सीयू पंजाब ने सामुदायिक संवाद कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को कौशल विकास, रोजगार और नशा-मुक्ति के प्रति किया जागरूक

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ग्रामीण युवाओं को रोजगारोन्मुखी शैक्षिक अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू पंजाब) ने कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रासाफ तिवारी के नेतृत्व में एक विशेष सामुदायिक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया।

बठिंडा। ग्रामीण युवाओं को रोजगारोन्मुखी शैक्षिक अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू पंजाब) ने कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रासाफ तिवारी के नेतृत्व में एक विशेष सामुदायिक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को कौशल विकास पाठ्यक्रमों के माध्यम से अपने कौशल को उन्नत करने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में 10 गांवों से लगभग 100 लोगों ने भाग लिया, जिनमें सरपंच, स्थानीय युवा और समुदाय के सदस्य शामिल थे।IMG_3144कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय द्वारा प्रारंभ किए गए छह नए एनसीवीईटी अनुमोदित कौशल विकास पाठ्यक्रमों के बारे में जागरूकता फैलाना था। इन पाठ्यक्रमों में असिस्टेंट प्लंबर–जनरल; हेल्पर इलेक्ट्रीशियन; फंडामेंटल्स ऑफ कंप्यूटर्स;टैली ऑपरेशन एवं जीएसटी कैलकुलेशन का परिचय; बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट; तथा रेफ्रिजरेशन एवं एयर कंडीशनिंग की मूलभूत जानकारी जैसे कोर्स शामिल हैं। विश्वविद्यालय अधिकारियों ने बताया कि ये पाठ्यक्रम विशेष रूप से उन युवाओं के लिए तैयार किए गए हैं जिन्होंने 8वीं, 9वीं, 10वीं या 12वीं उत्तीर्ण की है तथा जिनके पास संबंधित अनुभव है और जो अपने कौशल एवं रोजगार क्षमता को और बेहतर बनाना चाहते हैं। पात्रता, पाठ्यक्रम और प्रवेश से जुड़ी विस्तृत जानकारी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध प्रॉस्पेक्टस में देखी जा सकती है।

सभा को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी ने राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा के अंतर्गत प्रारंभ किए गए तथा भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) द्वारा अनुमोदित इन छह रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कौशल आधारित शिक्षा देश को आगे बढ़ा सकती है और विश्वविद्यालयों को सिर्फ डिग्री देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जो युवा आगे की पढ़ाई नहीं कर सके, उनके लिए रोजगार से जुड़े कौशल विकास कार्यक्रम शुरू करना जरूरी है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और देश के विकास में योगदान दे सकें। उन्होंने युवाओं और समुदाय से कौशल विकास एवं सकारात्मक सहभागिता के माध्यम से नशामुक्त समाज के निर्माण हेतु मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।

वहीं, समकुलपति प्रो. किरण हजारिका ने कहा कि ये पाठ्यक्रम युवाओं को बिजली, प्लंबिंग, कंप्यूटर, अकाउंटिंग, स्वास्थ्य सेवा और तकनीकी क्षेत्रों में व्यावहारिक कौशल प्रदान करेंगे, जिससे उन्हें रोजगार, उद्यमिता और स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

कुलसचिव डॉ. विजय शर्मा ने बताया कि ये पाठ्यक्रम आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप युवाओं में रोजगार क्षमता, आत्मनिर्भरता और व्यावसायिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए शुरू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन पाठ्यक्रमों को आसान पात्रता, किफायती शुल्क और व्यापक प्रायोगिक प्रशिक्षण के साथ तैयार किया गया है, ताकि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के अधिक से अधिक युवा इसका लाभ उठा सकें।

कार्यक्रम के अंत में वित्त अधिकारी डॉ. राजकुमार शर्मा ने वंचित समुदायों के अधिकतम युवाओं तक इन परिवर्तनकारी अवसरों की जानकारी पहुंचाने के लिए विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता दोहराई और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रो. संजीव ठाकुर, डॉ. संजीव मंडेर एवं विश्वविद्यालय चिकित्सा अधिकारी डॉ. आकाश प्रकाश ने कार्यक्रम का संचालन किया तथा प्रतिभागियों को नशा मुक्ति और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने वाली विश्वविद्यालय की व्यापक सामुदायिक पहलों के प्रति जागरूक किया। गांवों के सरपंचों और स्थानीय निवासियों ने ग्रामीण समुदायों में सुलभ करियर उन्मुख अवसरों के प्रति जागरूकता फैलाने तथा नशा मुक्ति के लिए विश्वविद्यालय की सक्रिय सामुदायिक पहल की सराहना की।

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