स्वतंत्र पत्रकारिता लोकतंत्र की नींव : डॉ. मोहन तिवारी

सच्चाई की आवाज़ दबाई नहीं जा सकती : डॉ. मोहन तिवारी

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विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सेक्टर-12 फरीदाबाद निवासी समाजसेवी एवं वरिष्ठ पत्रकार डॉ. मोहन तिवारी ने कहा कि लोकतंत्र की असली मजबूती सिर्फ संस्थाओं से नहीं, बल्कि स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता से तय होती है।

फरीदाबाद: विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सेक्टर-12 फरीदाबाद निवासी समाजसेवी एवं वरिष्ठ पत्रकार डॉ. मोहन तिवारी ने कहा कि लोकतंत्र की असली मजबूती सिर्फ संस्थाओं से नहीं, बल्कि स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता से तय होती है। उन्होंने कहा कि प्रेस केवल खबरों का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की चेतना और सच का आईना है। जब पत्रकार बिना किसी दबाव के सच्चाई को सामने रखते हैं, तभी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही कायम रहती है।e
   डॉ. तिवारी ने बदलते दौर की चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज सूचना की गति जितनी तेज हुई है, उतनी ही तेजी से भ्रम और फर्जी खबरें भी फैल रही हैं। ऐसे समय में पत्रकारों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वही सच और झूठ के बीच की स्पष्ट रेखा खींचते हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक जिम्मेदारी है, जिसे साहस, ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ निभाना आवश्यक है। उन्होंने समाज से भी अपील की कि वे जागरूक बनें, सूचनाओं की सत्यता को परखें और जिम्मेदार पत्रकारिता को मजबूती दें। अंत में डॉ. तिवारी ने कहा कि “सच्चाई के साथ खड़ी पत्रकारिता ही लोकतंत्र की असली पहचान और सबसे बड़ी ताकत है।”

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