Cyclone Senyar: तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल में भारी बारिश की चेतावनी, IMD ने जारी किया अलर्ट
बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव प्रणाली तेज हुई • अगले 48 घंटों में ‘सेन्यार’ चक्रवात बनने की संभावना • कई राज्यों में पूरे सप्ताह बारिश के आसार
IMD ने दक्षिण भारत के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव क्षेत्र तेजी से सक्रिय हो रहा है और इसके चक्रवाती तूफान ‘सेन्यार’ में बदलने की संभावना जताई गई है। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल और अंडमान-निकोबार सहित कई क्षेत्रों में पूरे सप्ताह बारिश हो सकती है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी, दक्षिणी श्रीलंका और भूमध्यरेखीय हिंद महासागर के आसपास के क्षेत्रों में एक निम्न दबाव का क्षेत्र सक्रिय हो गया है। इस सिस्टम के अगले 24 घंटों में पश्चिम की ओर आगे बढ़ने और उसके बाद के 24 घंटों में पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर गति पकड़ने की प्रबल संभावना है।
IMD के अनुसार चक्रवात का आधिकारिक नामकरण तभी किया जाता है जब सिस्टम गहरे अवदाब से बढ़कर चक्रवाती तूफान में बदल जाता है।
कहाँ होगी भारी बारिश?
IMD के अनुसार, इस प्रणाली के सक्रिय होने से कई राज्यों में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना है:
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तमिलनाडु: 25 से 30 नवंबर तक भारी बारिश, 28–30 नवंबर को बहुत भारी बारिश
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केरल और माहे: 25–26 नवंबर को भारी वर्षा
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तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और रायलसीमा: 29 नवंबर से 1 दिसंबर तक भारी वर्षा
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अंडमान और निकोबार: 25–29 नवंबर तक भारी बारिश, 26–27 नवंबर को बहुत भारी बारिश
गर्जन-चमक और तेज हवाओं की संभावना
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि कई क्षेत्रों में बिजली चमकने और गर्जन के साथ बारिश हो सकती है।
हवाओं की अनुमानित गति:
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29 नवंबर: 30–40 किमी/घंटा
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25 नवंबर: 40–50 किमी/घंटा
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26–28 नवंबर: 50–60 किमी/घंटा
समुद्र में उग्र परिस्थितियाँ
अंडमान सागर, मलक्का जलडमरूमध्य, निकोबार द्वीप समेत मलेशिया, पश्चिमी इंडोनेशिया और थाईलैंड के तटों पर समुद्री स्थितियाँ उग्र से अत्यंत उग्र हैं।
हवाएं 20–25 समुद्री मील की रफ्तार से चल रही हैं जो बढ़कर 35 समुद्री मील तक पहुंच सकती हैं।
IMD ने मछुआरों, जहाजों और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। यदि तूफान 'सेन्यार' के रूप में विकसित होता है, तो दक्षिणी तटों पर इसका प्रभाव और अधिक बढ़ सकता है।



