सावधान : अब फिशिंग और सोशल इंजीनियरिंग के माध्यम से हो रहे हैं साइबर फ्रॉड : एसपी हेमेंद्र मीणा

- फर्जी लिंक, कॉल, ईमेल और मैसेज के माध्यम से ठग ले रहे हैं लोगों की निजी जानकारी - थोड़ी सी लापरवाही से बैंक खाता, सोशल मीडिया व पहचान से जुड़ी जानकारी हो सकती है चोरी

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गुरुवार को पुलिस अधीक्षक हेमेंद्र कुमार मीणा ने आमजन को आगाह करते हुए बताया कि साइबर अपराधी “फिशिंग” और "सोशल इंजीनियरिंग" तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को धोखा देकर उनकी गोपनीय जानकारी हासिल कर रहे हैं।

रेवाड़ी: गुरुवार को पुलिस अधीक्षक हेमेंद्र कुमार मीणा ने आमजन को आगाह करते हुए बताया कि साइबर अपराधी “फिशिंग” और "सोशल इंजीनियरिंग" तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को धोखा देकर उनकी गोपनीय जानकारी हासिल कर रहे हैं। ये तरीके दिखने में साधारण लगते हैं, लेकिन इनके जरिए बड़े स्तर पर आर्थिक ठगी की जा रही है। 

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एसपी हेमेंद्र कुमार मीणा।


उन्होंने बताया कि फिशिंग में ठग फर्जी ईमेल, एसएमएस या व्हाट्सएप मैसेज भेजकर लोगों को किसी लिंक पर क्लिक करने के लिए प्रेरित करते हैं। ये लिंक देखने में बैंक, सरकारी वेबसाइट या किसी प्रतिष्ठित कंपनी जैसे लगते हैं, लेकिन वास्तव में नकली होते हैं। जैसे ही यूजर उस लिंक पर अपनी जानकारी (यूजरनेम, पासवर्ड, ओटीपी, कार्ड डिटेल आदि) दर्ज करता है, वह सीधे ठगों के पास पहुंच जाती है। वहीं सोशल इंजीनियरिंग में ठग भावनात्मक या मनोवैज्ञानिक तरीके अपनाकर लोगों को भ्रमित करते हैं। वे खुद को बैंक अधिकारी, पुलिस कर्मचारी, रिश्तेदार या किसी कंपनी का प्रतिनिधि बताकर विश्वास जीतते हैं और फिर किसी बहाने से जरूरी जानकारी हासिल कर लेते हैं। 

आम तौर पर ऐसे किया जाता है फ्रॉड : 

आपका बैंक खाता बंद हो जाएगा" या केवाईसी अपडेट करें, जैसे मैसेज भेजे जाते हैं। लॉटरी, इनाम, जॉब ऑफर या रिफंड के नाम पर लिंक भेजा जाता है। कॉल करके खुद को बैंक/पुलिस/सरकारी अधिकारी बताकर डराया या लालच दिया जाता है। सोशल मीडिया अकाउंट हैक कर आपके परिचितों से पैसे मांगने के मैसेज भेजे जाते हैं। 

ऐसे करें बचाव : 

किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांचें। बैंक, सरकारी संस्था या कोई भी कंपनी कभी भी फोन या मैसेज के जरिए ओटीपी, पासवर्ड या कार्ड डिटेल नहीं मांगती। किसी भी कॉल या मैसेज में दी गई जानकारी पर तुरंत भरोसा न करें, पहले सत्यापन करें। अपने सभी ऑनलाइन अकाउंट्स के लिए मजबूत पासवर्ड रखें और समय-समय पर बदलते रहें। टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) को हमेशा सक्रिय रखें। सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी (मोबाइल नंबर, पता, बैंक डिटेल आदि) साझा करने से बचें। 

साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत करें यह कार्य : 

तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। अपने बैंक/संबंधित सेवा प्रदाता को तुरंत सूचित करें। नजदीकी पुलिस थाना या साइबर थाना में शिकायत दें। पुलिस अधीक्षक हेमेंद्र कुमार मीणा ने कहा कि साइबर ठगी से बचने के लिए जागरूकता और सतर्कता सबसे बड़ा हथियार है। किसी भी अनजान कॉल, मैसेज या लिंक पर भरोसा करने से पहले दो बार सोचें। आपकी सावधानी ही आपकी सुरक्षा है। 

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नीलोफर हाशमी, देश रोजाना ऑनलाइन में सीनियर पत्रकार हैं। वे करंट अफेयर्स, ह्यूमन नेचर, सोशल और पॉलिटिक्‍स से जुड़ी खबरें बनाती हैं। मीडिया में नीलोफर को सालों का अनुभव है।

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