मेवात में एचआईवी/एड्स का बढ़ता खतरा: 810 केस सामने

मेवात स्वास्थ्य विभाग की बड़ी चिंता और चुनौतियां।

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मेवात जिले में एचआईवी/एड्स के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। जिले में अब तक 810 एचआईवी केस सामने आ चुके हैं और हर साल करीब 100 नए मरीज जुड़ रहे हैं।

मेवात/ हरियाणा। मेवात जिले में एचआईवी/एड्स के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। जिले में अब तक 810 एचआईवी केस सामने आ चुके हैं और हर साल करीब 100 नए मरीज जुड़ रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है और रोकथाम के लिए लगातार अभियान चला रहा है। सिविल सर्जन डॉ. संदीप मेहता के अनुसार, “यह केवल स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का विषय भी है, जिसमें हर व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है।”
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सिविल सर्जन डॉ. संदीप मेहता
 
जांच और उपचार की पुख्ता व्यवस्था
मेवात में एचआईवी की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जांच और उपचार की मजबूत व्यवस्था की है। जिले में 3 आईसीटीसी (इंटीग्रेटेड काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर) संचालित हैं, जहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की जांच और काउंसलिंग की जाती है। यहां मरीजों को न सिर्फ बीमारी की जानकारी दी जाती है बल्कि उन्हें मुफ्त इलाज की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है। विभाग का प्रयास है कि संक्रमण को शुरुआती स्तर पर ही पहचान लिया जाए ताकि इसके प्रसार को रोका जा सके।
 
गर्भवती महिलाओं की अनिवार्य जांच
एचआईवी संक्रमण को रोकने के लिए गर्भवती महिलाओं की अनिवार्य जांच की जा रही है। इसका उद्देश्य मां से बच्चे में संक्रमण (मदर-टू-चाइल्ड ट्रांसमिशन) को रोकना है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि समय पर जांच और उपचार से नवजात को इस गंभीर बीमारी से पूरी तरह बचाया जा सकता है।
 
गांव-गांव जागरूकता अभियान
जिले में जागरूकता को सबसे बड़ा हथियार मानते हुए स्वास्थ्य विभाग लगातार शिविरों का आयोजन कर रहा है। काउंसलर्स रोस्टर के अनुसार गांवों में जाकर लोगों को एचआईवी के कारण, लक्षण, बचाव और उपचार के बारे में जानकारी दे रहे हैं। हाल ही में नूंह खंड के 12 गांवों में विशेष अभियान चलाया गया, जिसमें राज्य स्तर की टीम ने भी भाग लिया। इन अभियानों का फोकस उन इलाकों पर रहा जहां संक्रमण के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं, जैसे नूंह ब्लॉक, घासेड़ा और रोजका मेव क्षेत्र।
 
10 साल में 810 केस, हर साल बढ़ रहे मरीज
आंकड़ों के अनुसार पिछले 10 वर्षों में मेवात में 810 एचआईवी मरीज सामने आए हैं। चिंताजनक बात यह है कि हर साल औसतन 100 नए केस जुड़ रहे हैं। यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि अभी भी जागरूकता और रोकथाम के प्रयासों को और मजबूत करने की जरूरत है।
 
ड्राइवरों से बदलकर अब नई वजहें
पहले एचआईवी के प्रसार के लिए ट्रक चालकों को प्रमुख कारण माना जाता था, जिन्हें “ब्रिज पॉपुलेशन” कहा जाता है। हालांकि अब जागरूकता अभियानों के कारण इस वर्ग में काफी सुधार हुआ है। ट्रांसपोर्ट नगरों और ढाबों पर नियमित कैंप लगाकर उन्हें सुरक्षित यौन संबंध और कंडोम के उपयोग के प्रति जागरूक किया गया है।
डॉ. मेहता के अनुसार अब एचआईवी के मामलों में लगभग 70 प्रतिशत योगदान असुरक्षित संबंधों और संक्रमित सिरिंज के कारण है, जबकि ड्राइवरों की हिस्सेदारी घटकर करीब 30 प्रतिशत रह गई है।
 
संक्रमित सिरिंज और नशा बना बड़ा खतरा
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वर्तमान में एचआईवी फैलने का सबसे बड़ा कारण संक्रमित सिरिंज का उपयोग है। विशेष रूप से नशा करने वाले लोग एक ही सुई का बार-बार इस्तेमाल करते हैं, जिससे संक्रमण तेजी से फैलता है। इसके अलावा कुछ झोलाछाप डॉक्टर भी एक ही सिरिंज का कई मरीजों पर उपयोग कर रहे हैं।
  मेवात के सिविल सर्जन डॉ. मेहता ने कहा, “सिर्फ 1-2 रुपये की सिरिंज के लिए लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है, जो बेहद गंभीर समस्या है।”
 
सामाजिक संगठनों की अहम भूमिका
एचआईवी रोकथाम में सामाजिक संगठनों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। मेवात में टीआई पहल सोसाइटी और टीआई (ARDS) आदर्श रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी जैसी संस्थाएं स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर काम कर रही हैं। ये संगठन हाई रिस्क ग्रुप्स तक पहुंच बनाकर उन्हें जागरूक करने, काउंसलिंग देने और जांच के लिए प्रेरित करने का कार्य कर रहे हैं।
 
सरकार की मदद: पेंशन और मुफ्त दवाइयां
सरकार द्वारा एचआईवी मरीजों के लिए आर्थिक सहायता और उपचार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रत्येक पंजीकृत मरीज को 2250 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जाती है और मुफ्त दवाइयां भी दी जाती हैं। डॉक्टरों के अनुसार यदि मरीज नियमित रूप से दवा लेता है तो वह 15-20 साल तक सामान्य जीवन जी सकता है, लेकिन इलाज में लापरवाही जानलेवा हो सकती है।
 
डर नहीं, जांच जरूरी
इस बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती लोगों का डर और सामाजिक बदनामी का भय है। कई लोग जांच कराने से बचते हैं और बीमारी छिपाते हैं, जिससे संक्रमण की चेन नहीं टूट पाती। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि मरीज की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।
डॉ. मेहता ने अपील की, “लोग डरें नहीं, सामने आकर जांच कराएं और समय पर इलाज लें। यही सबसे बड़ा बचाव है।”
 
आधुनिक रोकथाम उपायों पर जोर।
एचआईवी रोकथाम के लिए अब आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है। PrEP (प्री-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस) और PEP (पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस) जैसी विधियां संक्रमण को रोकने में प्रभावी साबित हो रही हैं। इसके साथ ही सुरक्षित यौन संबंध, कंडोम का उपयोग, नियमित जांच और एक ही सिरिंज का दोबारा उपयोग न करना बेहद जरूरी है।
 
गुप्त रणनीति और प्रशासनिक सहयोग की जरूरत
डॉ. मेहता ने सुझाव दिया कि शहरी और संवेदनशील क्षेत्रों में गुप्त रूप से टेस्टिंग अभियान चलाए जा सकते हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच बनाई जा सके। उन्होंने अवैध गतिविधियों और झोलाछाप डॉक्टरों पर रोक लगाने के लिए पुलिस और प्रशासन के सहयोग को भी जरूरी बताया।
 
सामूहिक प्रयास ही समाधान
अंत में सिविल सर्जन ने कहा कि एचआईवी/एड्स से लड़ाई केवल स्वास्थ्य विभाग की नहीं है। इसमें समाज, प्रशासन, सामाजिक संगठनों और आम जनता सभी को मिलकर काम करना होगा।
“अगर अभी सख्त कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है। जागरूकता, समय पर जांच और जिम्मेदार व्यवहार ही इससे बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।”
मेवात फिलहाल एचआईवी के मामले में एक संवेदनशील मोड़ पर खड़ा है। ऐसे में जरूरी है कि हर व्यक्ति जागरूक बने और इस बीमारी के खिलाफ लड़ाई में अपनी जिम्मेदारी निभाए।
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नीलोफर हाशमी, देश रोजाना ऑनलाइन में सीनियर पत्रकार हैं। वे करंट अफेयर्स, ह्यूमन नेचर, सोशल और पॉलिटिक्‍स से जुड़ी खबरें बनाती हैं। मीडिया में नीलोफर को सालों का अनुभव है।

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