लोकतंत्र के उत्सव में 'अंधेरा', सोनागाछी की 150 यौनकर्मी वोट से वंचित, प्रशासन के वादे निकले खोखले।

दस्तावेजों की भेंट चढ़ा वोट देने का अधिकार, माता-पिता के रिकॉर्ड न होने पर मतदाता सूची से कटे सोनागाछी की महिलाओं के नाम।

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कोलकाता के प्रसिद्ध रेडलाइट एरिया में 150 यौनकर्मी हुयीं मतदान से वंचित।  CEO मनोज अग्रवाल का आश्वासन भी हो गया नाकाम। कानूनी सहायता लेने को मजबूर हुयीं यौनकर्मी। 

An-SIR-camp-at-Sonagachi-in-North-Kolkata-Tuesday.-Partha-Paul

 

कोलकाता के प्रसिद्ध रेडलाइट एरिया सोनागाछी की लगभग 150 यौनकर्मी अप्रैल 2026 में हुए चुनावों में मतदान करने से वंचित रह गईं। यह स्थिति तब उत्पन्न हुई जब उनके नाम मतदाता सूची से काट दिए गए, जिससे उन्हें अपने संवैधानिक अधिकार का प्रयोग करने का मौका नहीं मिला। यह घटना तब और भी गंभीर हो जाती है जब मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज अग्रवाल ने खुद इन महिलाओं को आश्वासन दिया था कि उन्हें वोट देने से कोई नहीं रोक पाएगा।

दरसल कुछ समय पहले चुनाव आयोग ने सोनागाछी में एक विशेष शिविर का आयोजन किया था। वहां CEO मनोज अग्रवाल ने वादा किया था, "यदि किसी के पास माता-पिता के नाम का विवरण नहीं भी है, लेकिन वह वैध नागरिक है, तो आयोग अपनी 'विशेष शक्तियों' का उपयोग कर उनका नाम मतदाता सूची में शामिल करेगा।" लेकिन, जब अंतिम सूची सामने आई, तो लगभग 150 महिलाओं के नाम गायब थे। दुर्बार महिला समन्वय समिति की सचिव विशाखा लश्कर के अनुसार, कई महिलाओं को सुनवाई के लिए बुलाया गया था और दस्तावेज जमा करने के बावजूद उनका नाम शामिल नहीं किया गया।

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आपको बता दें कि अधिकांश यौनकर्मियों के नाम 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) प्रक्रिया के दौरान हटा दिए गए क्योंकि वे अपने माता-पिता के दस्तावेज या पुराने रिकॉर्ड (जैसे 2002 के दस्तावेज) पेश करने में असमर्थ थीं। इनमें से कई महिलाएं दशकों पहले अपने परिवारों को छोड़कर आई थीं और उनके पास पिछले निवास का कोई प्रमाण नहीं था।

अब यौनकर्मियों के बीच अब इस बात का डर है कि बिना पहचान पत्र और मताधिकार के उनका भविष्य असुरक्षित हो जाएगा। विशाखा लश्कर ने बताया कि कई महिलाओं के बच्चों के नाम तो सूची में हैं, लेकिन मां का नाम गायब है। सिर्फ सोनागाछी ही नहीं, बल्कि कालीघाट और खिदिरपुर जैसे इलाकों में रहने वाली यौनकर्मियों के तरफ से भी इसी तरह की खबरें आ रही हैं। 'आमरा पदातिक' संगठन की महाश्वेता मुखर्जी ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि अब डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी के माध्यम से भविष्य में दोबारा अधिकार पाने की कोशिश की जा रही है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, केवल सोनागाछी ही नहीं, बल्कि कालीघाट और बोबाजार (हर काटा गली) जैसे क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में यौनकर्मियों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए या 'निर्णयाधीन' रखे गए हैं। वर्तमान में, ये महिलाएं अपनी नागरिकता और लोकतांत्रिक पहचान को बचाने के लिए न्यायिक संघर्ष की तैयारी कर रही हैं। 

 

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