अंगदान की नई क्रांति की सूत्रधार बनीं स्वास्थ्य मंत्री आरती राव

आरती राव की अपील पर हरियाणा ने भरी हुंकार

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हरियाणा की धरती पर एक नई सुबह हुई है। स्वास्थ्य एवं मेडिकल एजुकेशन रिसर्च मंत्री आरती राव ने प्रदेश में अंगदान की जो मुहिम छेड़ी है, उसने दो साल से बंद पड़े इस महादान के द्वार फिर से खोल दिए हैं।

गुरुग्राम।हरियाणा की धरती पर एक नई सुबह हुई है। स्वास्थ्य एवं मेडिकल एजुकेशन रिसर्च मंत्री आरती राव ने प्रदेश में अंगदान की जो मुहिम छेड़ी है, उसने दो साल से बंद पड़े इस महादान के द्वार फिर से खोल दिए हैं। उनके प्रयासों से हरियाणा में अंगदान की एक नई क्रांति जागी है। आज प्रदेश का हर युवा, हर बुजुर्ग यह संकल्प ले रहा है कि इस नेक काम के हवन में अपनी आहुति देकर हरियाणा को अंगदान के शपथ-पत्र भरने में देश का नंबर वन राज्य बनाएंगे।
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आरती राव, स्वास्थ्य मंत्री
जब पूरे देश में अंगदान की दर 0.86 प्रति मिलियन थी और हरियाणा 0.5 से भी नीचे था, तब आरती राव ने स्वास्थ्य मंत्री का पद संभालते ही सबसे पहले इसी मुहिम को अपना मिशन बनाने की ठानी थी। उन्होंने कहा था कि मौत अटल है, लेकिन हम तय कर सकते हैं कि हमारी मौत भी किसी के जीवन का कारण बने। यही सोच लेकर वे कार्य कर रही थी गत दिनों आरती राव के पीजीआई रोहतक के दौरे पर उन्होंने अंगदान को बढ़ावा देने ले लिए चिकित्सकों को प्रोत्साहित किया ओर उन्हें आमजनता का जीवन बचाने की अपील की। आरती राव जी के प्रोत्साहन का ऐसा असर हुआ कि पीजीआईएमएस रोहतक में एक महीने में रिकॉर्ड तीन अंगदान हुए। हरियाणा प्रदेश ने पहली बार अंग एयरलिफ्ट करवाकर एक इतिहास बनवा दिया – यह सब आरती राव की इच्छाशक्ति और लगातार मॉनिटरिंग का नतीजा है।
उन्होंने न सिर्फ नीतियां बदलीं, बल्कि खुद इस मुहिम को जन-आंदोलन बनाया। मंत्री आरती राव ने अंगदान को फाइलों से निकालकर हर घर तक पहुंचा दिया।
 
 हर चौपाल बनेगी पाठशाला
प्रदेशवासियों ने ऐलान किया है कि अब सोटो (स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन हरियाणा)  हरियाणा के माध्यम से एनजीओ और अपने-अपने स्तर पर कैंप लगाए जाएंगे। पंचायत स्तर पर चौपालों में आमजन को अंगदान के प्रति जागरूक किया जाएगा। युवा टोलियां गांव-गांव जाकर बताएंगी कि एक ब्रेन डेड व्यक्ति 8 लोगों को नई जिंदगी दे सकता है। बुजुर्ग अपने अनुभव से समझाएंगे कि जो शरीर चिता में जल जाना है, अगर उससे किसी का जीवन बच जाए तो इससे बड़ा धर्म कोई नहीं।
बावल (रेवाड़ी) के समाजसेवी अनिल रायपुर कहते हैं कि बहन आरती राव ने जो बीड़ा उठाया है, हम उस नेक काम के हवन में आहुति देंगे।  हरियाणा का बच्चा-बच्चा अब अंगदान का महत्व जानेगा। हम आरती राव जी की मुहिम को रुकने नहीं देंगे।
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अनिल रायपुर, समाजसेवी
 
 सेवा का संकल्प होगा पूरा 
बावल ब्लॉक समिति चेयरमैन छत्रपाल उर्फ टिंकू ने कहा कि हम हरियाणा वासी माननीय स्वास्थ्य मंत्री बहन आरती राव का हृदय से धन्यवाद व्यक्त करते हैं। उन्होंने वह काम कर दिखाया जो सालों से अधूरा था। दो साल से ठप पड़ा अंगदान कार्यक्रम फिर से शुरू करना आसान नहीं था। धरचाना गांव के पूर्व सरपंच सूबे सिंह एवं बुजुर्ग आशाराम चौकन के अनुसार पीजीआई के ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर सिर्फ लाइव ट्रांसप्लांट करवाने में व्यस्त थे,जागरूकता शून्य थी, परिवार डरते थे। आरती राव ने एक-एक कड़ी जोड़ी। डॉक्टरों को ट्रेनिंग दिलवाई, ग्रीन कॉरिडोर की एसओपी बनवाई, पुलिस को संवेदनशील किया।
आज नतीजा सभी के सामने है कि पीजीआईएमएस में हेलीकॉप्टर से किडनी चंडीमंदिर पहुंची, लिवर से दो जिंदगियां बचीं, कॉर्निया से दो लोगों को रोशनी मिली। यह सब आरती राव की ‘स्वस्थ हरियाणा, सक्षम हरियाणा’ की सोच का असर है।
 
हर कदम पर साथ, नंबर वन का लक्ष्य
सरपंच सूबे सिंह ने कहा कि प्रदेश के युवाओं ने संकल्प लिया है कि वे माननीय स्वास्थ्य मंत्री आरती राव का हर कदम पर पूरा सहयोग करेंगे। बहन जी ने रास्ता दिखा दिया, अब मंजिल तक पहुंचाना हमारा काम है, 
बुजुर्ग आशाराम चौकन बोले कि हम चौपाल में बैठकर समझाएंगे कि मरने के बाद भी अमर कैसे हुआ जाता है। गीता कहती है – नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि। शरीर तो वस्त्र है। पुराना वस्त्र त्यागकर नया धारण करना ही जीवन है। अगर हमारे अंग किसी के काम आ जाएं तो इससे बड़ा मोक्ष कुछ नहीं होगा।
सूबे सिंह ने कहा कि हरियाणा ने ठान लिया है। बहन आरती राव ने जो चिंगारी जलाई है, अब इसे मशाल बनाना हम सबकी जिम्मेदारी है। आइए, मृत्यु को भी उत्सव बनाएं। अंगदान कीजिए, अमर हो जाइए। हरियाणा को अंगदान में नंबर वन बनाकर हम अपनी स्वास्थ्य मंत्री के इस नेक पुण्य कार्य में कदम से कदम मिलाकर दिल से उनका साथ दें।
 
एक फैसला, कई मुस्कान
आरती राव बार-बार कहती हैं कि सोचिए, अगर आपके किसी अपने को किडनी, लिवर या हार्ट की जरूरत हो और समय पर न मिले, तो कैसा लगेगा। यह सवाल अब हर हरियाणवी के दिल में घर कर गया है। लोग अपने परिवार को अपनी इच्छा बता रहे हैं। माताएं अपने बच्चों से कह रही हैं कि मेरे जाने के बाद मेरे नेत्र दान कर देना।
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