Faridabad News : दुखों का मूल कारण नास्तिकता: स्वामी सच्चिदानन्द महाराज
आर्य समाज सेक्टर 7ए के तत्वावधान में तीन दिवसीय वेद प्रचार कार्यक्रम का शुभारम्भ वैदिक मंत्रोच्चारण और यज्ञ से हुआ। यह कार्यक्रम 31 मई तक चलेगा।
आर्य समाज सेक्टर 7ए के तत्वावधान में तीन दिवसीय वेद प्रचार कार्यक्रम का शुभारम्भ वैदिक मंत्रोच्चारण और यज्ञ से हुआ। यह कार्यक्रम 31 मई तक चलेगा। 
यज्ञ में आचार्य सतीश सत्यम ने यज्ञ ब्रह्मा की भूमिका निभाई, उनके साथ 15 वर्षीय ब्रह्मचारी पुलकित आत्रेय एवं 8 वर्षीय ब्रह्मचारी देवांश आत्रेय ने अत्यंत सुरीले और शुद्ध मन्त्र पाठ से वातावरण को भक्तिमय कर दिया। यज्ञ के उपरांत आचार्य सतीश सत्यम ने अत्यंत मधुर भजनों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री देशबन्धु आर्य, विशिष्ट अतिथि वसु मित्र सत्यार्थी, राजन सिक्का और जितेंद्र सरल का 'ओउम्' पटका पहनाकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अशोक चौधरी ने की। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, आर्य जगत के प्रसिद्ध वैदिक विद्वान एवं क्रांतिकारी संत स्वामी सच्चिदानन्द महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने विश्व के सृजनकर्ता और पालक परमेश्वर की नित्य उपासना का आह्वान करते हुए कहा कि ईश्वर को न मानना ही नास्तिकता है और यही दुखों का मूल कारण है। उन्होंने कहा कि इंसान अपनी मर्जी से दुनिया में नहीं आता और न ही जाता है, बल्कि इस संपूर्ण सृष्टि का नियंत्रण ईश्वर के हाथों में है। ईश्वर हमारे कर्मों का फल देते हैं, इसलिए अंतःकरण की पवित्रता के लिए ईश्वर को जानना और मानना आवश्यक है। इंसान यह जानते हुए भी कि ईश्वर कर्मों का फल देता है, गलत काम करने से नहीं चूकता। अंत में, विशिष्ट अतिथि वसु मित्र सत्यार्थी ने स्वामी सच्चिदानन्द महाराज, अध्यक्ष निष्ठाकर आर्य, कार्यकारिणी सदस्यों और कार्यक्रम को सफल बनाने में जुटे सभी उपस्थित लोगों का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि हमें हर परिस्थिति में प्रभु का स्मरण करते हुए उनके उपकारों के लिए कृतज्ञ रहना चाहिए। इस अवसर पर निष्ठाकर आर्य, सतीश कौशिक, नन्द किशोर मेहता, विनोद मोदी, प्रकाश वती आर्या, सन्ध्या आर्या, ऊषा सेठी, संघमित्रा कौशिक सहित विभिन्न आर्य समाजों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

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