PM मोदी की बड़ी सौगात: हैदराबाद में Safran का विशाल MRO हब शुरू, हर साल 300 एयरक्राफ्ट इंजनों की होगी मरम्मत
भारत के एविएशन सेक्टर को नई उड़ान—हैदराबाद में Safran की ₹1300 करोड़ की SAESI MRO सुविधा लॉन्च, 2035 तक 1000 से अधिक युवाओं को रोजगार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हैदराबाद में Safran Aircraft Engine Services India (SAESI) के विशाल MRO हब का उद्घाटन किया। यह सुविधा प्रतिवर्ष 300 LEAP इंजनों की मरम्मत करने में सक्षम होगी और भारत को ग्लोबल MRO हब बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। लगभग ₹1300 करोड़ की लागत से बने इस सेंटर में 2035 तक 1000 से अधिक युवाओं को रोजगार मिलेगा।
भारत के एविएशन क्षेत्र के लिए बुधवार का दिन ऐतिहासिक रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट स्थित GMR Aerospace & Industrial Park-SEZ में सफ़रान (Safran) एयरक्राफ्ट इंजन सर्विसेज इंडिया (SAESI) की अत्याधुनिक MRO (Maintenance, Repair & Overhaul) सुविधा का औपचारिक उद्घाटन किया। यह भारत के लिए सिर्फ एक नई सुविधा नहीं, बल्कि एक रणनीतिक छलांग है, जो देश को ग्लोबल एयरोस्पेस और MRO हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाएगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा?

उन्होंने बताया कि भारत का घरेलू विमानन बाजार अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा है, और MRO सेक्टर का विकास देश की आर्थिक मजबूती और स्वदेशी क्षमता बढ़ाने के लिए बेहद आवश्यक है।
85% MRO विदेशों में—अब बदल रही तस्वीर
पीएम मोदी ने बताया कि अब तक भारत के करीब 85% MRO कार्य विभिन्न विदेशी देशों में किए जाते थे, जिससे लागत बढ़ती थी और विमानों को लंबे समय तक ग्राउंडेड रहना पड़ता था। लेकिन अब भारत सरकार के सुधारों—GST रिफॉर्म, 2021 की MRO नीति, और राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति 2016—ने इस सेक्टर में नई जान फूंक दी है।
SAESI: दुनिया के सबसे बड़े MRO हब में शामिल
Safran की यह अत्याधुनिक सुविधा 45,000 वर्गमीटर में फैली है और लगभग ₹1300 करोड़ के निवेश से बनी है। यह पहली बार है जब कोई वैश्विक इंजिन निर्माता (OEM) भारत में इतनी बड़ी MRO सुविधा लेकर आया है।
SAESI हर साल 300 LEAP इंजन की मरम्मत करने में सक्षम होगी। ये वही इंजन हैं जो Airbus A320neo और Boeing 737 MAX जैसे लोकप्रिय विमानों में उपयोग किए जाते हैं।
इससे भारतीय एयरलाइनों को बड़ी राहत मिलेगी—
- लागत कम होगी
- विमानों का डाउनटाइम घटेगा
- विदेशी MRO पर निर्भरता कम होगी
2035 तक 1000+ रोजगार
इस सेंटर में 2035 तक 1000 से अधिक स्थानीय इंजीनियरों और तकनीशियनों को रोजगार मिलेगा। हाई-टेक मशीनरी, अत्याधुनिक प्रक्रियाओं और वैश्विक सुरक्षा मानकों के साथ यह सुविधा भारत की तकनीकी क्षमता को नए स्तर तक ले जाएगी।
यह न केवल देश की मरम्मत क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि भारत को विदेशी मुद्रा की भारी बचत भी कराएगा।



