जिलाधीश डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने पलवल में फसल अवशेष जलाने पर लगाया पूर्ण प्रतिबंध
पर्यावरण संरक्षण और जमीन की उर्वरा शक्ति को बचाने के लिए किसानों से किया सहयोग का आह्वान
जिलाधीश डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने जिला पलवल में गेहूं सहित अन्य फसलों की कटाई के सीजन के दृष्टिगत भारतीय नागरिक सुरक्षा
पलवल: जिलाधीश डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने जिला पलवल में गेहूं सहित अन्य फसलों की कटाई के सीजन के दृष्टिगत भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धारा-163 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जिले में फसल अवशेष (पराली) जलाने पर तुरंत प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह कदम नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के दिशा-निर्देशों की कड़ाई से अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
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जिलाधीश ने जारी आदेशों में स्पष्ट किया है कि फसल कटाई के बाद अवशेषों को जलाना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी एक गंभीर खतरा है। पराली जलाने से निकलने वाला जहरीला धुआं न केवल वायु प्रदूषण बढ़ाता है, बल्कि सांस की बीमारियों के मरीजों, बच्चों और बुजुर्गों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। इसके अलावा खेत में आग लगाने से भूमि के मित्र कीट मर जाते हैं, जिससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कम हो जाती है और पशुओं के लिए चारे की भारी कमी होने की संभावना बनी रहती है। उन्होंने जिले के सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ इन आदेशों को लागू करने के निर्देश दिए हैं।
आदेशों की अवहेलना पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई :
जिलाधीश ने चेतावनी देते हुए कहा यदि कोई भी व्यक्ति इन आदेशों की अवहेलना करते हुए पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध भारतीय नागरिक नियमावली-2023 की धारा-223 तथा वायु बचाव एवं प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम-1981 के प्रावधानों के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसमें भारी जुर्माना और कारावास दोनों का प्रावधान है। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे पर्यावरण के मित्र बनें और पराली को जलाने के बजाय आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग कर उसका उचित प्रबंधन करें। इससे न केवल पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, बल्कि जमीन की उर्वरता भी बनी रहेगी। अधिक जानकारी और मार्गदर्शन के लिए जिला कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के टोल फ्री नंबर या कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।




