‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत दुर्लभ पांडुलिपियों का डेटाबेस किया जाएगा तैयार : उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ
आम नागरिक पांडुलिपियों की जानकारी जिला प्रशासन, वेबसाइट या मोबाइल ऐप के माध्यम से कर सकते हैं साझा
भारत की समृद्ध परम्परा, सांस्कृतिक धरोहर एवं बौद्धिक विकास के महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में प्राचीन पाण्डुलिपियां, ताड़पत्र एवं दुर्लभ अभिलेखों के संरक्षण एवं भावी पीढिय़ों तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण प्रारंभ किया गया है।
पलवल: भारत की समृद्ध परम्परा, सांस्कृतिक धरोहर एवं बौद्धिक विकास के महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में प्राचीन पाण्डुलिपियां, ताड़पत्र एवं दुर्लभ अभिलेखों के संरक्षण एवं भावी पीढिय़ों तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण प्रारंभ किया गया है। इस मिशन के अंतर्गत गत 16 मार्च 2026 से राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान संचालित किया जा रहा है, जिसमें जनभागीदारी के माध्यम से देशभर के परिवारों, मंदिरों एवं संस्थाओं में उपलब्ध पांडुलिपियों को ‘ज्ञान भारतम् ऐप’ के जरिए जियो-टैग कर सूचीबद्ध एवं डिजिटल रूप से संरक्षित किया जा रहा है।
उपायुक्त एवं ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ की जिला स्तरीय कमेटी के अध्यक्ष डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत डीडीपीओ उपमा अरोड़ा को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है तथा कमेटी के सदस्य सचिव के रूप में डीआईपीआरओ कार्य करेंगे। उन्होंने बताया कि ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला स्तरीय कमेटी का गठन किया गया, जिसके अध्यक्ष वे स्वयं हैं।
उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2025-26 के यूनियन बजट में की गई घोषणा अनुरूप द्वारा भारत सरकार ने संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत एक प्रमुख पहल के रूप में ‘ज्ञान भारतम्’ मिशन शुरू किया है, जिसके तहत देश में मौजूद दुर्लभ पांडुलिपियों का डेटाबेस तैयार किया जा रहा है।
इस मिशन का उद्देश्य भारत भर में शैक्षणिक संस्थानों, संग्रहालयों, पुस्तकालयों तथा निजी संग्रहों में उपलब्ध पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, प्रलेखन, संरक्षण, डिजिटलीकरण कर उन्हें सुलभ बनाना है। उन्होंने कहा कि इन पांडुलिपियों को समय के प्रभाव से बचाने के लिए उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना आवश्यक है।
उपायुक्त डा. वशिष्ठ ने कहा है कि जिले में जहां भी वर्षों पुरानी पांडुलिपियां सुरक्षित हैं, जिनमें धार्मिक ग्रंथ, ऐतिहासिक दस्तावेज और पारंपरिक ज्ञान का अनमोल भंडार मौजूद है, उसकी पहचान की जाए ताकि उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा सके। उन्होंने कहा कि ‘ज्ञान भारतम मिशन’ का व्यापर स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि इस मिशन में सभी की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के लिए आधुनिक तकनीकों का किया जाए उपयोग : उपायुक्त
उपायुक्त ने बताया कि सभी संबंधित विभाग समन्वय बनाकर सर्वेक्षण कार्य प्रारंभ करें और ऐसे स्थानों की सूची तैयार करें जहां दुर्लभ पांडुलिपियां उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि मठों, मंदिरों और निजी पुस्तकालयों के प्रबंधकों से संवाद स्थापित कर पांडुलिपियों के संरक्षण में उनका सहयोग लिया जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि संरक्षण कार्य के दौरान मूल दस्तावेजों को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। उन्होंने बताया कि पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाए ताकि उच्च गुणवत्ता में उनका संग्रहण संभव हो सके।
15 जून तक जारी रहेगा सर्वेक्षण का कार्य, 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी पांडुलिपियों को दी जाएगी प्राथमिकता
उपायुक्त ने बताया कि ज्ञान भारतम् अभियान के तहत लगभग 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी पांडुलिपियों को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार की ओर से सर्वे कार्य को तीन माह के भीतर पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जो 16 मार्च से शुरू हो चुका है और 15 जून तक जारी रहेगा। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से डिजिटलीकरण और संरक्षण कार्य आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस पहल से जिले की ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
अभियान में पांडुलिपि धारकों का स्वामित्व रहेगा पूर्णतया सुरक्षित : उपायुक्त
उपायुक्त ने आह्वान किया कि ज्ञान भारतम् मिशन के तहत आम नागरिक भी अपनी पांडुलिपियों की जानकारी जिला प्रशासन को सीधे रूप से gyanbharatam.com/ वेबसाइट या play.google.com/store/apps/

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