सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी की किताब को बैन करने का दिया निर्देश।क्या हैं पूरा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई में एनसीईआरटी को लगाई कड़ी फ़टकार
बीते गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने NCERT (नेशनल कौंसिल ऑफ़ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) की Social Science की कक्षा आठवीं की एक किताब पर कड़ी नाराज़गी व्यक्त करते हुए उस पर बैन लगाने का निर्देश दिया हैं।
बीते गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने NCERT (नेशनल कौंसिल ऑफ़ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) की Social Science की कक्षा आठवीं की एक किताब पर कड़ी नाराज़गी व्यक्त करते हुए उस पर बैन लगाने का निर्देश दिया हैं।

बता दें कि अदालत की यह नाराज़गी किताब के एक चैप्टर पर है जिसका शीर्षक है 'करप्शन इन ज्यूडिशरी यानि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' हैं।
गुरुवार को इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई में सर्वोच्च अदालत ने एनसीईआरटी को कड़ी फ़टकार लगाई।
इस मामले की सुनवाई तीन जजों की पीठ कर रही है जिसकी अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत कर रहे हैं।
किताब के इस चैप्टर में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और लंबित मामलों (बैकलॉग)' की चर्चा की गई है।
अदालत ने कहा कि, 'यह न्यायपालिका को बदनाम करने की साजिश प्रतीत होती है।'
आदेश सुनाते हुए अदालत ने कहा, "पुस्तक की सामग्री का प्रथम दृष्टया परीक्षण करने पर, और निदेशक से प्राप्त प्रशासनिक उत्तर के साथ पढ़ने पर, हमें प्रतीत होता है कि यह संस्थागत प्राधिकरण को कमजोर करने और न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने का एक सुनियोजित प्रयास है।"
आगे अदालत ने कहा, "प्रकाशन में हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका पर पूरा चैप्टर समर्पित किया गया है, लेकिन एक ही झटके में सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालयों और जिला न्यायालयों के गौरवशाली इतिहास को नज़रअंदाज कर दिया गया है।"
अदालत ने इस किताब की सभी प्रतियां वापस लेने का आदेश दिया है चाहे वो डिजिटल रूप में हो, ऑनलाइन हो या हार्ड कॉपी।
आदेश में कहा गया, "एनसीईआरटी, केंद्र और राज्य शिक्षा विभागों या अन्य संबंधित विभागों के समन्वय से यह सुनिश्चित करे कि पुस्तक की सभी प्रतियां-चाहे हार्ड कॉपी हों या सॉफ्ट कॉपी, जो वर्तमान में प्रचलन में हैं, भंडारण में हों या शैक्षणिक संस्थानों/दुकानों में उपलब्ध हों, उन्हें तत्काल प्रभाव से जब्त कर सार्वजनिक पहुंच से हटाया जाए।"
अदालत ने एनसीईआरटी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया कि निदेशक के विरुद्ध अदालत की अवमानना यानि कॉन्टेम्प्ट ऑफ़ कोर्ट के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए।
हालांकि पुस्तक प्रकाशित होने के बाद जब सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को नाराज़गी जताई थी तो एनसीईआरटी ने एक प्रेस नोट जारी कर किताब वापस लेने और इस चैप्टर के लिए माफ़ी मांगने की बात कही थी।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी।
इससे पहले, बुधवार को कक्षा 8 की सोशल साइंस की किताब में "न्यायपालिका में भ्रष्टाचार" टाइटल से एक चैप्टर पर सर्वोच्च अदालत के आपत्ति जताने के बाद एनसीईआरटी ने माफ़ी जारी करते हुए विवादित किताब को वापस लेने का फ़ैसला किया था।
एक प्रेस वार्ता में एनसीईआरटी ने यह माना हैं कि एक चैप्टर में "अनुचित पाठ्य सामग्री" अनजाने में शामिल हो गई और ये निर्णय लेने में ग़लती के कारण हुआ।
हालांकि, बोर्ड ने स्पष्ट किया कि वह न्यायपालिका को सर्वोच्च सम्मान देता है और उसे भारतीय संविधान का संरक्षक तथा मौलिक अधिकारों का रक्षक मानता है।
कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान (सोशल साइंस) की किताब में भारत की न्यायिक व्यवस्था के सामने मौजूद प्रमुख चुनौतियों का ज़िक्र किया गया जिसमें भ्रष्टाचार, कोर्ट में पेंडिंग केस और जजों की कमी का उल्लेख किया गया।

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नीलोफर हाशमी, देश रोजाना ऑनलाइन में सीनियर पत्रकार हैं। वे करंट अफेयर्स, ह्यूमन नेचर, सोशल और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरें बनाती हैं। मीडिया में नीलोफर को सालों का अनुभव है।



