Mewat /Taudu News: तावडू नगरपालिका में ‘फर्जी बिलों’ का कथित खेल! ME पर करोड़ों के भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, शिकायत से मचा हड़कंप।
लाल पट्टी: पुरानी गलियों को कागजों में नया दिखाने से लेकर स्ट्रीट लाइटों तक पर सवाल, फर्जी प्रॉपर्टी आईडी और आय से अधिक संपत्ति के भी आरोप
नगरपालिका तावडू में विकास कार्यों के नाम पर कथित फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार के आरोपों ने अब तूल पकड़ लिया है। नगरपालिका के म्यूनिसिपल इंजीनियर (ME) मनीष सहरावत के खिलाफ पूर्व मनोनीत पार्षद कृष्ण सहरावत ने मोर्चा खोलते हुए मुख्यमंत्री हरियाणा, महानिदेशक शहरी स्थानीय निकाय विभाग तथा उपायुक्त नूंह को शिकायत भेजकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
तावडू: नगरपालिका तावडू में विकास कार्यों के नाम पर कथित फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार के आरोपों ने अब तूल पकड़ लिया है। नगरपालिका के म्यूनिसिपल इंजीनियर (ME) मनीष सहरावत के खिलाफ पूर्व मनोनीत पार्षद कृष्ण सहरावत ने मोर्चा खोलते हुए मुख्यमंत्री हरियाणा, महानिदेशक शहरी स्थानीय निकाय विभाग तथा उपायुक्त नूंह को शिकायत भेजकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। शिकायत सामने आने के बाद नगरपालिका के कामकाज और कथित भुगतान को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

शिकायत में आरोप—पुरानी सड़कें कागजों में बनती रहीं और बिल निकलते रहे! शिकायतकर्ता का आरोप है कि नगरपालिका क्षेत्र में पहले से बनी गलियों और रास्तों को दोबारा निर्माण कार्य दिखाकर कथित तौर पर बिल पास करवाए गए। इतना ही नहीं, स्ट्रीट लाइट और हाईमास्ट लाइट की खरीद, मरम्मत और अन्य कार्यों के नाम पर भी कथित तौर पर भारी अनियमितताएं की गईं। अनधिकृत क्षेत्रों में कच्चे रास्तों के निर्माण को लेकर भी बिलों पर सवाल उठाए गए हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच में पुष्टि होती है तो सरकारी धन के इस्तेमाल और विकास कार्यों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
फर्जी प्रॉपर्टी आईडी से अवैध कॉलोनियों को बढ़ावा देने का भी आरोप! शिकायत में ME पर पिछले कई वर्षों से तावडू नगरपालिका में कार्यरत रहने का उल्लेख करते हुए प्रॉपर्टी डीलरों से कथित मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि कृषि भूमि पर विकसित की जा रही कथित अवैध कॉलोनियों को वैध दर्शाने के लिए फर्जी प्रॉपर्टी आईडी तैयार की गईं। इसके साथ ही शिकायतकर्ता ने ME पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने तथा रिश्तेदारों के नाम कथित बेनामी संपत्तियां खड़ी करने के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पूरे मामले की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी।
अब असली सवाल—कब खुलेगा ‘फर्जी बिलों’ का राज? पूर्व पार्षद कृष्ण सहरावत ने मांग की है कि नगरपालिका में पिछले वर्षों के विकास कार्यों, भुगतान किए गए बिलों, प्रॉपर्टी आईडी, स्ट्रीट लाइट एवं हाईमास्ट से जुड़े रिकॉर्ड तथा संबंधित संपत्तियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। शिकायत पर प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और जांच में क्या सामने आता है, इस पर अब तावडूवासियों की नजरें टिकी हैं।
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नगरपालिका का एमई म्यूनिसिपल इंजीनियर मनीष सहरावत ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि इन मामलों की पूर्व में कई बार जांच हो चुकी है। संबंधित विकास कार्यों, बिलों, भुगतान, स्ट्रीट लाइट और प्रॉपर्टी आईडी से जुड़े रिकॉर्ड की जांच अधिकारियों द्वारा की गई है, जिसमें आरोपों की पुष्टि नहीं हुई। विभाग के पास सभी कार्यों से संबंधित स्वीकृति, माप पुस्तिका, बिल-वाउचर व भुगतान के दस्तावेज रिकॉर्ड में मौजूद हैं। किसी भी सक्षम जांच में नगरपालिका अपना पूरा रिकॉर्ड प्रस्तुत करने को तैयार है और प्रशासन पारदर्शिता के साथ नियमानुसार कार्य कर रहा है।

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नीलोफर हाशमी, देश रोजाना ऑनलाइन में सीनियर पत्रकार हैं। वे करंट अफेयर्स, ह्यूमन नेचर, सोशल और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरें बनाती हैं। मीडिया में नीलोफर को सालों का अनुभव है।
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