7 करोड़ के नुकसान में ‘चूहे’ बने आरोपी! छत्तीसगढ़ में धान घोटाले ने सिस्टम को कटघरे में खड़ा किया

कवर्धा जिले में सरकारी गोदामों से करोड़ों का धान गायब, प्रशासन बोला– चूहे और दीमक खा गए, विपक्ष ने बताया काग़ज़ी लूट

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छत्तीसगढ़ के कवर्धा में 7 करोड़ रुपये का धान गायब होने के मामले में प्रशासन ने चूहे और दीमक को जिम्मेदार बताया है। विपक्ष इसे सीधा घोटाला बता रहा है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।

 

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छत्तीसगढ़ से सामने आई एक चौंकाने वाली खबर ने सरकारी व्यवस्था, निगरानी तंत्र और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य के कवर्धा जिले में सरकारी गोदामों से लगभग 7 करोड़ रुपये मूल्य का धान गायब पाया गया है। जब इस पर सवाल उठे, तो प्रशासन की ओर से जो सफाई सामने आई, उसने विवाद को और गहरा कर दिया।

अधिकारियों का कहना है कि यह धान चूहों और दीमक की वजह से खराब हो गया और नमी व खराब रखरखाव के कारण अनाज नष्ट हुआ। लेकिन यही जवाब अब पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल बन गया है।

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 करोड़ों का अनाज और कोई निगरानी नहीं?

जिन गोदामों में यह धान रखा गया था, वे सरकारी निगरानी में आते हैं। वहां सुरक्षा कर्मचारी, निरीक्षण व्यवस्था और नियमित रिपोर्टिंग सिस्टम होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि

  • अगर धान खराब हो रहा था, तो समय रहते रिपोर्ट क्यों नहीं बनी?

  • स्टॉक वेरिफिकेशन के दौरान कमी क्यों नहीं पकड़ी गई?

  • क्या इतने बड़े नुकसान पर किसी तरह का अलार्म सिस्टम सक्रिय नहीं हुआ?

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि व्यवस्थित गड़बड़ी या घोटाले का मामला हो सकता है।

 प्रशासन की सफाई

प्रशासन का दावा है कि

  • गोदामों में नमी ज्यादा थी

  • रखरखाव के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं थे

  • चूहों और दीमक ने बड़ी मात्रा में धान को नुकसान पहुंचाया

लेकिन प्रशासन यह स्पष्ट नहीं कर पाया कि जब नुकसान बढ़ रहा था, तब ऊपरी अधिकारियों को सूचना क्यों नहीं दी गई

 विपक्ष का तीखा हमला

विपक्षी दलों ने इस पूरे मामले को सीधी लूट और काग़ज़ों का खेल करार दिया है। विपक्ष का कहना है कि

  • चूहे और दीमक को बहाना बनाकर 7 करोड़ के घोटाले को दबाने की कोशिश की जा रही है

  • असली दोषियों को बचाने के लिए फाइलों में कहानी गढ़ी गई

  • यह मामला राज्य के धान खरीद और भंडारण सिस्टम की पोल खोलता है

विपक्ष ने मांग की है कि

  • पूरे मामले की न्यायिक या उच्चस्तरीय जांच हो

  • जिम्मेदार अधिकारियों पर एफआईआर और सख्त कार्रवाई की जाए

  • यह बताया जाए कि आखिर नुकसान की जिम्मेदारी किसकी है

 सवाल सिर्फ धान का नहीं, सिस्टम का है

यह मामला सिर्फ 7 करोड़ रुपये के धान का नहीं है, बल्कि उस सिस्टम का है, जहां

  • करोड़ों का नुकसान हो जाता है

  • जवाबदेही तय नहीं होती

  • और अंत में चूहे व दीमक आरोपी बना दिए जाते हैं

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अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि
क्या इस केस में सच सामने आएगा,
या फिर यह फाइलों में दबकर रह जाएगा और चूहे ही आख़िरी आरोपी बनकर बच निकलेंगे

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