बच्चे स्कूल तो जा रहे थे लेकिन सीख नहीं रहे थे—हरियाणा में निपुण वाटिका ने इस स्थिति को कैसे बदला

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निपुण वाटिका एक Activity-based Learning Model है, जिसमें पारंपरिक कक्षा को एक Engaging Learning Space में बदल दिया जाता है, और "Learning by Doing" पर विशेष जोर दिया जाता है। इससे बच्चों की रुचि और सीखने की गति दोनों बढ़ती हैं।

बच्चे स्कूल तो जा रहे थे लेकिन सीख नहीं रहे थे—हरियाणा के IAS नरेंद्र कुमार की एक पहल ने निपुण वाटिका की शुरुआत करके कैसे स्कूलों की तस्वीर बदल दी ।रोहतक के सरकारी स्कूलों में जहाँ बच्चों की अटेंडेंस हर दिन कम होती जा रही थी, बच्चे कक्षा में आकर भी सीखने के इच्छुक नहीं थे; वहाँ आज बच्चे एक भी दिन क्लास मिस नहीं करते और खुशी से पढ़ते हैं। एक IAS की पहल ने बच्चों के सीखने को मज़ेदार बनाया।WhatsApp Image 2026-05-04 at 3.30.54 PM (1)

वास्तविक समस्या के कारण की पहचान

ADC रोहतक और 2021 Batch के IAS नरेंद्र कुमार ने सरकारी स्कूलों में विज़िट के दौरान देखा कि बच्चों में सीखने की इच्छा तो है, लेकिन पारंपरिक व नीरस कक्षाओं के कारण उनकी सीखने में रुचि कम हो रही हैं जिससे बेसिक लर्निंग कमजोर रह जाती है।
रटने पर आधारित शिक्षा कक्षाओं में देखी गयी , जिस कारण बच्चों में जिज्ञासा और सिखने में इंटरेस्ट नहीं थाI इसी समस्या को देखते हुए IAS नरेंद्र कुमार ने निपुण वाटिका की शुरुआत की। उनका उद्देश्य गाँव के बच्चों को केवल शिक्षा देना ही नहीं, बल्कि सीखने को मजेदार, अनुभवात्मक और प्रेरणादायक बनाना भी था। जटिल सुधारों को पेश करने के बजाय, पहल ने कक्षाओं को अधिक आकर्षक और बाल-केंद्रित बनाने पर ध्यान केंद्रित किया।इसीलिए उन्होंने ऐसे मॉडल्स पर काम किया है जो बच्चों में curiosity, creativity और 21st-century skills को बढ़ावा दें। उन्होंने जून 2025 में इस idea पर काम करना शुरु किया तथा तकरीबन 2 महीने में पहली निपुण वाटिका तैयार हो गई।

"Learning by Doing" बना निपुण वाटिका का आधार

निपुण वाटिका एक Activity-based Learning Model है, जिसमें पारंपरिक कक्षा को एक Engaging Learning Space में बदलकर "Learning by Doing" पर विशेष जोर दिया जाता है। इससे बच्चों की रुचि और सीखने की गति दोनों बढ़ती हैं।निपुण वाटिका की सबसे विशेष बात है कि इसके easy व effective Learning Tools, जो मुश्किल चीज़ों को भी बच्चों के लिए इतना आसान बना देते हैं कि बच्चे actively participate करने के लिए प्रेरित होते हैlearning by doing

Interactive Tools  के माध्यम से सीखना 

गिनती सीखने के लिए बच्चे Counting Beads, number cards जैसी activities का यूज़ करते हैं, जिससे उनका बेस मजबूत होता है। भाषा के लिए मात्रा चक्र, alphabet stands, light boards, sentence maker, word builder जैसे tools इस्तेमाल करते हैं।
इन तरीकों से पढ़ाई न सिर्फ मज़ेदार बनी, बल्कि बच्चों का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। अब उन्हें Concepts आसानी से समझ आते हैं और लंबे समय तक याद रहते हैं। आज वे खुद से समझने और सीखी हुई चीज़ों को इस्तेमाल करने लगे हैं।
जो बच्चे पहले स्कूल नहीं जाना चाहते थे, आज खुशी से स्कूल जाते है तथा मज़े से सीखते, पढ़ते और खेलते भी हैं। इससे गाँव में अभिभावक भी अपने बच्चों को रोज़ स्कूल भेजने के लिए प्रेरित हुए हैं।

शिक्षकों को ट्रेनिंग व् प्रेरित करना

IAS होने के बावजूद उनके लिए इसे लागू करना आसान नहीं रहा। सीमित संसाधनों के साथ शिक्षकों को ट्रेनिंग दी गई। उन्हें हर दिन मेहनत करने के लिए प्रेरित करना, और निगरानी रखना चुनौतीपूर्ण था। लेकिन धीरे-धीरे बदलाव आया और पहल सफल होती चली गई।श्री कुमार ने कहा, "शिक्षकों को अनुभवात्मक सीखने के तरीकों को समझने में मदद करने के लिए संरचित कार्यशालाएं, प्रदर्शन कक्षाएं और व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए।

निपुण वाटिका बना हरियाणा का पहला सफल शिक्षा मॉडल 

हरियाणा का यह पहला मॉडल है, जो जल्द ही पूरे राज्य में लागू होगा। देश के हर ग्रामीण क्षेत्र में स्थित सरकारी स्कूल इससे काफी कुछ सीख सकते हैं और अपना Dropout Rate कम कर सकते हैं।रोहतक में इसकी सफलता ने इस पहल को और आगे बढ़ाने के बारे में भी चर्चा की है। हरियाणा सरकार वर्तमान में राज्य भर में निपुण वाटिका मॉडल को अपनाने पर विचार कर रही है। इस योजना के हिस्से के रूप में, प्रत्येक ब्लॉक में कम से कम दो निपुण वाटिका स्थापित करने का प्रस्ताव है, जिससे बड़ी संख्या में बच्चों तक गतिविधि-आधारित, मूलभूत शिक्षा की पहुंच का विस्तार होगा।
यह पहल हमें सिखाती है कि बदलाव लाने के लिए हमेशा बड़े-बड़े सुधारों या आंदोलनों की ज़रूरत नहीं होती। कई बार सही समस्या को पहचानकर, उस पर लगातार और सही दिशा में छोटे-छोटे कदम उठाना ही असली बदलाव बन जाता है।

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नीलोफर हाशमी, देश रोजाना ऑनलाइन में सीनियर पत्रकार हैं। वे करंट अफेयर्स, ह्यूमन नेचर, सोशल और पॉलिटिक्‍स से जुड़ी खबरें बनाती हैं। मीडिया में नीलोफर को सालों का अनुभव है।

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