बेहतर शिक्षा व्यवस्था ही तय करेगी सरकारों की लोकप्रियता : संजय मग्गू

संजय मग्गू
धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने और प्रह्लाद जोशी के नए शिक्षा मंत्री का कार्यभार संभाल लेने के बाद भी पेपरलीक मुद्दा खत्म नहीं हुआ है। संसद सत्र के पहले दिन से ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध बना हुआ है। पेपरलीक पर कड़ी सजा का कानून भी लोकसभा में पास हो चुका है। पेपर लीक मामले में पकड़े गए लोगों को कड़ी से कड़ी सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। दरअसल, यह मुद्दा इतना संवेदनशील है कि जंतर मंतर पर हुए आंदोलन को हलके में नहीं लिया जा सकता है। सच कहा जाए तो पिछले 36 दिनों तक चले युवाओं के आंदोलन की तुलना शांत पड़े तालाब में फेंके गए पत्थर से की जा सकती है। पिछले बारह साल में देश की वैचारिक शांति तब भंग हुई थी, जब संसद द्वारा पारित तीन काले कानूनों को रद्द कराने के लिए किसानों ने दिल्ली में धरना-प्रदर्शन किया था। तब भी सरकार को झुकना पड़ा था। इसके बाद युवाओं के आंदोलन में भी सरकार को झुकना पड़ा। पिछले बारह साल में पीएम मोदी ने अपनी छवि कुछ इस तरह से गढ़ी थी कि उनके रहते देश में कुछ भी गलत नहीं हो सकता है। वह देश का विकास करने में दिन-रात अनवरत लगे हुए हैं। उनकी छवि गढ़ने में भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं से लेकर मीडिया की एक बहुत बड़ी भूमिका रही। लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि पेपर लीक मामले में सरकार पूरी तरह नाकाम साबित हुई।
सरकारी और गैर सरकारी क्षेत्रों में नौकरियों और रोजगार के अवसर की कमी युवा समुदाय पिछले कई वर्षों से महसूस कर रहा था। हर साल पढ़ लिखकर रोजगार बाजार में उतरने वाला युवा हताश और निराश हो रहा था। उसके भीतर एक किस्म का असंतोष पनप रहा था। इस असंतोष को हवा मिली नीट पेपर लीक से। सरकार के प्रति धीरे-धीरे इकट्ठा हुए आक्रोश को उभारने में सीजेपी और कांग्रेस ने मदद की। युवाओं को लगा कि यदि इस बार चूक गए, तो शायद दोबारा कभी मौका नहीं मिलेगा और वह अपनी मुक्ति का मार्ग तलाशने निकल पड़े। इसके बाद जिस तरह की राजनीतिक गतिविधियां रहीं, वह सभी जानते हैं। युवाओं के इस आंदोलन ने एक बात का साफ संकेत दे दिया है कि केंद्र या राज्य में सत्ता किसी भी पार्टी की हो, वह अपनी जिम्मेदारी और जवाबदेही से नहीं बच सकती है। बिहार में जहां भाजपा शासित राज्य में युवा विभिन्न मुद्दों को लेकर आंदोलित हैं, तो वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस गठबंधन की सरकार के खिलाफ भी मोर्चा खोले हुए हैं।
पंजाब में भी पेपर लीक और शिक्षा क्षेत्र में अव्यवस्था को लेकर लोगों में आम आदमी पार्टी के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा है। सरकारों की लोकप्रियता अब उनकी जवाबदेही के आधार पर ही आंकी जाएगी, यह जेन जेड के आंदोलन ने बिल्कुल साफ कर दिया है। अपने भविष्य के प्रति पूरी तरह सजग, निडर और बिना किसी राजनीतिक पूर्वाग्रहों के युवा चाहते हैं कि शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन आए। उन्हें बेहतर से बेहतर शिक्षा हासिल हो और जब वह शिक्षित हो जाएं, तो पारदर्शी तरीके से नौकरी या रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।

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नीलोफर हाशमी, देश रोजाना ऑनलाइन में सीनियर पत्रकार हैं। वे करंट अफेयर्स, ह्यूमन नेचर, सोशल और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरें बनाती हैं। मीडिया में नीलोफर को सालों का अनुभव है।
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