पार्सल डिलीवरी स्कैम से सावधान रहें – एसपी हेमेंद्र

ऑनलाइन शॉपिंग की आड़ में ठगी का नया जाल

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हाल ही में देशभर में “पार्सल डिलीवरी स्कैम" के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें लोग लाखों रुपए गवां बैठे। इस संदर्भ में एसपी रेवाड़ी श्री हेमेंद्र कुमार मीणा, आईपीएस ने आमजन को सतर्क रहने की एडवाइजरी जारी की है। 

रेवाड़ी: आज के डिजिटल युग में ऑनलाइन शॉपिंग और कूरियर सेवाएं हर घर की सामान्य आवश्यकता बन चुकी हैं। लोग मोबाइल ऐप्स और वेबसाइट्स के माध्यम से सामान मंगवाते हैं, लेकिन इसी सुविधा का फायदा उठाकर साइबर अपराधी भोले-भाले नागरिकों को ठगने में लगे हुए हैं। हाल ही में देशभर में “पार्सल डिलीवरी स्कैम" के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें लोग लाखों रुपए गवां बैठे। इस संदर्भ में एसपी रेवाड़ी श्री हेमेंद्र कुमार मीणा, आईपीएस ने आमजन को सतर्क रहने की एडवाइजरी जारी की है। 

  • महंगे गिफ्ट और कस्टम शुल्क के नाम पर ठगे जा रहे लोग


  • इस स्कैम में ठग खुद को कूरियर एजेंट, कस्टम अधिकारी या विदेशी मित्र बताकर दावा करते हैं कि आपके नाम से विदेश से कोई महंगा गिफ्ट आया है। कभी-कभी इसमें सोना, हीरे-जवाहरात, नकद राशि या महंगे ब्रांडेड सामान का लालच दिया जाता है। इसके बाद कॉल, ईमेल या व्हाट्सएप संदेश भेजकर यह बताया जाता है कि पार्सल एयरपोर्ट के कस्टम विभाग में फंसा है और उसे छुड़ाने के लिए तुरंत टैक्स या शुल्क चुकाना होगा। शुरुआत में मामूली रकम मांगी जाती है, लेकिन एक बार भुगतान करने के बाद लगातार नए-नए चार्जेज की मांग शुरू हो जाती है।

चेतावनी के संकेत

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि ऐसे स्कैम में ठग लालच और डर दोनों का इस्तेमाल करते हैं। वे कभी महंगे उपहार का लालच देकर तो कभी कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर पीड़ितों पर दबाव बनाते हैं। इस तरह की ठगी के कुछ स्पष्ट संकेत हैं:

अनजान नंबर या ईमेल से गिफ्ट संदेश आना।

केवल UPI या ई-वॉलेट से पेमेंट की मांग होना।

निजी बैंक अकाउंट में पैसे डालने का दबाव।

बिना रसीद के कंपनी/कस्टम के नाम पर पैसे मांगना।

सावधानी ही बचाव

ऐसे मामलों में सबसे महत्वपूर्ण है सतर्क रहना। किसी भी अनजान कॉल, ईमेल या लिंक पर भरोसा न करें और भुगतान से पहले पूरी तरह पुष्टि करें। यदि वास्तव में कोई पार्सल विदेश से आया हो, तो केवल अधिकृत वेबसाइट या कंपनी के कस्टमर केयर से ही संपर्क करें। व्यक्तिगत जानकारी जैसे आधार, पैन, बैंक अकाउंट नंबर या ओटीपी साझा न करें। इसके अलावा मोबाइल और ईमेल खातों पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करें और किसी भी दबाव में आकर तुरंत भुगतान करने से बचें।

शिकायत के लिए www.cybercrime.gov.in या 1930 पर करें संपर्क 

यदि कोई नागरिक इस तरह के स्कैम का शिकार हो जाए तो तुरंत निकटतम थाने में शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही साइबर अपराध की शिकायत राष्ट्रीय पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर या राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दर्ज कराई जा सकती है। बैंक लेन-देन की रसीद, चैट और ईमेल जैसे सभी सबूत सुरक्षित रखें ताकि जांच में सहायता मिल सके।

 एसपी का संदेश

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इस अवसर पर एसपी रेवाड़ी श्री हेमेंद्र कुमार मीणा, आईपीएस ने कहा, “रेवाड़ी पुलिस आमजन से अपील करती है कि लालच और डर में आकर कोई भी ऑनलाइन भुगतान न करें। साइबर ठग अपने हथकंडे बदलते रहते हैं, लेकिन यदि नागरिक सतर्क रहें तो किसी भी स्कैम से बचा जा सकता है। याद रखें - सतर्क नागरिक ही सुरक्षित नागरिक है। किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश की तुरंत सूचना पुलिस को दें।”

रेवाड़ी पुलिस नागरिकों को आश्वस्त करती है कि साइबर अपराधों के खिलाफ हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

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नीलोफर हाशमी, देश रोजाना ऑनलाइन में सीनियर पत्रकार हैं। वे करंट अफेयर्स, ह्यूमन नेचर, सोशल और पॉलिटिक्‍स से जुड़ी खबरें बनाती हैं। मीडिया में नीलोफर को सालों का अनुभव है।

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