डीयू के शहीद भगत सिंह सांध्य महाविद्यालय में दो-दिवसीय एनएसएस समागम का आयोजन
दिल्ली विश्वविद्यालय के शहीद भगत सिंह सांध्य महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा “एक राष्ट्र: एक परिवार” की प्रेरणादायक थीम के अंतर्गत दो-दिवसीय वार्षिक महोत्सव ‘संयुक्त समागम’ 2026 का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।
नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय के शहीद भगत सिंह सांध्य महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा “एक राष्ट्र: एक परिवार” की प्रेरणादायक थीम के अंतर्गत दो-दिवसीय वार्षिक महोत्सव ‘संयुक्त समागम’ 2026 का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह आयोजन ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य से युवाओं को नेतृत्व, पॉलिसी संवाद तथा समावेशिता से जोड़ने पर केंद्रित रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ एनएसएस गीत, ‘वंदे मातरम्’ तथा डीयू कुलगीत के साथ दीप प्रज्वलन द्वारा किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. रश्मि सिंह (आईएएस), सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग (दिल्ली सरकार) उपस्थित रहीं। अपने संबोधन में डॉ. रश्मि सिंह ने ‘पॉलिसी और प्रैक्टिस’ के बीच की दूरी को कम करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि समाज की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए युवाओं को जमीनी हक़ीक़त से जुड़ना होगा। साथ ही, उन्होंने सामाजिक रूप से जिम्मेदार युवाओं के निर्माण में एनएसएस की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि यह युवाओं को सामुदायिक सहभागिता, जागरूकता अभियानों तथा जमीनी पहलों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का सशक्त मंच प्रदान करता है। उन्होंने भारत के ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ (युवा शक्ति) को राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए युवाओं से नेतृत्व की भूमिका निभाने का आह्वान किया।
विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. बिनय, निदेशक, श्यामा प्रसाद मुखर्जी फाउंडेशन ने युवाओं में सेवा और संवेदनशीलता की भावना को रेखांकित करते हुए कहा, “भारत केवल दया का देश नहीं, बल्कि करुणा का देश है।” उन्होंने भारतीय समाज में सामाजिक पूँजी की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि किसी भी विपरीत परिस्थिति में समाज स्वयं आगे आकर समाधान का हिस्सा बनता है। एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शरद कुमार यादव ने कार्यक्रम के बारे में बताते हुए कहा कि इस समागम का उद्देश्य युवाओं को सामाजिक सरोकारों से जोड़ना तथा उनमें नेतृत्व क्षमता का विकास करना है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जहाँ एक ओर एनएसएस समिट, कॉन्फ्रेंस और संयुक्त लीडरशिप डायलॉग जैसे मंचों पर समकालीन सामाजिक मुद्दों पर सार्थक विचार-विमर्श हुआ, वहीं दूसरी ओर सामाजिक समावेशिता को बढ़ावा देने हेतु विभिन्न रचनात्मक गतिविधियाँ आयोजित की गईं। इस ‘संयुक्त समागम’ में विशेष रूप से सक्षम बच्चों के लिए ‘पोस्टर बैग निर्माण’ तथा एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए ‘पेपर बैग निर्माण’ जैसी गतिविधियाँ शामिल रहीं। इसके अतिरिक्त सामाजिक मुद्दों पर भाषण एवं लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया, जिसका उद्देश्य छात्रों में संवेदनशीलता, सहानुभूति और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को विकसित करना है। साथ ही, सामाजिक विषयों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग तथा एनएसएस की वार्षिक पत्रिका का विमोचन भी इस समागम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
समापन समारोह में आयुषी डबास (आईएएस), सचिव, दिल्ली एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं और उन्होंने एनएसएस स्वयंसेवकों को संबोधित किया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में किशन कुमार की गरिमामयी उपस्थिति भी रही। समारोह का एक प्रमुख आकर्षण एनएसएस स्वयंसेवकों का सम्मान समारोह रहा। महाविद्यालय की एनएसएस इकाई में दो वर्षों तक निरंतर और उत्कृष्ट सेवा देने वाले स्वयंसेवकों को अतिथियों द्वारा प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके समर्पण, अनुशासन और समाज के प्रति निस्वार्थ सेवा भावना की सराहना का प्रतीक रहा। अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकगण एवं विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही, जिसने इस समागम को सफल एवं सार्थक बनाया।

About The Author
नीलोफर हाशमी, देश रोजाना ऑनलाइन में सीनियर पत्रकार हैं। वे करंट अफेयर्स, ह्यूमन नेचर, सोशल और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरें बनाती हैं। मीडिया में नीलोफर को सालों का अनुभव है।
संबंधित समाचार



