Rewari News: ठेकेदार पर अधिकारियों की “सरपरस्ती”
सफाई कर्मियों ने लगाया आरोप: ठेकेदार करता है अभद्रता, नहीं मिल रही ईएसआई व पीएफ तक की सुविधा
शहर की डोर-टू-डोर कचरा उठान व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। 100 दिन पहले गत 8 फरवरी को 5 वर्षों के लिए 29 करोड रुपए मे शहर से डोर टू डोर कचरा उठान तथा निस्तारण के लिए टेंडर छोड़ा गया था।सरकार द्वारा डोर टू डोर कचरा उठान के लिए शुरू की गई व्यवस्था अब बदहाली, अव्यवस्था और आरोपों के बीच घिरती दिखाई दे रही है।
रेवाड़ी: शहर की डोर-टू-डोर कचरा उठान व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। 100 दिन पहले गत 8 फरवरी को 5 वर्षों के लिए 29 करोड रुपए मे शहर से डोर टू डोर कचरा उठान तथा निस्तारण के लिए टेंडर छोड़ा गया था।सरकार द्वारा डोर टू डोर कचरा उठान के लिए शुरू की गई व्यवस्था अब बदहाली, अव्यवस्था और आरोपों के बीच घिरती दिखाई दे रही है। शहर में डोर टू डोर कचरा उठान में लगे करीब 130 कर्मचारियों ने वेतन और सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं की मांग को लेकर हड़ताल कर दी है।
कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से शहर में कचरे के ढेर लगने शुरू हो गए हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा उन्हें समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा। कई कर्मचारियों ने बताया कि पिछले कई महीनों से वेतन में देरी हो रही है, जिसके कारण घर चलाना मुश्किल हो गया है। कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें मजबूरी में उधार मांगकर परिवार का खर्च चलाना पड़ रहा है। उनका यह भी आरोप है कि सरकार द्वारा निर्धारित सुविधाएं, सुरक्षा उपकरण, ईएसआई, पीएफ तथा अन्य श्रमिक अधिकार भी उन्हें नहीं दिए जा रहे। हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों का कहना है कि टेंडर के बाद अधिकारी जो दावे कर रहे हैं, वह जमीनी हकीकत से काफी दूर है। यह कहे तो अतिशयोक्ति नहीं होगी कि ठेकेदार व अधिकारी मिलकर जनता की गाढी कमाई के 29 करोड रुपए को ठिकाने लगा रहे हैं। कर्मचारियों ने कहा कि सुबह से शाम तक शहर की सफाई का जिम्मा निभाने के बावजूद उन्हें सम्मानजनक वेतन और मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल रहीं।कर्मचारियों का आरोप है कि कई बार अधिकारियों को शिकायत देने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हुई। एक कर्मचारी ने बताया कि बच्चों की फीस भरने तक के पैसे नहीं हैं और कई कर्मचारियों के घरों में राशन तक की समस्या खड़ी हो चुकी है।कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि जब तक वेतन और सुविधाओं को लेकर ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक वह काम पर नहीं लौटेंगे।
नगर परिषद द्वारा 8 फरवरी को करीब 29 करोड़ रुपये का टेंडर पांच वर्षों के लिए छोड़ा गया था। दावा किया गया था कि शहर में आधुनिक व्यवस्था के तहत डोर-टू-डोर कचरा उठान होगा और नई तकनीक व आधुनिक वाहनों के माध्यम से सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाया जाएगा। लेकिन 100 दिन बीतने के बाद भी हालात सुधरने की बजाय बिगड़ते नजर आ रहे हैं।
कर्मचारियों का आरोप है कि टेंडर की शर्तों का पालन नहीं किया जा रहा। कचरा उठान के लिए नए वाहन खरीदने की बजाय बाहर से लाई गई पुरानी और कंडम गाड़ियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कई जगहों पर कृषि कार्य में उपयोग होने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली से कचरा उठाया जा रहा है, जिससे शहर में गंदगी और प्रदूषण दोनों बढ़ रहे हैं। शहर में चल रही पुरानी और धुआं छोड़ने वाली गाड़ियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारीयों का कहना है कि ये वाहन प्रदूषण फैलाने का काम कर रहे हैं। शहर से गुजरते समय इन गाड़ियों से दुर्गंध फैलती है और कई बार कचरा रास्ते में ही गिर जाता है। आरोप है कि जिला प्रदूषण विभाग भी इस पूरे मामले में आंखें मूंदे बैठा है।
सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जब टेंडर में आधुनिक और व्यवस्थित कचरा उठान प्रणाली लागू करने की बात कही गई थी, तो आखिर पुरानी और कंडम गाड़ियों को अनुमति कैसे दी गई।कर्मचारियों की हड़ताल के बाद शहर के कई इलाकों में कचरे के ढेर लगने शुरू हो गए हैं। कॉलोनियों, बाजारों और मुख्य मार्गों पर समय पर कचरा नहीं उठने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। गर्मी के मौसम में कचरे के ढेर से दुर्गंध और बीमारियां फैलने का खतरा भी बढ़ गया है।
लोगों का कहना है कि नगर परिषद और प्रशासन को पहले ही व्यवस्था पर निगरानी रखनी चाहिए थी। लेकिन लगातार शिकायतों के बावजूद कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई, जिसका खामियाजा अब आम जनता भुगत रही है। सफाई व्यवस्था को लेकर विपक्ष भी लगातार अधिकारियों और ठेकेदार पर सवाल उठा रहा है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि ठेकेदार को अधिकारियों के साथ-साथ राजनीतिक संरक्षण भी प्राप्त है, जिसके चलते टेंडर की शर्तों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। विपक्ष का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई की जाती तो शहर को इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जनता को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
पूरा मामला अब अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है। शहर में लगातार अव्यवस्था के बावजूद यदि ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तो इससे अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आती है। लोगों का कहना है कि आखिर 100 दिन बाद भी टेंडर की शर्तों को पूरा न करने पर कोई नोटिस या दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। शहरवासियों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले दिनों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि आखिर 29 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी शहर को बदहाल व्यवस्था क्यों झेलनी पड़ रही है।
इस संबंध में जब डीएमसी ब्रह्मप्रकाश से बात की गई तो उन्होंने कहा कि कर्मचारियों का मामला उनके संज्ञान में आया है, जल्द कर्मचारियों को वेतन दिलाया जाएगाl
उधर जब सफाई ठेकेदार से उनका पक्ष जानना चाहा तो वह कैमरे पर अपनी बात रखने की बजाय दुम दबाकर भागते दिखाई दिएl
इस मामले में कांग्रेस के शहरी जिला अध्यक्ष प्रवीण चौधरी शालू ने कहा कि वह इस मामले को पहले ही कई बार उठा चुके हैं लेकिन अधिकारियों ने इस और कोई ध्यान नहीं दियाl ठेकेदार टेंडर की किसी भी शर्त को पूरा नहीं कर रहा है, जिसका खामियाजा रेवाड़ी की जनता को भुगतना पड़ रहा हैl इस मामले में प्रशासन को जल्द सख्त कदम उठाने चाहिए ताकि रेवाड़ी की जनता को गंदगी से निजात मिल सकेl

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नीलोफर हाशमी, देश रोजाना ऑनलाइन में सीनियर पत्रकार हैं। वे करंट अफेयर्स, ह्यूमन नेचर, सोशल और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरें बनाती हैं। मीडिया में नीलोफर को सालों का अनुभव है।



