Faridabad News : ईज़ ऑफ डूइंग रिसर्च एंड डेवलपमेंट फ्रेमवर्क पर विशेषज्ञों ने किया मंथन, विकसित भारत @2047 के लिए शोध व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर
अमृता विश्वविद्यालय फरीदाबाद में आयोजित हुई नीति आयोग की राष्ट्रीय परामर्श बैठक
अमृता विश्व विद्यापीठम, फरीदाबाद के डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक पॉलिसी ने अमृता अस्पताल, फरीदाबाद में नीति आयोग के साथ मिलकर "ईज़ ऑफ डूइंग रिसर्च एंड डेवलपमेंट: हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस के लिए असेसमेंट फ्रेमवर्क"विषय पर राष्ट्रीय स्तर की परामर्श बैठक का आयोजन किया।
फरीदाबाद: अमृता विश्व विद्यापीठम, फरीदाबाद के डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक पॉलिसी (DPP) ने अमृता अस्पताल, फरीदाबाद में नीति आयोग के साथ मिलकर "ईज़ ऑफ डूइंग रिसर्च एंड डेवलपमेंट (EoDR&D): हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस के लिए असेसमेंट फ्रेमवर्क"विषय पर राष्ट्रीय स्तर की परामर्श बैठक का आयोजन किया। इस उच्चस्तरीय बैठक में नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, शोध प्रशासकों, शिक्षाविदों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों के विशेषज्ञों ने भारत में शोध और नवाचार को अधिक सक्षम बनाने पर व्यापक चर्चा की। 
बैठक की अध्यक्षता नीति आयोग के सीनियर एडवाइजर (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) प्रो. विवेक कुमार सिंह ने की। उन्होंने ऐसे संस्थागत मूल्यांकन ढांचे की आवश्यकता पर बल दिया, जो केवल शोध परिणामों का आकलन न करे, बल्कि उन प्रक्रियाओं, व्यवस्थाओं और संसाधनों का भी मूल्यांकन करे जो गुणवत्तापूर्ण शोध को संभव बनाते हैं। प्रस्तावित फ्रेमवर्क का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों को अपनी शोध प्रणाली की कमियों की पहचान करने, उन्हें दूर करने और निरंतर सुधार की दिशा में आगे बढ़ने में सहायता प्रदान करना है।
यह परामर्श बैठक नीति आयोग की राष्ट्रीय पहल "ईज़ ऑफ डूइंग रिसर्च एंड डेवलपमेंट: रिमूविंग ऑब्स्टेकल्स, प्रमोटिंग एनेब्लर्स" के तहत आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए व्यावहारिक, पारदर्शी और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप मूल्यांकन प्रणाली विकसित करना है। इस अवसर पर प्रो. विवेक कुमार सिंह, सीनियर एडवाइजर (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी), नीति आयोग ने कहा, "भारत को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करना है तो शोध व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सरल और शोधकर्ताओं के अनुकूल बनाना होगा। 'ईज़ ऑफ डूइंग रिसर्च एंड डेवलपमेंट' फ्रेमवर्क का उद्देश्य संस्थानों को उनकी चुनौतियों की पहचान करने, आंतरिक व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने और शोध के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने में सहयोग देना है। हमारा लक्ष्य केवल शोध उपलब्धियों का मूल्यांकन करना नहीं, बल्कि उत्कृष्टता, सहयोग, जिम्मेदार नवाचार और समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालने वाली शोध संस्कृति को बढ़ावा देना है। ऐसे सामूहिक प्रयास विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।"
बैठक में नीति आयोग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), सीएसआईआर-नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी (CSIR-NPL), फाउंडेशन फॉर एडवांसिंग साइंस एंड टेक्नोलॉजी (FAST India), इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी (INSA), यूनेस्को नई दिल्ली, ग्लोबल डेवलपमेंट नेटवर्क (GDN) सहित देश-विदेश के अनेक प्रमुख संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। प्रमुख प्रतिभागियों में डॉ. अशोक ए. सोनकुसरे, डॉ. त्यागराजू बीएम, सुश्री नबा सुरूर और सुश्री सिमरजोत कौर (नीति आयोग); श्री प्रवीण रॉय और डॉ. परवीन अरोड़ा (DST); डॉ. विनय कुमार और डॉ. एस.पी. वर्मा (DSIR); डॉ. गोपीचंद मेरुगु (UGC); डॉ. राजीव कुमार सिंह (CSIR-NPL); श्री शील कपूर, सुश्री अंकिता सिंह और श्री विबोध नौटियाल (FAST India); सुश्री फमीदा खान और सुश्री ज्योत्सना मौर्य (INSA); श्री शैलेन्द्र सिगडेल (यूनेस्को नई दिल्ली) तथा डॉ. संचारी मुखोपाध्याय (GDN) शामिल रहे।
अमृता विश्वविद्यालय की ओर से प्रो. भवानी राव, डॉ. संजीव सिंह, प्रो. कमल बिजलानी और डॉ. सुजीत भट्टाचार्य ने विश्वविद्यालय के बहु-विषयक शोध मॉडल को प्रस्तुत करते हुए विज्ञान, प्रौद्योगिकी, सार्वजनिक नीति, सामाजिक विज्ञान और सामुदायिक नवाचार के ऑफन्वित दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। वहीं डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक पॉलिसी के डॉ. क्रिस्टोफर कोली, डॉ. निमिता पांडे और डॉ. विक्टोरिया उस्तेंको ने भी चर्चा में सक्रिय भूमिका निभाई। बैठक के दौरान शोध प्रशासन को सरल बनाने, संस्थागत आरएंडडी कार्यालयों को मजबूत करने, शोध संचालन में पारदर्शिता बढ़ाने, नैतिक एवं जिम्मेदार नवाचार को प्रोत्साहित करने तथा शोध के सामाजिक प्रभाव को मूल्यांकन का हिस्सा बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। साथ ही साक्ष्य-आधारित और पारदर्शी स्व-मूल्यांकन प्रणाली विकसित करने के लिए विभिन्न मूल्यांकन मानकों और संकेतकों पर भी चर्चा की गई। बैठक का समापन इस साझा संकल्प के साथ हुआ कि ऐसा मूल्यांकन ढांचा तैयार किया जाए, जिससे उच्च शिक्षण संस्थान अपनी चुनौतियों की पहचान कर सकें, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को अपनाएं, शोध सहायता तंत्र को सशक्त बनाएं और भारत की वैश्विक शोध प्रतिस्पर्धा को नई मजबूती मिले। विशेषज्ञों ने इसे विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
अंत में अमृता विश्व विद्यापीठम के डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक पॉलिसी ने इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल में सहभागी बनने का अवसर प्रदान करने के लिए नीति आयोग और सभी सहयोगी संस्थानों का आभार व्यक्त किया। ईज़ ऑफ डूइंग रिसर्च एंड डेवलपमेंट नीति आयोग की एक राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य ऐसा व्यावहारिक मूल्यांकन ढांचा तैयार करना है जो उच्च शिक्षण संस्थानों में शोध को सहयोग देने वाली व्यवस्थाओं—जैसे प्रशासन, बुनियादी ढांचा, वित्तीय सहायता, शोध प्रक्रियाएं, उद्योग-अकादमिक सहयोग, नवाचार और संस्थागत क्षमता—का समग्र आकलन करे। यह पारंपरिक रैंकिंग प्रणाली से अलग है और संस्थानों को शोध से जुड़ी बाधाओं की पहचान कर उन्हें दूर करने, शोध पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने तथा विकसित भारत @2047 के लक्ष्य के अनुरूप भारत की शोध एवं नवाचार क्षमता को नई गति देने पर केंद्रित है।

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