुमान जी की मूर्ति के चक्कर लगाता कुत्ता: आस्था, चमत्कार या मेडिकल इमरजेंसी?
जहाँ लोगों ने भगवान का संकेत देखा, वहीं मेडिकल साइंस ने इसे दिमागी बीमारी की चेतावनी बताया
उत्तर प्रदेश के बिजनौर स्थित एक प्राचीन हनुमान मंदिर में एक कुत्ता करीब 36 घंटे तक लगातार
सुबह का समय था, बिजनौर का एक छोटा सा प्राचीन हनुमान मंदिर रोज़ की तरह खुला हुआ था। तभी लोगों ने देखा कि एक कुत्ता मंदिर में आकर हनुमान जी की मूर्ति के चारों तरफ घूम रहा है। पहले किसी ने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया, सबको लगा थोड़ी देर में चला जाएगा। लेकिन वह कुत्ता रुका नहीं। घंटों बीत गए, फिर पूरा दिन निकल गया, फिर रात भी हो गई, लेकिन कुत्ता वहीं गोल-गोल घूमता रहा। बताया जाता है कि मंदिर परिसर में वो लगातार करीब 36 घंटे तक हनुमान जी की मूर्ति के चारों ओर घूमता रहा। न उसने कुछ खाया, न पानी पिया और न ही कहीं जाकर बैठा। बस एक ही दिशा में, एक ही जगह पर घूमता रहा। धीरे-धीरे आसपास के लोगों की भीड़ जमा होने लगी। किसी ने इसे भगवान का संकेत माना, किसी ने चमत्कार कहा। बात फैलती गई और दूर-दूर से लोग मंदिर आने लगे। कुछ लोगों ने कहा कि यह कुत्ता “भराव बाबा” का दूत है और बाबा खुद यहाँ प्रकट हुए हैं। फिर क्या था, लोग कुत्ते को छूकर माथे से लगाने लगे, किसी ने फूल चढ़ाए, किसी ने अगरबत्ती जलाई और किसी ने तो उसकी बाकायदा पूजा ही शुरू कर दी। लोग मानने लगे कि कुत्ते में कुछ खास है। यहीं से यह घटना आस्था और बहस की बड़ी कहानी बन गई।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने लगे और देखते ही देखते लोगो के मिक्स reaction आने लगे कुछ लोगो के लिए यह घटना आस्था का बड़ा प्रतीक बन गई। लोगों का मानना था कि कुत्ते में कोई अलौकिक शक्ति समा गई है। लेकिन साथ ही सवाल भी उठने लगे। कुछ जागरूक लोगों और पशु चिकित्सकों ने इस घटना को दूसरे नजरिए से देखा।
मेडिकल साइंस इस तरह के व्यवहार को बिल्कुल अलग नजर से देखती है। डॉक्टरों के मुताबिक अगर कोई जानवर लगातार एक ही दिशा में गोल-गोल घूमता रहे, तो यह सामान्य बात नहीं होती। इसे मेडिकल भाषा में “कंपल्सिव सर्कलिंग” कहा जाता है। यह तब होता है जब जानवर के दिमाग या नर्वस सिस्टम में कोई गंभीर गड़बड़ी आ जाती है। ऐसे जानवर को खुद का कंट्रोल नहीं रहता, उसका दिमाग बार-बार शरीर को एक ही हरकत करने का संकेत देता रहता है।
पशु चिकित्सकों का कहना है कि इस तरह का व्यवहार कई खतरनाक बीमारियों की वजह से हो सकता है। इसमें सबसे बड़ा खतरा ब्रेन इंफेक्शन का होता है, जिसमें दिमाग में सूजन आ जाती है और जानवर का संतुलन बिगड़ जाता है। इसके अलावा रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी में भी जानवर अजीब हरकतें करने लगता है, डर या दर्द महसूस नहीं करता और भूख-प्यास का एहसास भी धीरे-धीरे खत्म हो जाता है। कई मामलों में दिमाग में ट्यूमर या *नर्वस सिस्टम के खराब हो जाने से भी जानवर लगातार घूमता रहता है। डॉक्टर यह भी बताते हैं कि 30–36 घंटे तक बिना खाए-पिए रहना अपने आप में एक बड़ा खतरा है। इसका मतलब है कि जानवर का दिमाग सही तरीके से काम नहीं कर रहा। उसे न भूख लग रही है, न प्यास का एहसास हो रहा है, और न ही थकान महसूस हो रही है। यह साफ संकेत होता है कि जानवर गंभीर हालत में है और उसे तुरंत मेडिकल मदद की जरूरत है।
ऐसे मामलों में पूजा-पाठ या चमत्कार मानने की बजाय सबसे जरूरी होता है जानवर को सुरक्षित जगह पर ले जाना, उसे छूने से बचना और तुरंत किसी पशु चिकित्सक को दिखाना। इलाज में देरी जानवर की जान भी ले सकती है और आसपास के लोगों के लिए भी खतरा बन सकती है। मेडिकल साइंस का एक तरफ साफ कहना है कि यह आस्था का नहीं, बल्कि इलाज का मामला होता है।
ऐसी घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। कभी किसी सांप को शिव का रूप मान लिया गया, कभी किसी पेड़ को देवी का अवतार, और कई बार जानवरों के असामान्य व्यवहार को चमत्कार कह दिया गया।
जैसे की 2025 में उत्तर प्रदेश के बागपत में तीन आँखों और दो मुंह वाला बछड़ा
एक गाय ने असाधारण रूप वाला बछड़ा दिया, जिसमें तीन आँखें और दो मुंह थे। गाँव वाले इसे भगवान का चमत्कार मानकर दर्शन करने और पूजा-अर्चना के लिए इकट्ठा होने लगे। पशु चिकित्सकों ने कहा कि जन्मजात अनियमितता कभी-कभी हो सकती है, लेकिन लोगों के विश्वास ने इसे धार्मिक रूप दे दिया।
ऐसे ही बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में 2025 में कांटी प्रखंड में लगभग 500 साल पुराने एक पेड़ की जड़ में नाग बाबा दिखाई देने की खबर फैली। स्थानीय लोगों ने इसे दैवीय चमत्कार मानकर पूजा-पाठ शुरू कर दिया। पहले से ही वहां कमल के फूलों के असामान्य खिलने जैसी घटनाओं का दावा था, जिसने लोगों की आस्था और बढ़ा दी। दूर-दूर से लोग दर्शन करने आए और यह साधारण पेड़ अचानक आस्था का केंद्र बन गया।
और अब बिजनौर की यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम भावनाओं में बहकर सही और गलत का फर्क भूलते जा रहे हैं? कुत्ता भगवान का संदेशवाहक हो सकता है, यह मानना लोगों का विश्वास है, लेकिन उसे समय पर मेडिकल मदद न देना एक बड़ी चूक भी हो सकती है। शायद सच्ची भक्ति यही होती कि पूजा के साथ-साथ उसका इलाज भी कराया जाता। क्योंकि अगर भगवान होते भी, तो सबसे पहले जीवन की रक्षा को ही धर्म मानते। लकिन आज की सचाई आपके सामने है

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