Palwal News : सात राज्यों से प्रतिभागियों की सहभागिता, लगभग 100 शोध-सारांशों के साथ राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

Desh Rojana
On

गोस्वामी गणेशदत्त सनातन धर्म महाविद्यालय, पलवल में आईक्यूएसी एवं जीव विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में “आत्म-चिकित्सा एवं सततता: स्वस्थ भविष्य के आधारस्तंभ” विषय पर महानिदेशक, उच्चतर शिक्षा विभाग, हरियाणा द्वारा अनुमोदित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया।

गोस्वामी गणेशदत्त सनातन धर्म महाविद्यालय, पलवल में आईक्यूएसी एवं जीव विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में “आत्म-चिकित्सा एवं सततता: स्वस्थ भविष्य के आधारस्तंभ” विषय पर महानिदेशक, उच्चतर शिक्षा विभाग, हरियाणा द्वारा अनुमोदित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। ff

संगोष्ठी का आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. नरेश कुमार के कुशल मार्गदर्शन में किया गया। संगोष्ठी का उद्देश्य आत्म-चिकित्सा, स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन, स्वस्थ जीवनशैली तथा सतत विकास के विभिन्न आयामों पर शैक्षणिक एवं शोधपरक संवाद को बढ़ावा देना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र का मंच संचालन डॉ. मनीषा अग्रवाल ने किया। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए अतिथियों एवं वक्ताओं का परिचय कराया तथा सत्र की कार्यवाही को गरिमापूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. नरेश कुमार ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, वक्ताओं, शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने संगोष्ठी के विषय की समसामयिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक संतुलन, आत्म-चिकित्सा, स्वस्थ जीवनशैली तथा पर्यावरण के प्रति जागरूकता आवश्यक है। इसके पश्चात डॉ. वंदना कालरा ने संगोष्ठी के विषय एवं उद्देश्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने आत्म-चिकित्सा एवं सतत जीवनशैली की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए बताया कि वर्तमान समय में व्यक्तिगत स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्थिरता को एक-दूसरे से जोड़कर देखना आवश्यक है। उन्होंने संगोष्ठी के विभिन्न सत्रों एवं विषय-वस्तु की भी जानकारी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. कृष्ण कांत, रजिस्ट्रार, श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र रहे। उन्होंने अपने संबोधन में स्वस्थ जीवन के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा, आयुष पद्धतियों तथा संतुलित जीवनशैली के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रमुख वक्ता के रूप में प्रो. नसीब सिंह गिल, वरिष्ठ प्रोफेसर, कंप्यूटर विज्ञान एवं अनुप्रयोग विभाग तथा डीन, गणितीय एवं संगणनात्मक विज्ञान संकाय, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक ने विषय के विभिन्न आयामों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रो. राजेंद्र प्रसाद गर्ग, वरिष्ठ प्रोफेसर एवं पूर्व निदेशक एवं विभागाध्यक्ष, शारीरिक शिक्षा विभाग, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक ने भी अपने संबोधन के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली, शारीरिक सक्रियता एवं समग्र स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित किया। प्रथम सत्र के अंत मे प्रो. मंजुला बत्रा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए मुख्य अतिथि, प्रमुख वक्ताओं, अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजन से जुड़े सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। संगोष्ठी के तकनीकी सत्रों में आत्म-चिकित्सा, शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन, योग, व्यायाम, पोषण, स्वस्थ दिनचर्या, पर्यावरण संरक्षण तथा सतत जीवनशैली जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर शोधपरक प्रस्तुतियाँ दी गईं। प्रो. वंदना त्यागी, प्राचार्य, सरस्वती महिला महाविद्यालय, पलवल ने तकनीकी सत्र की अध्यक्षता की। प्रो. सीमा सिंह, इंद्रप्रस्थ कॉलेज फॉर वूमेन, दिल्ली विश्वविद्यालय ने प्रतिभागियों को संबोधित किया। विभिन्न तकनीकी सत्रों में डॉ. के. एल. दुआ, डॉ. अनीता वर्मा, प्रो. भारती कुकरेजा, डॉ. प्रवीण चुग, डॉ. रचना कसाना, डॉ. हिमांशु अरोड़ा तथा प्रो. डॉ. प्रवीण कुमार वर्मा ने अपने विचार एवं शोधपरक प्रस्तुतियाँ रखीं। तृतीय एवं चतुर्थ तकनीकी सत्रों का समापन प्रो. डॉ. प्रवीण कुमार वर्मा ने किया। उन्होंने प्रस्तुत किए गए शोध-पत्रों के प्रमुख बिंदुओं को रेखांकित करते हुए विषय की व्यावहारिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। शोधार्थियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने मौखिक तथा पोस्टर प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए तथा विशेषज्ञों के साथ सार्थक संवाद किया। संगोष्ठी की विशेष उपलब्धि यह रही कि इसमें सात राज्यों से प्रतिभागियों ने सहभागिता की तथा लगभग 100 शोध-सारांश प्राप्त हुए। विभिन्न संस्थानों से आए प्रतिभागियों की व्यापक भागीदारी ने संगोष्ठी को राष्ट्रीय एवं बहुविषयक स्वरूप प्रदान किया। प्रतिभागियों ने विषय से संबंधित प्रश्नों के माध्यम से विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श किया तथा आत्म-चिकित्सा एवं सतत जीवनशैली से संबंधित नवीन दृष्टिकोणों को समझा। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली, मानसिक तनाव, अनियमित दिनचर्या और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच स्वास्थ्य को केवल रोगमुक्ति तक सीमित न रखकर शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक एवं सामाजिक संतुलन के व्यापक संदर्भ में समझना आवश्यक है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, योग, ध्यान, सकारात्मक चिंतन तथा प्रकृति के साथ सामंजस्य को स्वस्थ जीवन के महत्वपूर्ण आधार बताया गया। साथ ही प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार को भावी पीढ़ियों के लिए आवश्यक बताया गया। संगोष्ठी के वैलेडिक्टरी एवं समापन सत्र में अधिवक्ता श्री महेंद्र कालरा, अध्यक्ष, गवर्निंग बॉडी, जी.जी.डी.एस.डी. कॉलेज तथा श्री बंशीधर मखीजा, सचिव, गवर्निंग बॉडी, जी.जी.डी.एस.डी. कॉलेज की गरिमामयी उपस्थिति रही। दोनों अतिथियों ने संगोष्ठी के विषय की समसामयिक प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए महाविद्यालय द्वारा स्वास्थ्य, आत्म-चिकित्सा एवं सतत जीवनशैली जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक आयोजन किए जाने की सराहना की ।वैलेडिक्टरी सत्र का संचालन डॉ. नेहा भटनागर ने प्रभावपूर्ण ढंग से किया। उन्होंने सत्र की कार्यवाही को गरिमापूर्ण एवं सुव्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया। इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. नरेश कुमार ने संगोष्ठी को सफल एवं ज्ञानवर्धक आयोजन बताते हुए सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, शोधार्थियों, प्रतिभागियों तथा आयोजन टीम का आभार व्यक्त किया।
संगोष्ठी की समन्वयक प्रो. डॉ. कांता रानी एवं डॉ. रुचि शर्मा ने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों को एक साझा मंच पर लाकर स्वास्थ्य, आत्म-चिकित्सा एवं सततता से जुड़े विषयों पर सार्थक अकादमिक संवाद को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया। उन्होंने सभी सहयोगियों के सामूहिक प्रयासों को संगोष्ठी की सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया। संगोष्ठी की समन्वयक डॉ. रुचि शर्मा ने समापन अवसर पर पूरे आयोजन का संक्षिप्त प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि संगोष्ठी में सात राज्यों से प्रतिभागियों की सहभागिता रही तथा लगभग 100 शोध-सारांश प्राप्त हुए। उन्होंने सभी प्रतिभागियों, वक्ताओं, शोधार्थियों, अतिथियों, आयोजन समिति, आईक्यूएसी, जीव विज्ञान विभाग, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। संगोष्ठी के सफल आयोजन में डॉ. मनीषा अग्रवाल एवं डॉ. नेहा भटनागर, आयोजन सचिव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजन की विभिन्न व्यवस्थाओं एवं तकनीकी समन्वय में श्री अंकित एवं श्री राहुल का विशेष एवं सराहनीय योगदान रहा। आयोजन समिति, आईक्यूएसी, जीव विज्ञान विभाग, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के सामूहिक प्रयासों से सभी सत्रों का सुचारू संचालन संभव हुआ।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। संगोष्ठी का समापन सकारात्मक ऊर्जा, ज्ञानवर्धक विचारों तथा स्वस्थ एवं सतत भविष्य के लिए सामूहिक प्रयास के संकल्प के साथ हुआ। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ।

Desh Rojana Hiring Ad

About The Author

संबंधित समाचार

Desh Rojana Hiring Ad