हरियाणा में पानी के सैंपल फेल, जिंदगी से खिलवाड़! ज़हरीले पानी पर जीने को मजबूर लोग
इंदौर जैसी त्रासदी का खतरा! फ्लोराइड-आर्सेनिक-यूरेनियम से दूषित पानी, 35 हजार सैंपल फेल, सिस्टम अब भी बेख़बर
हरियाणा में पीने का पानी गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है। पिछले चार सालों में 35 हजार से ज्यादा पानी के सैंपल फेल पाए गए हैं। कई जिलों में फ्लोराइड और आर्सेनिक तय सीमा से 20–30 गुना ज्यादा है, फिर भी लोग वही पानी पीने को मजबूर हैं।
हरियाणा में साफ पानी अब हक़ नहीं, एक सपना बनता जा रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि इंदौर में गंदे पानी से हुई मौतों की यादें अब डराने लगी हैं। सवाल यह नहीं कि संकट आएगा या नहीं, सवाल यह है कि कब आएगा।
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पानी में जहर, आंकड़े डराने वाले
सरकारी आंकड़े और जांच रिपोर्ट बताती हैं कि
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पानी में फ्लोराइड, आर्सेनिक और यूरेनियम की मात्रा खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है
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बहादुरगढ़, भिवानी और पानीपत के कई गांवों में ये तत्व तय सीमा से 20 से 30 गुना ज्यादा पाए गए
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जहां फ्लोराइड की सुरक्षित सीमा 1.5 mg/L है, वहां कई इलाकों में यह 22 mg/L तक दर्ज की गई
यह सीधे तौर पर हड्डियों की बीमारी, किडनी फेल्योर, कैंसर और बच्चों के शारीरिक विकास को खतरे में डालता है।
35 हजार सैंपल फेल, फिर भी कोई अलार्म नहीं
पिछले चार सालों में 35,000 से ज्यादा पानी के सैंपल फेल पाए गए, लेकिन न तो आपात चेतावनी जारी हुई, न ही वैकल्पिक जल व्यवस्था की गई।
ग्रामीण इलाकों में लोग मजबूरी में वही पानी पी रहे हैं, जिसे रिपोर्टें स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक बता चुकी हैं।
60–70 साल पुरानी पाइपलाइनें, सीवरेज का पानी सप्लाई में
स्थिति को और भयावह बनाती है हरियाणा की जर्जर जलापूर्ति व्यवस्था—
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कई जगह 60 से 70 साल पुरानी पाइपलाइनें अब भी इस्तेमाल में हैं
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पाइप टूटे हुए हैं, लीकेज आम है
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जलघरों में गाद और सीवरेज का पानी मिलकर सीधे घरों तक पहुंच रहा है
यानी लोग जो पानी पी रहे हैं, वह सिर्फ दूषित नहीं, बल्कि बीमारियों का न्योता है।
NGT के आदेश भी बेअसर
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के स्पष्ट आदेशों के बावजूद
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नहरों के आसपास डेयरियां और गोशालाएं धड़ल्ले से चल रही हैं
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पशु अपशिष्ट सीधे पानी में मिल रहा है
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इससे नहरों के पानी के और ज्यादा दूषित होने का खतरा बढ़ गया है
लेकिन न ज़मीनी कार्रवाई दिखती है, न सख्ती।
सवाल अब सिस्टम से
इंदौर की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था, लेकिन हरियाणा के हालात बताते हैं कि सबक अब भी नहीं लिया गया।
सवाल साफ हैं—
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जब सैंपल फेल हो रहे थे, तब चेतावनी क्यों नहीं दी गई?
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लोगों को वैकल्पिक साफ पानी क्यों नहीं मिला?
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क्या किसी बड़े हादसे का इंतज़ार किया जा रहा है?
आज हरियाणा के लाखों लोग एक ही सवाल पूछ रहे हैं—
क्या सिस्टम अब जागेगा, या हम इसी गंदे पानी में फँसते रहेंगे?




