Chandigarh News: स्टेथोस्कोप से प्रशासन तक: नए डी जी आई पी आर डॉ. आदित्य दहिया की बहुआयामी सफलता की कहानी
एम्स के डॉक्टर, हार्वर्ड के विद्वान और हरियाणा के प्रभावी आईएएस अधिकारी के रूप में बनाई अलग पहचान
भारतीय प्रशासनिक सेवा में कुछ अधिकारी अपनी कार्यशैली, दूरदृष्टि और जनहित के प्रति समर्पण के कारण अलग पहचान बनाते हैं। हरियाणा कैडर के 2011 बैच के आईएएस अधिकारी डॉ. आदित्य दहिया ऐसे ही अधिकारियों में शामिल हैं। चिकित्सा विज्ञान की पढ़ाई से लेकर प्रशासनिक सेवा और सार्वजनिक नीति तक उनका सफर यह साबित करता है कि यदि लक्ष्य समाज में व्यापक बदलाव लाना हो तो किसी भी क्षेत्र की विशेषज्ञता जनकल्याण का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
चंडीगढ़: भारतीय प्रशासनिक सेवा में कुछ अधिकारी अपनी कार्यशैली, दूरदृष्टि और जनहित के प्रति समर्पण के कारण अलग पहचान बनाते हैं। हरियाणा कैडर के 2011 बैच के आईएएस अधिकारी डॉ. आदित्य दहिया ऐसे ही अधिकारियों में शामिल हैं। चिकित्सा विज्ञान की पढ़ाई से लेकर प्रशासनिक सेवा और सार्वजनिक नीति तक उनका सफर यह साबित करता है कि यदि लक्ष्य समाज में व्यापक बदलाव लाना हो तो किसी भी क्षेत्र की विशेषज्ञता जनकल्याण का प्रभावी माध्यम बन सकती है। हाल ही में हरियाणा सरकार ने उन्हें महानिदेशक, सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग (डीजीआईपीआर) की जिम्मेदारी सौंपी है, जो उनकी प्रशासनिक क्षमता और नेतृत्व पर सरकार के भरोसे को दर्शाता है।

एक नजर में डॉ. आदित्य दहिया
नाम: डॉ. आदित्य दहिया
सेवा: भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस)
बैच: 2011, हरियाणा कैडर
जन्म: 22 दिसंबर 1987
शिक्षा: एमबीबीएस (एम्स, नई दिल्ली), एम.ए. (पब्लिक पॉलिसी, इग्नू), मास्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ (हार्वर्ड यूनिवर्सिटी)
वर्तमान दायित्व: महानिदेशक, सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग, हरियाणा
एम्स से प्रशासनिक सेवा तक का सफर: डॉ. आदित्य दहिया ने देश के प्रतिष्ठित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की। चिकित्सा क्षेत्र में सुनहरा भविष्य उनके सामने था, लेकिन उन्होंने महसूस किया कि समाज में व्यापक स्तर पर परिवर्तन लाने के लिए प्रशासनिक सेवा अधिक प्रभावी मंच है। इसी सोच के साथ उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा उत्तीर्ण कर 2011 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में स्थान बनाया। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ उन्होंने अपनी शैक्षणिक यात्रा भी जारी रखी। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से पब्लिक पॉलिसी में स्नातकोत्तर और विश्व प्रसिद्ध हार्वर्ड विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ की पढ़ाई ने उन्हें नीति निर्माण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में वैश्विक दृष्टिकोण प्रदान किया।
जिला प्रशासन में छोड़ी प्रभावी छाप: डॉ. दहिया ने जींद और करनाल के उपायुक्त के रूप में कार्य करते हुए प्रशासन को जनकेंद्रित बनाने का प्रयास किया। विकास योजनाओं की नियमित समीक्षा, समस्याओं के त्वरित समाधान, पारदर्शी कार्यप्रणाली और समयबद्ध क्रियान्वयन उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषताएं रहीं।
इसके अलावा उन्होंने अतिरिक्त उपायुक्त फरीदाबाद, एसडीएम जगाधरी और रोहतक में सहायक आयुक्त जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी जिम्मेदारियां निभाईं। प्रत्येक पद पर उन्होंने प्रशासन को अधिक उत्तरदायी और परिणामोन्मुख बनाने का प्रयास किया।
नीति निर्माण से सुशासन तक अहम भूमिका: राज्य स्तर पर भी डॉ. आदित्य दहिया ने अनेक महत्वपूर्ण विभागों में नेतृत्व किया। चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग में निदेशक एवं विशेष सचिव के रूप में उन्होंने मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में कार्य किया। मानव संसाधन, सामान्य प्रशासन, प्रशासनिक सुधार तथा मॉनिटरिंग एवं कोऑर्डिनेशन विभागों में भी उन्होंने प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने पर विशेष बल दिया। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग तथा विभिन्न सरकारी उपक्रमों में प्रबंधकीय जिम्मेदारियां निभाते हुए उन्होंने प्रभावी समन्वय और बेहतर प्रशासनिक प्रबंधन का परिचय दिया।
स्वास्थ्य और प्रशासन का अनूठा समन्वय: डॉक्टर होने के कारण डॉ. दहिया स्वास्थ्य व्यवस्था की व्यावहारिक चुनौतियों को गहराई से समझते हैं। वहीं प्रशासनिक अनुभव उन्हें नीति निर्माण और उसके प्रभावी क्रियान्वयन की क्षमता प्रदान करता है। हार्वर्ड विश्वविद्यालय में सार्वजनिक स्वास्थ्य के अध्ययन ने उनकी इस विशेषज्ञता को और समृद्ध किया। यही कारण है कि स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशासन के क्षेत्रों में उनका दृष्टिकोण संतुलित और व्यावहारिक माना जाता है।
डिजिटल गवर्नेंस के समर्थक: डॉ. आदित्य दहिया तकनीक आधारित प्रशासन के प्रबल समर्थक हैं। उनका मानना है कि ई-गवर्नेंस, डेटा आधारित निर्णय, डिजिटल मॉनिटरिंग और पारदर्शी प्रक्रियाएं प्रशासन को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाती हैं। योजनाओं की निरंतर समीक्षा और परिणाम आधारित मूल्यांकन उनकी कार्यशैली की प्रमुख पहचान है।
उल्लेखनीय उपलब्धियां: एम्स से डॉक्टर बनने के बाद आईएएस अधिकारी बनने का प्रेरक सफर, हार्वर्ड विश्वविद्यालय से सार्वजनिक स्वास्थ्य में उच्च शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग में नीतिगत सुधारों में योगदान, जिला प्रशासन में जनकेंद्रित और पारदर्शी प्रशासनिक मॉडल को बढ़ावा, प्रशासनिक सुधारों तथा डिजिटल गवर्नेंस को प्रोत्साहन और विभिन्न जनकल्याणकारी अभियानों के प्रभावी क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका उनकी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणा: डॉ. आदित्य दहिया की यात्रा यह संदेश देती है कि सफलता केवल पद प्राप्त करने में नहीं, बल्कि उस पद का उपयोग समाज के व्यापक हित में करने में है। उन्होंने यह सिद्ध किया कि निरंतर अध्ययन, कड़ी मेहनत और सेवा भावना के साथ किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त की जा सकती है। डॉक्टर से आईएएस अधिकारी बनने तक का उनका सफर आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
नई जिम्मेदारी, नई अपेक्षाएं: डीजीआईपीआर के रूप में नई जिम्मेदारी संभालने के साथ डॉ. आदित्य दहिया से यह अपेक्षा की जा रही है कि वे सूचना प्रबंधन, जनसंपर्क और सरकारी संचार प्रणाली को और अधिक आधुनिक, पारदर्शी तथा प्रभावी बनाएंगे। चिकित्सा, शिक्षा, नीति निर्माण और प्रशासन का उनका व्यापक अनुभव निश्चित रूप से इस दायित्व में भी नई कार्य संस्कृति और नवाचार को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध हो सकता है।




